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I-PAC पर ED की छापेमारी, विपक्ष में बेचैनी

In Politics
January 09, 2026
rajneetiguru.com - I-PAC पर ED की छापेमारी से विपक्ष में चिंता। Image Credit – The Indian Express

नई दिल्ली: चुनावी रणनीति और राजनीतिक परामर्श देने वाली संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया तलाशी ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने इन कार्रवाइयों को “पार्टी कार्यालय पर छापे जैसा” बताते हुए एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब तमिलनाडु सहित कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज हो रही हैं और राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है।

I-PAC, जिसे चुनावी रणनीतियों, डेटा विश्लेषण और जमीनी अभियान प्रबंधन के लिए जाना जाता है, वर्तमान में कई दलों के साथ काम कर रहा है। इनमें तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अलावा तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) भी शामिल है। विपक्ष का कहना है कि ऐसे समय में जांच एजेंसियों की सक्रियता राजनीतिक संदेश देने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर दबाव बनाने का प्रयास है। एक वरिष्ठ विपक्षी नेता ने कहा, “यह कदम किसी निजी संस्था की जांच से अधिक राजनीतिक दलों की गतिविधियों को प्रभावित करने जैसा प्रतीत होता है।” विपक्ष का दावा है कि रणनीतिक सलाह देने वाली संस्थाओं पर इस तरह की कार्रवाई से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के मैदान को असमान बनाया जा रहा है।

हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि तलाशी कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। एजेंसी से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से कहा गया, “सभी कदम प्रचलित कानूनों के अनुसार उठाए गए हैं और किसी भी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं हैं।” सरकार के सूत्रों का भी कहना है कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम करती हैं और उन्हें किसी दल के हित या विरोध से जोड़कर देखना उचित नहीं है।

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में, राजनीतिक रणनीति फर्मों की भूमिका भी चर्चा में है। पिछले एक दशक में I-PAC जैसी संस्थाएं चुनावी अभियानों का अहम हिस्सा बन चुकी हैं—चाहे वह बूथ स्तर की योजना हो, मतदाता डेटा का विश्लेषण या संदेश निर्माण। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनाव अधिक पेशेवर और तकनीक-आधारित होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे इन संस्थाओं की अहमियत बढ़ी है, और इसी कारण वे राजनीतिक विवादों के केंद्र में भी आ जाती हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तमिलनाडु में DMK के साथ I-PAC का जुड़ाव विपक्ष की चिंताओं को और बढ़ाता है, क्योंकि राज्य में चुनावी माहौल धीरे-धीरे गर्म हो रहा है। एक चुनावी विश्लेषक के अनुसार, “जब रणनीतिक संस्थाएं सक्रिय रूप से चुनावी राज्यों में काम कर रही हों, तब जांच एजेंसियों की कार्रवाई को संदेह की नजर से देखा जाना स्वाभाविक है, भले ही कानूनी प्रक्रिया अपनी जगह हो।”

वहीं, सत्तारूढ़ दल के नेताओं का तर्क है कि विपक्ष हर जांच को राजनीतिक रंग देकर संस्थागत प्रक्रियाओं पर सवाल उठाता है। उनका कहना है कि यदि कोई अनियमितता नहीं है तो जांच से डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

यह विवाद ऐसे समय उभरा है जब विपक्षी दल पहले से ही केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका को लेकर एकजुटता दिखा रहे हैं। हाल के महीनों में ED और अन्य एजेंसियों की कार्रवाइयों को लेकर कई विपक्षी दलों ने साझा मंचों से आवाज उठाई है। I-PAC से जुड़ा यह मामला उसी व्यापक बहस का हिस्सा बनता जा रहा है, जिसमें संस्थानों की स्वायत्तता और राजनीतिक निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इससे चुनावी रणनीतियों तथा राजनीतिक परामर्श उद्योग पर दीर्घकालिक असर पड़ता है। फिलहाल, ED की कार्रवाई ने विपक्ष की बेचैनी बढ़ा दी है और चुनावी राजनीति में एक नया विवाद जोड़ दिया है।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
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