नई दिल्ली – भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने आधिकारिक तौर पर 2026 के विधानसभा चुनावों का बिगुल फूंक दिया है, जिसके साथ ही पाँच प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘आदर्श आचार संहिता’ (MCC) के सख्त दायरे में ला दिया गया है। 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के लिए औपचारिक अधिसूचना जारी होने के साथ ही, चुनाव पैनल ने चुनावी कदाचार को रोकने के लिए एक अभूतपूर्व तकनीकी और प्रशासनिक ग्रिड तैनात किया है।
घोषणा के साथ ही प्रभावी हुई आचार संहिता अब न केवल चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों पर, बल्कि इन विशिष्ट क्षेत्रों से संबंधित केंद्र सरकार के नीतिगत निर्णयों पर भी लागू होगी। इस कदम का उद्देश्य “सत्ताधारी दल के अनुचित लाभ” को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से मुक्त रहे।
“जीरो टॉलरेंस” का जनादेश
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) राजीव कुमार ने चुनावी नैतिकता के उल्लंघन के प्रति “जीरो टॉलरेंस” (शून्य सहनशीलता) की नीति पर जोर दिया है। चुनाव वाले राज्यों के मुख्य सचिवों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को भेजे गए एक व्यापक निर्देश में, आयोग ने सरकारी, सार्वजनिक और निजी संपत्तियों से सभी प्रकार के राजनीतिक विरूपण (पोस्टर, बैनर आदि) को तुरंत हटाने का आदेश दिया है।
इसमें राजनीतिक पोस्टर, बैनर और दीवारों पर लिखे नारों को हटाना शामिल है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मालिक की लिखित सहमति के बिना किसी भी निजी संपत्ति का उपयोग राजनीतिक ब्रांडिंग (झंडे या स्टिकर) के लिए नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, सरकारी खजाने की लागत पर विज्ञापनों और प्रचार के लिए आधिकारिक वाहनों या विश्राम गृहों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
तकनीकी सतर्कता: cVIGIL और ‘सुविधा’ पोर्टल
निगरानी क्षमताओं को बढ़ाते हुए, चुनाव आयोग ने अपने ‘ECINET’ प्लेटफॉर्म को सक्रिय कर दिया है, जिसमें cVIGIL ऐप और ‘सुविधा’ (SUVIDHA) मॉड्यूल शामिल हैं।
-
cVIGIL ऐप: यह नागरिकों को रीयल-टाइम में आचार संहिता के उल्लंघन की रिपोर्ट करने की सुविधा देता है। आयोग ने ऐप के माध्यम से दर्ज की गई किसी भी शिकायत को 100 मिनट के भीतर हल करने की प्रतिबद्धता जताई है।
-
फ्लाइंग स्क्वाड: त्वरित प्रतिक्रिया के लिए 5,173 से अधिक फ्लाइंग स्क्वाड और 5,200 स्थिर निगरानी दल (SST) तैनात किए गए हैं।
-
सुविधा पोर्टल: राजनीतिक दलों को जनसभाओं, हेलीपैड और लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति ऑनलाइन देने के लिए इसे लॉन्च किया गया है। यह “पहले आओ-पहले पाओ” के सिद्धांत पर काम करता है, जिससे प्रशासनिक पक्षपात की संभावना कम हो जाती है।
मंत्रियों और अधिकारियों के लिए निर्देश
चुनाव आयोग ने राज्य और केंद्र दोनों स्तरों के मौजूदा मंत्रियों को सख्त चेतावनी जारी की है। आचार संहिता के दिशा-निर्देशों के अनुसार, आधिकारिक दौरों को चुनाव प्रचार के साथ नहीं जोड़ा जा सकता। सरकारी मशीनरी, परिवहन और कर्मियों का उपयोग किसी भी दलीय गतिविधियों के लिए पूरी तरह वर्जित है।
साथ ही, सिविल सेवकों और पुलिस अधिकारियों को पूर्ण निष्पक्षता बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने कहा, “चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रशासन की तटस्थता पर टिकी होती है।”
आचार संहिता और भारतीय लोकतंत्र
आदर्श आचार संहिता (MCC) दिशा-निर्देशों का एक ऐसा समूह है जिसे दशकों से राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति के माध्यम से विकसित किया गया है। हालाँकि इसके पास संसद द्वारा पारित कानून जैसा वैधानिक समर्थन नहीं है, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 324 की व्याख्या के तहत चुनाव आयोग द्वारा इसे लागू किया जाता है। 1960 के दशक से शुरू हुई यह संहिता अब एक परिष्कृत नियामक ढांचे में बदल चुकी है, जो यह सुनिश्चित करती है कि सत्ताधारी दल अपनी शक्ति का उपयोग चुनावी पलड़े को अपनी ओर झुकाने के लिए न कर सके।
2026 के इस चुनावी चक्र के लिए, आयोग ने 24/7 शिकायत निगरानी प्रणाली भी स्थापित की है। नागरिक सीधे जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल-फ्री नंबर ‘1950’ डायल कर सकते हैं।
