
57वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) की तैयारियों को लेकर पहली संचालन समिति की बैठक नई दिल्ली में आयोजित हुई। सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस वर्ष होने वाले महोत्सव को विश्वस्तरीय बनाने और भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहुंच बढ़ाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। IFFI 2026 का आयोजन गोवा में 20 से 28 नवंबर तक किया जाएगा।
बैठक में डॉ. मुरुगन ने महोत्सव के आगामी संस्करण में युवा छात्रों, उभरते फिल्मकारों और भारतीय फिल्म उद्योग से जुड़े ऐसे प्रतिभाशाली लोगों को अधिक अवसर देने की जरूरत पर जोर दिया, जिन्हें अभी व्यापक पहचान नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि IFFI को युवा प्रतिभाओं के लिए ऐसा मंच बनना चाहिए, जहां वे अपनी रचनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने के साथ अनुभवी फिल्मकारों से सीख सकें और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समुदाय से जुड़ सकें।
मंत्री ने भारतीय सिनेमा की विविधता और क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने तथा दुनिया भर की बेहतरीन फिल्मों और प्रमुख रचनात्मक प्रतिभाओं को भारत लाने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि इससे महोत्सव की अंतरराष्ट्रीय पहुंच मजबूत होगी और भारतीय तथा विदेशी रचनात्मक समुदायों के बीच पेशेवर सहयोग के नए अवसर बनेंगे।
बैठक में भारत की ऑरेंज इकोनॉमी और रचनात्मक उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय की नई पहलों पर भी चर्चा हुई। डॉ. मुरुगन ने युवा और उभरते कलाकारों के लिए मास्टरक्लास, अनुभवी फिल्मकारों के साथ संवाद और प्रभावी मेंटरशिप कार्यक्रमों का विस्तार करने की आवश्यकता बताई।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने कहा कि IFFI को भारत की तेजी से विकसित हो रही रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाले प्रमुख मंच के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय रचनात्मक समुदायों के बीच सहयोग को गहरा करने पर भी बल दिया।
सचिव ने महोत्सव में शामिल होने वाले फिल्मकारों, सिनेमा प्रेमियों, प्रतिनिधियों और अतिथियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली तथा सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की। बैठक में हुई चर्चा को IFFI 2026 को अधिक युवा-केंद्रित, अंतरराष्ट्रीय और रचनात्मक मंच के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।Connect:





