
देश की सबसे प्रतिष्ठित जांच एजेंसी, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के नए निदेशक की नियुक्ति को लेकर चल रही प्रक्रिया एक बड़े राजनीतिक विवाद में फंस गई है। वर्तमान निदेशक प्रवीर सूद का कार्यकाल 24 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, और उनके उत्तराधिकारी के चयन के लिए बुलाई गई उच्च स्तरीय समिति की बैठक में गंभीर मतभेद सामने आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक “असहमत पत्र” (Dissent Note) सौंपकर पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंगलवार शाम को 7, लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित इस बैठक में प्रधानमंत्री और राहुल गांधी के अलावा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत भी शामिल हुए। लगभग एक घंटे चली इस बैठक में आम सहमति बनने के बजाय “संस्थागत कब्जे” और पारदर्शिता को लेकर तीखी बहस देखने को मिली।
विवाद की जड़: “प्रक्रिया को औपचारिकता बनाना”
राहुल गांधी ने अपने असहमति पत्र में केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चयन समिति को उम्मीदवारों के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई। उनके अनुसार, समिति के सामने 69 उम्मीदवारों के नाम रखे गए थे, लेकिन उनके “सेल्फ-अप्रेजल” (स्व-मूल्यांकन) और “360-डिग्री रिपोर्ट” (व्यापक प्रदर्शन मूल्यांकन) जैसे महत्वपूर्ण डेटा को साझा करने से इनकार कर दिया गया। “विपक्ष का नेता कोई रबर स्टैंप नहीं होता,” राहुल गांधी ने अपने पत्र में लिखा। “चयन समिति को महत्वपूर्ण जानकारी देने से इनकार करके, सरकार ने इसे महज एक औपचारिकता में बदल दिया है। यह कदम संवैधानिक सुरक्षा उपायों का मजाक उड़ाता है और यह सुनिश्चित करता है कि केवल सरकार द्वारा पहले से तय उम्मीदवार को ही चुना जाए।” गांधी का तर्क है कि उम्मीदवारों के इतिहास और भ्रष्टाचार विरोधी जांचों में उनके प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा के बिना, समिति अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी को पूरा नहीं कर सकती।
रेस में शामिल शीर्ष दावेदार
राजनीतिक खींचतान के बावजूद, सूत्रों के अनुसार पांच वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों का एक संक्षिप्त नाम (Shortlist) तैयार किया गया है। ये अधिकारी अपनी वरिष्ठता और जांच कार्यों में अनुभव के लिए जाने जाते हैं:
पराग जैन: आर्थिक अपराधों की जांच में अपनी बारीकी के लिए पहचाने जाते हैं।
शत्रुजीत कपूर: प्रशासनिक अनुशासन और नेतृत्व क्षमता के लिए जाने जाने वाले वरिष्ठ अधिकारी।
योगेश गुप्ता: आंतरिक सुरक्षा और खुफिया जानकारी जुटाने में इनका लंबा अनुभव है।
जीपी सिंह: संगठित अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए चर्चित।
प्रवीर रंजन: संघीय जांच एजेंसियों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाने वाले अनुभवी अधिकारी।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार राहुल गांधी की आपत्तियों पर विचार करेगी या बहुमत के आधार पर अंतिम नाम की घोषणा की जाएगी।
सीबीआई निदेशक के चयन की प्रक्रिया
सीबीआई निदेशक की नियुक्ति दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (DSPE) अधिनियम, 1946 के तहत की जाती है, जिसे लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2014 के माध्यम से संशोधित किया गया था। जांच एजेंसी की स्वायत्तता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि निदेशक का चयन एक तीन सदस्यीय समिति द्वारा किया जाएगा:
प्रधानमंत्री (अध्यक्ष)
लोकसभा में विपक्ष के नेता (सदस्य)
भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित सुप्रीम कोर्ट के जज (सदस्य)
सीबीआई निदेशक का कार्यकाल न्यूनतम दो वर्ष का होता है, जिसे विशेष परिस्थितियों में पांच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। वर्तमान निदेशक प्रवीर सूद ने मई 2023 में पदभार ग्रहण किया था।
हालिया संदर्भ और सार्वजनिक चिंता
यह नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है जब सीबीआई NEET-UG 2026 पेपर लीक कांड और कई राज्यों के भ्रष्टाचार संबंधी संवेदनशील मामलों की जांच कर रही है। डिजिटल ट्रेंड्स बताते हैं कि इंटरनेट पर “Next CBI Director” और “Rahul Gandhi Dissent Note” जैसे कीवर्ड्स तेजी से सर्च किए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का यह विरोध केवल उम्मीदवारों के नामों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह केंद्रीय एजेंसियों के कामकाज के तरीके पर एक बड़ी टिप्पणी है। विपक्ष लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ किया जा रहा है, जिसे सरकार लगातार निराधार बताती आई है।
24 मई की समय सीमा जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, देश यह देखने के लिए उत्सुक है कि क्या यह नियुक्ति आम सहमति से होगी या विरोध की इस छाया में ही नया सीबीआई चीफ अपना कार्यभार संभालेगा।




