
बिहार की राजनीति में बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हुई। जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता और नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक, विजय कुमार चौधरी ने बिहार के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राजभवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ वरिष्ठ नेता विजेंद्र प्रसाद यादव ने भी दूसरे उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
यह बदलाव 14 अप्रैल को नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद आया है, जिसके बाद भाजपा के सम्राट चौधरी बिहार के पहले भाजपाई मुख्यमंत्री बने हैं।
नीतीश कुमार के ‘संकटमोचक’
राजनीतिक गलियारों में विजय चौधरी को एक सुलझे हुए और अनुभवी नेतृत्वकर्ता के रूप में जाना जाता है। विधानसभा अध्यक्ष से लेकर वित्त और शिक्षा मंत्री तक, उन्होंने हर भूमिका को बखूबी निभाया है। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य बिहार का निरंतर विकास है। नीतीश कुमार ने सुशासन का जो मॉडल तैयार किया है, हम उसे नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।”
एक बैंकर का राजनीतिक सफर
विजय कुमार चौधरी का जीवन प्रेरणादायक रहा है। राजनीति में आने से पहले वे भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में प्रोबेशनरी ऑफिसर थे। 1982 में अपने पिता जगदीश प्रसाद चौधरी के निधन के बाद उन्होंने बैंक की नौकरी छोड़ दी और जनसेवा के मार्ग को चुना। वे समस्तीपुर के सरायरंजन निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और पिछले दो दशकों से नीतीश कुमार के ‘दाहिने हाथ’ माने जाते रहे हैं।
आगे की राह
नए समीकरणों के बीच विजय चौधरी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। वे सरकार और संगठन के बीच एक सेतु का काम करेंगे। विशेष रूप से वित्त और संसदीय मामलों में उनका लंबा अनुभव नई सरकार को स्थिरता प्रदान करेगा।



