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प्रियंका गांधी का हिमंता सरमा पर प्रहार: “क्या दलितों का अपमान स्वीकार्य है?”

In Politics
April 08, 2026
RajneetiGuru.com - प्रियंका गांधी का हिमंता सरमा पर प्रहार - Image Credited by The New Indian Express

भारत में 2026 के विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। बुधवार को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टीकरण माँगा कि क्या वह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ की गई “अपमानजनक और अमर्यादित” टिप्पणियों का समर्थन करते हैं।

यह विवाद असम में 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से महज 24 घंटे पहले शुरू हुआ है। मुख्यमंत्री सरमा ने 83 वर्षीय खड़गे की उम्र का हवाला देते हुए कहा था कि वह “पागल की तरह बोल रहे हैं”, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक शिष्टाचार और जातिगत संवेदनशीलता पर एक राष्ट्रीय बहस में बदल गया है।

विवाद की जड़: पासपोर्ट के आरोप और केंद्रीय जांच

शब्दों का यह युद्ध तब शुरू हुआ जब कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री की पत्नी, रिनिकी भुइयां सरमा पर गंभीर आरोप लगाए। खेड़ा ने दावा किया कि उनके पास कई विदेशी पासपोर्ट हैं और दुबई व अमेरिका में अघोषित संपत्ति है। इसके बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुवाहाटी में चुनाव प्रचार के दौरान मांग की कि ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) जैसी केंद्रीय एजेंसियां इस मामले की जांच करें।

मुख्यमंत्री सरमा ने मंगलवार को एक चुनावी रैली में इन आरोपों को “डिजिटल हेरफेर” बताते हुए सीधे खड़गे पर निशाना साधा:

“खड़गे बूढ़े हो गए हैं और वह ‘पागल’ की तरह बोल रहे हैं। पहले आप लोगों का अपमान करते हैं और फिर कहते हैं कि आप विदेश मंत्री से सत्यापन मांगेंगे? पहले आपको यह पूछना चाहिए था कि ये आरोप सही हैं या नहीं।”

प्रियंका गांधी का पलटवार: “करोड़ों लोगों का अपमान”

इस भाषा को “पूरी तरह से शर्मनाक और अस्वीकार्य” बताते हुए प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया पर इसे हाशिए पर रहने वाले समुदायों पर हमला करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि खड़गे केवल एक पार्टी नेता नहीं, बल्कि भारत भर के दलित और वंचित समुदायों के प्रतीक हैं।

प्रियंका गांधी ने हिंदी में पोस्ट किया:

“उनका अपमान करके भाजपा के मुख्यमंत्री ने देशभर के करोड़ों लोगों का अपमान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश को स्पष्ट करना चाहिए: क्या वह करोड़ों भारतीयों के इस अपमान का समर्थन करते हैं?”

कांग्रेस का चौतरफा हमला:

  • राहुल गांधी: उन्होंने टिप्पणियों को “पूरी तरह निंदनीय” बताया और पीएम की चुप्पी पर सवाल उठाए।

  • के.सी. वेणुगोपाल: उन्होंने “बिना शर्त माफी” की मांग करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों से सरमा “बौखला” गए हैं।

  • माणिक्यम टैगोर: उन्होंने कहा कि ‘पागल’ शब्द का इस्तेमाल “गहरी जातिगत पूर्वाग्रह और अनादर की मानसिकता” को दर्शाता है।

भाजपा की प्रतिक्रिया: “हताशा में गढ़े गए आरोप”

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) हिमंत बिस्वा सरमा के समर्थन में मजबूती से खड़ी है। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने पवन खेड़ा द्वारा जारी पासपोर्ट दस्तावेजों में “भारी विसंगतियों” की ओर इशारा किया और उन्हें डिजिटल रूप से बनाया गया फर्जी दस्तावेज बताया।

त्रिवेदी ने कहा: “राष्ट्रीयता मिस्र (Egyptian) दिखाई गई है जबकि पासपोर्ट एंटीगुआ और बारबुडा का है। यह दर्शाता है कि ये चुनाव से पहले हताशा में बनाए गए फर्जी दस्तावेज हैं।” मुख्यमंत्री सरमा ने पवन खेड़ा के खिलाफ पहले ही मानहानि की कार्यवाही शुरू कर दी है।

9 अप्रैल की बड़ी लड़ाई

इस विवाद का समय बहुत महत्वपूर्ण है। असम की सभी 126 सीटों पर गुरुवार, 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में मतदान होना है। भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए सरमा के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रहा है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन भ्रष्टाचार के आरोपों के दम पर सत्ता पलटने की उम्मीद कर रहा है।

मतपेटी से परे

असम में चुनाव प्रचार का शोर थमने के साथ ही इस विवाद की गूँज बनी हुई है। मतदाता सरमा की टिप्पणी को “चुनावी बहस” के रूप में देखते हैं या “अपमान” के रूप में, यह 4 मई को मतगणना के दिन साफ होगा। हालांकि, प्रियंका गांधी की मांग ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि इस विवाद की छाया आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति पर बनी रहेगी।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।

    अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

    उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है।
    उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।

    राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —

    स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,

    ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,

    जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,

    रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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