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धुरंधर 2 के ‘आतिफ अहमद’ पात्र पर मचा सियासी घमासान

In Politics
March 26, 2026
RajneetiGuru.com - धुरंधर 2 के 'आतिफ अहमद' पात्र - Image Credited by Moneycontrol

धुरंधर: द रिवेंज (धुरंधर 2) की रिकॉर्ड तोड़ बॉक्स ऑफिस सफलता अब सिनेमा हॉल से निकलकर उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में पहुंच गई है। फिल्म ने अपने पहले ही दिन दुनिया भर में ₹236 करोड़ की अभूतपूर्व कमाई की है, लेकिन इसमें “आतिफ अहमद” नामक पात्र के चित्रण ने समाजवादी पार्टी (सपा) को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है। इस पात्र की जीवनशैली और माफिया डॉन बनने की कहानी दिवंगत गैंगस्टर-राजनेता अतीक अहमद से मेल खाती है।

हालांकि फिल्म निर्माताओं ने कानूनी डिस्क्लेमर जारी किया है, लेकिन समानताएं नजरअंदाज करना मुश्किल है। प्रयागराज के चकिया की पृष्ठभूमि, पात्र की सफेद वेशभूषा, चाल-ढाल और उसका माफिया के रूप में उदय ने उस “माफिया-राजनेता” की छवि को फिर से ताजा कर दिया है, जो ऐतिहासिक रूप से समाजवादी पार्टी के साथ जोड़ी जाती रही है।

सिनेमाई आईना: तथ्य बनाम कल्पना

लगभग चार घंटे की इस फिल्म में “आतिफ” के तीन मुख्य सीक्वेंस हैं। फिल्म में इस पात्र को एक क्षेत्रीय बाहुबली के रूप में दिखाया गया है, जिसके गहरे आपराधिक नेटवर्क हैं और सबसे विवादास्पद रूप से, उसके संबंध पाकिस्तान की आईएसआई (ISI) और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों से दिखाए गए हैं।

समाजवादी पार्टी के लिए यह समय विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि राज्य 2027 के विधानसभा चुनावों की ओर बढ़ रहा है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर फिल्मों के जरिए “गढ़ी हुई कहानी” पेश करने का आरोप लगाया है ताकि विपक्ष को बदनाम किया जा सके।

फिल्मों के जरिए जनमत तैयार करने पर सपा सांसद अफजाल अंसारी ने कहा: “फिल्म उद्योग अक्सर डिस्क्लेमर के पीछे छिपता है, लेकिन वे बॉक्स ऑफिस की सफलता के लिए पहचाने जाने वाले पात्रों का उपयोग करते हैं। अन्य कथित अपराधियों पर ऐसी फिल्में क्यों नहीं बनाई जातीं? यह मनोरंजन के नाम पर चयनात्मक निशाना साधना है।”

अतीक अहमद की विरासत: एक राजनीतिक मुद्दा

सपा की चिंता का कारण अतीक अहमद का पार्टी के साथ पुराना जुड़ाव है। 1996 में विधायक और 2004 में फूलपुर से सांसद रहे अतीक पर हत्या और अपहरण सहित करीब 70 आपराधिक मामले दर्ज थे। 15 अप्रैल 2023 को पुलिस हिरासत में उसकी हत्या ने उसके जीवन का अंत कर दिया, लेकिन राज्य की कानून-व्यवस्था की राजनीति में उसकी प्रासंगिकता बनी हुई है।

फिल्म में आतिफ के अंतरराष्ट्रीय जाली मुद्रा (फेक करेंसी) रैकेट में शामिल होने के चित्रण पर सपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि जिन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, उन्हें नाटक के जरिए तथ्यों के रूप में पेश किया जा रहा है ताकि मतदाताओं को प्रभावित किया जा सके।

कानून-व्यवस्था पर राजनीतिक विमर्श

यह विवाद एक बड़ी वैचारिक लड़ाई का हिस्सा है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने लगातार “माफिया मुक्त उत्तर प्रदेश” का नैरेटिव पेश किया है। दूसरी ओर, सपा का तर्क है कि विपक्ष को बदनाम करने के लिए इन कहानियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है।

वहीं, मारे गए बसपा नेता राजू पाल की पत्नी पूजा पाल जैसे पीड़ितों ने सरकार की कार्रवाई का समर्थन किया है। उनका मानना है कि इन बाहुबलियों का साम्राज्य निर्दोष लोगों की तबाही पर बना था।

जैसे-जैसे धुरंधर 2 अपनी ऐतिहासिक कमाई जारी रखे हुए है, “आतिफ अहमद” विवाद यह याद दिलाता है कि भारत में सिनेमा और राजनीति एक-दूसरे से कितने गहरे जुड़े हुए हैं। अखिलेश यादव के लिए चुनौती यह है कि वे पार्टी की पुरानी “बाहुबली” छवि को पीछे छोड़कर आगे बढ़ें, जबकि सिनेमाई चित्रण उन पुराने अध्यायों को फिर से खोलने का जोखिम पैदा कर रहा है।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।

    अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

    उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है।
    उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।

    राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —

    स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,

    ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,

    जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,

    रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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