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योगी–अखिलेश के बीच तीखा राजनीतिक टकराव

In Politics
February 18, 2026
rajneetiguru.com - योगी आदित्यनाथ का अखिलेश यादव पर हमला, RSS पर बयान। Image Credit – The Economic Times

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर शब्दों की तीखी जंग देखने को मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला करते हुए उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की परंपराओं और कार्यशैली को समझने की सलाह दी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में राजनीतिक माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है और आने वाले चुनावों की तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान विपक्ष की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ नेता बिना ऐतिहासिक और वैचारिक पृष्ठभूमि को समझे टिप्पणी करते हैं। उन्होंने इशारों में अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीति में आलोचना का स्तर तथ्य और समझ पर आधारित होना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक विरोध के लिए।

“किसी भी विचारधारा या संगठन पर टिप्पणी करने से पहले उसके इतिहास, परंपरा और सामाजिक योगदान को समझना आवश्यक है,” मुख्यमंत्री ने कहा।

मुख्यमंत्री का यह बयान हाल के दिनों में अखिलेश यादव द्वारा की गई टिप्पणियों की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है, जिनमें उन्होंने कुछ संगठनों और सत्तारूढ़ दल की विचारधारा पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में योगी आदित्यनाथ ने न केवल विपक्ष की आलोचना की, बल्कि इसे राजनीतिक अपरिपक्वता से भी जोड़ने की कोशिश की।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव केवल व्यक्तिगत बयानबाज़ी नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी राजनीतिक रणनीति छिपी हुई है। उत्तर प्रदेश में सत्ता और विपक्ष के बीच विचारधारात्मक संघर्ष लंबे समय से चलता आ रहा है, और ऐसे बयान उस संघर्ष को और तेज़ करते हैं।

मुख्यमंत्री के बयान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उल्लेख विशेष रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है। RSS को लेकर देश की राजनीति में लंबे समय से अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं। सत्तारूढ़ पक्ष इसे राष्ट्र निर्माण से जुड़ा संगठन बताता है, जबकि विपक्ष अक्सर इसकी विचारधारा पर सवाल उठाता रहा है।

योगी आदित्यनाथ ने संघ की परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संगठन दशकों से सामाजिक सेवा, राष्ट्रवाद और अनुशासन के मूल्यों के साथ काम करता रहा है। उन्होंने कहा कि किसी संगठन की आलोचना करना आसान है, लेकिन उसके जमीनी काम और सामाजिक भूमिका को समझना ज़रूरी है।

हालांकि इस बयान के तुरंत बाद अखिलेश यादव की ओर से कोई औपचारिक जवाब नहीं आया, लेकिन समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इसे सत्तारूढ़ दल की “ध्यान भटकाने की राजनीति” करार दिया। पार्टी का कहना है कि सरकार को बयानबाज़ी के बजाय रोज़गार, महंगाई और विकास जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

सपा नेताओं का तर्क है कि विपक्ष का काम सवाल पूछना होता है और सरकार को आलोचना को लोकतंत्र का हिस्सा मानना चाहिए। उनका कहना है कि वैचारिक मतभेद को व्यक्तिगत हमलों में बदलना स्वस्थ राजनीतिक परंपरा नहीं है।

योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच राजनीतिक टकराव कोई नई बात नहीं है। 2017 के बाद से दोनों नेताओं के बीच कई बार तीखी बयानबाज़ी हो चुकी है। सत्ता में रहते हुए योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था और विकास को अपनी प्राथमिकता बताया है, जबकि अखिलेश यादव अक्सर सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे हैं।

आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की राजनीति और अधिक प्रतिस्पर्धी होने की संभावना है। ऐसे में दोनों पक्षों की ओर से आक्रामक बयान और वैचारिक हमले बढ़ सकते हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान आगामी चुनावी माहौल का संकेत हैं, जहाँ विचारधारा, संगठन और नेतृत्व को लेकर बहस और तेज़ होगी। एक ओर सत्तारूढ़ दल अपने समर्थक आधार को मज़बूत करने की कोशिश करेगा, वहीं विपक्ष सरकार की नीतियों पर आक्रामक रुख अपनाएगा।

फिलहाल, योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच यह ताज़ा जुबानी जंग उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए सियासी संकेत दे रही है, जिसका असर आने वाले दिनों में और स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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