9 views 13 secs 0 comments

व्यापार समझौतों पर अमित शाह ने राहुल गांधी को दी बहस की चुनौती

In Economy, Politics
February 15, 2026
RajneetiGuru.com - व्यापार समझौतों पर अमित शाह ने राहुल गांधी को दी बहस की चुनौती - Image Credited by The New Indian Express

गांधीनगर — भारत की आर्थिक कूटनीति के बचाव में उतरते हुए, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार (15 फरवरी, 2026) को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। गांधीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम में शाह ने विपक्ष के नेता पर अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (EU) के साथ भारत के व्यापार समझौतों को लेकर “झूठ” और “भ्रम” फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार ने देश के कृषि और डेयरी क्षेत्रों के चारों ओर एक “अभेद्य सुरक्षा कवच” बना दिया है, जिससे यह सुनिश्चित हो गया है कि कोई भी व्यापारिक समझौता भारतीय किसानों की आजीविका से समझौता नहीं करेगा।

गृह मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका के साथ एक ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार ढांचे की घोषणा और यूरोपीय संघ के साथ एक दशक से चली आ रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ताओं के समापन के बाद राजनीतिक तनाव चरम पर है।

बहस की चुनौती

भारत की पहली सीबीडीसी (CBDC) आधारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के शुभारंभ के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने विपक्ष के इस दावे को “हास्यास्पद” बताया कि विदेशी उत्पाद भारतीय बाजारों को नष्ट कर देंगे।

शाह ने कहा, “जब कांग्रेस के ‘शहजादे’ राहुल गांधी संसद में खड़े होकर किसानों की सुरक्षा की बात करते हैं, तो मुझे हंसी आती है। कांग्रेस का देश को गुमराह करने का पुराना इतिहास रहा है। राहुल गांधी जी, कोई भी मंच तय कर लीजिए। भाजपा युवा मोर्चा का अध्यक्ष भी आपके साथ इस बात पर बहस कर सकता है कि किसने किसानों को नुकसान पहुँचाया और किसने उनके कल्याण के लिए काम किया।”

शाह की यह चुनौती गांधी की हालिया बैठकों का जवाब थी, जिसमें कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया था कि भारत-अमेरिका सौदा “डेटा सुरक्षा और किसानों के भविष्य के साथ खिलवाड़” है।

शुल्क-मुक्त निर्यात बनाम संवेदनशील वस्तुओं का संरक्षण

सरकार के बचाव का मुख्य आधार इन समझौतों का “असममित” (asymmetric) स्वरूप है। जहाँ अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर शुल्क 50% से घटाकर 18% करने पर सहमति जताई है—और कई कृषि उत्पादों के लिए इसे शून्य कर दिया है—वहीं भारत ने आयात के लिए एक सख्त “नकारात्मक सूची” (Negative List) बरकरार रखी है।

भारत को क्या मिला (अमेरिका को शून्य-शुल्क निर्यात):

  • मसाले और बागान: मसाले, चाय, कॉफी और नारियल तेल।

  • बागवानी: आम, अमरूद, पपीता और अनानास।

  • समुद्री और कपड़ा: जूते, चमड़ा और हथकरघा उत्पाद।

भारत ने क्या सुरक्षित रखा (समझौतों से बाहर):

  • मुख्य अनाज: गेहूं, चावल, मक्का और मोटे अनाज विदेशी प्रतिस्पर्धा से पूरी तरह सुरक्षित हैं।

  • डेयरी और पोल्ट्री: दूध, घी, पनीर या पोल्ट्री उत्पादों के लिए कोई रियायत नहीं दी गई है।

  • संवेदनशील फसलें: सोयाबीन, चीनी और दलहन को शुल्क कटौती के दायरे से बाहर रखा गया है।

“मैं इस देश के किसानों, पशुपालकों और मछुआरों को आश्वस्त करना चाहता हूं: यूरोपीय संघ, इंग्लैंड और अमेरिका के साथ हस्ताक्षरित हर व्यापारिक समझौते में नरेंद्र मोदी ने आपके हितों की पूरी तरह रक्षा की है। हम वे लोग हैं जिन्होंने डेयरी क्षेत्र का विस्तार किया है, उसे कमजोर नहीं किया।” — अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री।

व्यापार संबंधों का नया युग

2026 का भू-राजनीतिक परिदृश्य भारत के “नपे-तुले वैश्विक जुड़ाव” द्वारा परिभाषित है। फरवरी की शुरुआत में पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच हुई बातचीत के बाद, अमेरिका ने भारतीय ऊर्जा खरीद से जुड़े दंडात्मक शुल्कों को हटा दिया। अकेले इस कदम से भारतीय निर्यात में अरबों डॉलर की वृद्धि होने की उम्मीद है।

इसी तरह, वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने पुष्टि की है कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अपने अंतिम “कानूनी स्क्रबिंग” चरण में है। यह समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगभग एक-चौथाई हिस्से को एक साथ लाता है। 2027 तक, इस समझौते से भारतीय विनिर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो जाएगा।

तकनीकी छलांग: पीडीएस में सीबीडीसी

शाह के भाषण का स्थान—डिजिटल मुद्रा से जुड़ी पीडीएस प्रणाली का शुभारंभ—मोदी सरकार के “विकसित भारत” के दृष्टिकोण का प्रतीक था। नई प्रणाली लाभार्थियों को आरबीआई-अधिकृत सीबीडीसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे डिजिटल वॉलेट में सब्सिडी प्राप्त करने की अनुमति देती है।

शाह ने उल्लेख किया, “एक दशक पहले, 60 करोड़ लोगों के पास बैंक खाते भी नहीं थे। आज, भारत डिजिटल लेनदेन में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है।” उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) ने बिचौलियों को खत्म किया, उसी तरह ये व्यापारिक समझौते भारतीय किसानों के लिए वैश्विक बाजारों के दरवाजे खोलेंगे।

विपक्ष की चेतावनी

सरकार के आश्वासनों के बावजूद विपक्ष सशंकित है। राहुल गांधी का तर्क है कि अमेरिका के साथ हुए सौदे में ‘यार्न फॉरवर्ड’ नियम और यूरोपीय संघ का ‘कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म’ (CBAM) गैर-टैरिफ बाधाओं के रूप में कार्य कर सकते हैं, जिससे शुल्क में कमी से होने वाले लाभ समाप्त हो सकते हैं। पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के किसान संघों ने छोटे जोत वाले किसानों पर “मानकीकरण” के दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की है।

विमर्श का महासंग्राम

जैसे-जैसे भारत-ईयू और भारत-यूके समझौतों पर औपचारिक हस्ताक्षर का समय नजदीक आ रहा है, विमर्श का यह युद्ध और तेज होने की संभावना है। भाजपा के लिए ये समझौते 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते मील के पत्थर हैं; कांग्रेस के लिए ये वैश्विक शक्तियों के सामने “समर्पण” हैं। अमित शाह की बहस की खुली चुनौती के साथ, “किसान जनादेश” की यह लड़ाई अब गेहूं के खेतों से निकलकर वैश्विक व्यापार मंच तक पहुँच गई है।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

/ Published posts: 382

अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

Instagram