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राजस्थान में पवित्र वृक्ष पर सियासी तूफान

In Politics
February 11, 2026
rajneetiguru.com - राजस्थान में खेजड़ी विवाद से बीजेपी सरकार दबाव में। Image Credit – The Indian Express

राजस्थान में राज्य वृक्ष के कटान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे का रूप ले चुका है। इस विरोध ने न केवल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाली भजनलाल शर्मा सरकार को असहज स्थिति में डाल दिया है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े सवालों को भी केंद्र में ला दिया है। विभिन्न जिलों में हुए प्रदर्शनों और जनआंदोलनों के बाद सरकार को अपने फैसलों पर पुनर्विचार करना पड़ रहा है, वहीं अमृता देवी अधिनियम को सख्ती से लागू करने की मांग भी तेज होती जा रही है।

राजस्थान का राज्य वृक्ष खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि मरुस्थलीय जीवन, लोकसंस्कृति और पर्यावरण संतुलन का प्रतीक माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से यह वृक्ष जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता और पशुपालन के लिए अहम रहा है। 18वीं सदी में खेजड़ी वृक्षों की रक्षा करते हुए अमृता देवी और 363 बिश्नोई समुदाय के लोगों का बलिदान आज भी पर्यावरण संरक्षण के सबसे बड़े उदाहरणों में गिना जाता है। इसी पृष्ठभूमि के कारण खेजड़ी से जुड़ा कोई भी निर्णय राज्य में भावनात्मक और राजनीतिक प्रतिक्रिया को जन्म देता है।

हालिया विवाद तब शुरू हुआ जब विकास परियोजनाओं के तहत कुछ इलाकों में खेजड़ी वृक्षों के कटान की खबरें सामने आईं। स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पर्यावरणीय प्रभाव का समुचित आकलन किए बिना अनुमति दी गई। इसके बाद जयपुर, जोधपुर और बीकानेर सहित कई क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विकास के नाम पर राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

बीजेपी सरकार पर दबाव इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि विपक्ष ने इस मुद्दे को जनभावनाओं से जोड़ते हुए आक्रामक रुख अपनाया है। कांग्रेस और अन्य दलों ने सरकार पर “पर्यावरण विरोधी” नीति अपनाने का आरोप लगाया है। वहीं, बिश्नोई समाज और पर्यावरण संगठनों ने अमृता देवी अधिनियम को और मजबूत बनाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बढ़ते विरोध के बीच यह संकेत दिए हैं कि सरकार जनभावनाओं का सम्मान करती है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “राज्य के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना हमारी प्राथमिकता है, और किसी भी निर्णय से पहले सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।” इस बयान को सरकार की नरम पड़ती रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, कुछ परियोजनाओं की समीक्षा की जा रही है और वैकल्पिक योजनाओं पर विचार हो रहा है, ताकि वृक्षों के कटान को न्यूनतम किया जा सके। इसके साथ ही, वन विभाग और प्रशासन को पर्यावरणीय नियमों के सख्त पालन के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह कदम देर से उठाए गए हैं और सरकार को पहले ही अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि राजस्थान की सियासत में एक प्रतीकात्मक संघर्ष बन गया है। ग्रामीण इलाकों और पारंपरिक समुदायों में खेजड़ी से जुड़ी भावनाएं गहरी हैं। ऐसे में इस मुद्दे पर सरकार की कोई भी चूक आगामी चुनावों में राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकती है। जयपुर स्थित एक वरिष्ठ विश्लेषक के अनुसार, “राज्य वृक्ष से जुड़ा सवाल विकास बनाम संस्कृति की बहस को जन्म देता है, और यह बहस अक्सर सत्ता के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होती है।”

वर्तमान हालात में बीजेपी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाते हुए पर्यावरण और जनभावनाओं के बीच संतुलन कैसे बनाए। अमृता देवी अधिनियम को लेकर बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कानूनी और नीतिगत कदम चाहती है। आने वाले समय में सरकार के फैसले यह तय करेंगे कि यह सियासी तूफान थमता है या और तेज होता है।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
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