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बंगाल के SIR कैंपों के भीतर: टीएमसी का नियंत्रण, विपक्ष के आरोप

In Politics
February 10, 2026
rajneetiguru.com - बंगाल के SIR कैंपों में टीएमसी नियंत्रण पर विवाद। Image Credit – The Indian Express

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) से जुड़े कैंपों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। जहां एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) के कथित उत्पीड़न का मुद्दा उठाया है, वहीं जमीनी स्तर पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR कैंपों में पार्टी कार्यकर्ताओं का दबदबा है और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को डराने-धमकाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराए जा सकें। इस प्रक्रिया के तहत BLOs घर-घर जाकर दस्तावेजों का सत्यापन करते हैं और नए मतदाताओं को सूची में जोड़ते हैं। लेकिन हाल के दिनों में बंगाल के कई जिलों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि स्थानीय टीएमसी कार्यकर्ता इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहे हैं।

दक्षिण 24 परगना जिले में एक SIR कैंप के दौरान कथित तौर पर एक टीएमसी नेता द्वारा BLO को सार्वजनिक रूप से चेतावनी दिए जाने का मामला सामने आया है। वहां मौजूद लोगों के अनुसार, पार्टी नेता ने कहा, “याद रखिए, हम आपको जानते हैं,” जिसे विपक्ष ने सीधा डराने का प्रयास बताया है। इस घटना ने प्रशासनिक हलकों में भी असहजता पैदा की है, क्योंकि BLO चुनाव आयोग के अधीन कार्य करने वाले अधिकारी होते हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में यह दावा किया कि राज्य में BLOs को अनावश्यक दबाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को राजनीतिक टकराव का शिकार नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि, विपक्षी दलों का आरोप है कि अदालत में उठाए गए मुद्दों और जमीनी हकीकत के बीच स्पष्ट विरोधाभास है। उनका कहना है कि यदि BLOs पर दबाव है, तो उसका बड़ा कारण सत्तारूढ़ दल के स्थानीय नेताओं की सक्रिय भूमिका है।

राज्य में भाजपा, कांग्रेस और वाम दलों ने SIR कैंपों में कथित ‘राजनीतिक नियंत्रण’ का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “SIR जैसी संवेदनशील प्रक्रिया को निष्पक्ष रखने की जिम्मेदारी प्रशासन की है, लेकिन जमीनी स्तर पर सत्तारूढ़ दल का हस्तक्षेप लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।” हालांकि, टीएमसी इन आरोपों को सिरे से खारिज करती रही है।

टीएमसी का तर्क है कि विपक्षी दल चुनाव से पहले माहौल खराब करने के लिए बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि SIR कैंपों में पार्टी कार्यकर्ता केवल मतदाताओं की मदद कर रहे हैं, न कि किसी प्रकार का दबाव बना रहे हैं। एक टीएमसी नेता के अनुसार, “हमारी भूमिका सिर्फ यह सुनिश्चित करने की है कि आम लोग प्रक्रिया को समझें और उनके नाम मतदाता सूची में सही तरीके से दर्ज हों।”

पश्चिम बंगाल में चुनावी राजनीति का इतिहास हमेशा तीखे मुकाबलों और मजबूत जमीनी संगठनों से जुड़ा रहा है। टीएमसी ने 2011 में सत्ता में आने के बाद बूथ स्तर तक अपना संगठन मजबूत किया है। यही संगठनात्मक ताकत कई बार विपक्ष के निशाने पर रही है। SIR कैंपों से जुड़े ताजा आरोप इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ का हिस्सा माने जा रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रशासनिक स्वतंत्रता बेहद अहम होती है। यदि BLOs या अन्य चुनावी अधिकारियों को राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ता है, तो इससे चुनावी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उसे इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर विश्वास बहाल करना होगा।

कुल मिलाकर, बंगाल के SIR कैंपों को लेकर उठा विवाद राज्य की राजनीति में एक नए टकराव का संकेत देता है, जहां प्रशासन, सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
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मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
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