नई दिल्ली/रायपुर — नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) द्वारा आयोजित दुनिया के सबसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय थिएटर फेस्टिवल, 25वें भारत रंग महोत्सव (BRM) ने अपने दसवें दिन में प्रवेश कर लिया है, जो भारत के सांस्कृतिक कैलेंडर में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। अपनी सिल्वर जुबली मना रहा यह महोत्सव अपनी पारंपरिक सीमाओं को लांघकर रायपुर सहित देश के 19 शहरों में मंच के जादू को बिखेर रहा है।
5 फरवरी, 2026 को इसके दसवें दिन की समाप्ति तक, महोत्सव ने 130 से अधिक प्रदर्शनों के प्रभावशाली आंकड़े को पार कर लिया। इसमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तुतियों, माइक्रो-ड्रामा, एकांकी नाटकों और नुक्कड़ नाटकों का अनूठा संगम देखने को मिला। इस वर्ष के संस्करण के भाषाई वैविध्य ने प्रदर्शन कला के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को फिर से मजबूत किया है।
वैश्विक और स्थानीय कथाओं का संगम

महोत्सव के दसवें दिन कहानी कहने के कई अनूठे रंग देखने को मिले। दिल्ली में “बदज़ात” और “डैडी” जैसे प्रभावशाली नाटकों का मंचन हुआ। हालांकि, लोक परंपराओं के समावेश ने सबका ध्यान खींचा। कश्मीरी लोक परंपरा ‘भांड पाथर’ पर आधारित नाटक “अका नंदन (आँखों का तारा)” ने अपनी लयबद्ध प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पोलैंड के प्रोडक्शन “उमादेवी ऑब्जर्व्स वांडा डायनोव्स्का” ने भारत और पोलैंड के बीच ऐतिहासिक संबंधों की खोज की, जबकि रूस के नाटक “ए वेरी सिंपल स्टोरी” ने अपनी सार्वभौमिक भावनात्मक अपील से दर्शकों के दिलों को छू लिया।
‘आद्वित्य’: सामाजिक परिवर्तन के उपकरण के रूप में थिएटर
एनएसडी स्टूडेंट्स यूनियन की पहल ‘आद्वित्य’ के तहत, नुक्कड़ नाटक समकालीन सामाजिक मुद्दों को उठाने का एक सशक्त माध्यम बन गए हैं। दसवें दिन युवाओं के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों ने परिपक्वता और रचनात्मकता के साथ संवेदनशील विषयों को उठाया:
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“कुछ अनसुने”: बाल शोषण और उसके इर्द-गिर्द बुनी गई चुप्पी पर एक मार्मिक प्रहार।
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“बेबी शार्क डू डू डू डू”: आधुनिक पेरेंटिंग शैलियों और बचपन के डिजिटल अवशोषण पर एक व्यंग्यात्मक नज़र।
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कैदियों का जीवन: जेल की सलाखों के पीछे मानवीय संघर्ष और पुनर्वास को दर्शाते नाटक।
लाइव प्रदर्शनों के अलावा, भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (FTII) की चुनिंदा डिप्लोमा फिल्मों की स्क्रीनिंग ने दर्शकों को सिनेमाई बारीकियों से परिचित कराया, जिससे मंच और स्क्रीन के बीच की दूरी कम हुई।
रायपुर विस्तार: सांस्कृतिक उत्कृष्टता का विकेंद्रीकरण
भारत रंग महोत्सव 2026 की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक इसका विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण है। जहाँ दिल्ली महोत्सव का हृदय बनी हुई है, वहीं रंगमंच की जीवंतता रायपुर, बेंगलुरु, पटना, कोलकाता और पुणे जैसे शहरों तक पहुँच गई है।
रायपुर में स्थानीय रंगमंच प्रेमी विश्व स्तरीय प्रस्तुतियों को देखने के लिए उमड़ रहे हैं। यह न केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिला रहा है, बल्कि स्थानीय कलाकारों को एक अंतरराष्ट्रीय दृष्टि भी प्रदान कर रहा है।
“भारत रंग महोत्सव का 25वां वर्ष केवल अतीत का जश्न नहीं है, बल्कि थिएटर के भविष्य का एक दृष्टिकोण है। उत्सव को 19 शहरों में ले जाकर, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि रंगमंच की परिवर्तनकारी शक्ति भारत के हर कोने तक पहुंचे।” – नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के एक वरिष्ठ अधिकारी।
25 वर्षों की विरासत
1999 में स्थापित, भारत रंग महोत्सव की परिकल्पना भारतीय थिएटर की सर्वश्रेष्ठ कृतियों को प्रदर्शित करने और अंतरराष्ट्रीय समूहों को अपनी कला साझा करने के लिए आमंत्रित करने के उद्देश्य से की गई थी। पिछले ढाई दशकों में, यह एशिया के सबसे बड़े थिएटर फेस्टिवल के रूप में विकसित हुआ है।
27 जनवरी से 20 फरवरी 2026 तक चलने वाला यह 25वां संस्करण अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी आयोजन है।
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अवधि: 25 दिन।
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अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी: 9 देशों के थिएटर ग्रुप।
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भाषाई विविधता: 228 भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में 277 से अधिक प्रोडक्शन।
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प्रतिनिधित्व: भारत के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की भागीदारी।
