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चिदंबरम ने ‘मृत अर्थव्यवस्था’ के सवाल से बनाई दूरी

In Economy, Politics
February 02, 2026
RajneetiGuru.com - चिदंबरम ने 'मृत अर्थव्यवस्था' के सवाल से बनाई दूरी - Image Credited by NDTV

नई दिल्ली — एक सधी हुई राजनीतिक चुप्पी का परिचय देते हुए, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने रविवार को “मृत अर्थव्यवस्था” (dead economy) वाली टिप्पणी से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। यह टिप्पणी मूल रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा की गई थी और बाद में राहुल गांधी ने भी इसे दोहराया था।

केंद्रीय बजट 2026-27 की तीखी आलोचना करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए, चिदंबरम से इस विवादित शब्द पर सवाल पूछा गया था, जो सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्ष के बीच टकराव का मुख्य बिंदु बन गया है। हालांकि, दिग्गज नेता ने यह कहते हुए इस सवाल को टाल दिया कि उनके पास उन परिस्थितियों का पूरा संदर्भ नहीं है जिनमें मूल टिप्पणी की गई थी।

पृष्ठभूमि: ट्रम्प का टैरिफ हमला

“मृत अर्थव्यवस्था” विवाद की शुरुआत जुलाई 2025 में हुई थी, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत “जुर्माना” टैरिफ लगा दिया था। यह कदम पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की निरंतर खरीद के खिलाफ एक जवाबी कार्रवाई थी।

रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के चुनावी वादे के साथ आए ट्रम्प ने भारत की ऊर्जा नीति पर प्रहार करते हुए कहा था:

“मुझे परवाह नहीं है कि भारत रूस के साथ क्या करता है। वे अपनी मृत अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ नीचे ले जा सकते हैं, मुझे इसकी कोई चिंता नहीं है…”

इस टिप्पणी को विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तुरंत लपक लिया और ट्रम्प के आकलन से सहमति जताई, जिससे एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया। गांधी का तर्क है कि उच्च टैरिफ, जो कपड़ा जैसे क्षेत्रों में 50 प्रतिशत तक पहुँच गए हैं, भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति की कड़वी सच्चाई हैं।

‘चूके हुए अवसरों’ का बजट

हालांकि चिदंबरम ने “मृत अर्थव्यवस्था” के जाल में फंसने से परहेज किया, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट पर उन्होंने कड़ा प्रहार किया। उन्होंने इस दस्तावेज को “प्रबंधन का खराब लेखा-जोखा” बताया और वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कई राजकोषीय लक्ष्यों में बड़ी कमी की ओर इशारा किया।

चिदंबरम द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु:

  • राजस्व प्राप्तियां: लक्ष्य से ₹78,086 करोड़ कम।

  • कुल व्यय: अनुमान से ₹1,00,503 करोड़ कम।

  • पूंजीगत व्यय (Capex): पिछले अनुमानों की तुलना में ₹1,44,376 करोड़ की कटौती।

चिदंबरम ने विशेष रूप से जीडीपी के प्रतिशत के रूप में पूंजीगत व्यय में गिरावट पर चिंता जताई, जो ₹12.2 लाख करोड़ के आवंटन के बावजूद वित्त वर्ष 2025 के 3.2 प्रतिशत से गिरकर 3.1 प्रतिशत पर आ गया है।

“एक मुनीम के पैमाने पर भी, यह बजट उन दस प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने के लिए आवश्यक दूरदर्शिता की कमी को दर्शाता है जिन्हें आर्थिक सर्वेक्षण में रेखांकित किया गया था,” चिदंबरम ने दिल्ली के 24 अकबर रोड पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा।

बाजार की हलचल और ‘बुनियादी ढांचे’ पर बहस

बजट पर बाजार की प्रतिक्रिया ने इस राजनीतिक विवाद को और हवा दी। रविवार के विशेष कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 1,500 अंक गिर गया, जो मध्यम वर्ग के करदाताओं के लिए राहत की कमी और वैश्विक व्यापार अस्थिरता पर निवेशकों की चिंता को दर्शाता है।

राहुल गांधी ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी आलोचना दोहराते हुए बजट को “भारत के वास्तविक संकटों के प्रति अंधा” करार दिया। उन्होंने बेरोजगारी और घटती घरेलू बचत जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा।

हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के “मृत अर्थव्यवस्था” के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा:

“पूरे सम्मान के साथ, मुझे नहीं पता कि वह (राहुल गांधी) किस ‘कोर्स करेक्शन’ की बात कर रहे हैं। अर्थव्यवस्था और इसके बुनियादी सिद्धांत मजबूत हैं। हमने एमएसएमई, कपड़ा और किसानों के लिए ऐसी योजनाएं लाई हैं जो उन्हें वैश्विक अस्थिरता से बचाएंगी।”

मंडराता व्यापार युद्ध

जैसे-जैसे 2026 आगे बढ़ रहा है, नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच आर्थिक संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका वर्तमान में “सेंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2025” पर विचार कर रहा है, जो रूसी ऊर्जा का व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ को 500 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है।

भारत के लिए चुनौती रूस से किफायती ऊर्जा प्राप्त करने और अमेरिका के साथ एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने की है। जबकि सरकार का दावा है कि अर्थव्यवस्था लचीली है, विपक्ष का “मृत अर्थव्यवस्था” का नैरेटिव निर्यात पर निर्भर क्षेत्रों, जैसे हरियाणा के कपड़ा उद्योग में अपनी जगह बना रहा है, जो भारी शुल्क की मार झेल रहे हैं।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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