सिंगूर (पश्चिम बंगाल) — पश्चिम बंगाल की राजनीति के ऐतिहासिक केंद्र सिंगूर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक नैरेटिव को चुनौती देने की कोशिश की है। जिस स्थान से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उदय की नींव पड़ी थी, वहीं से ममता बनर्जी ने उद्योग और कृषि के संतुलन पर आधारित विकास मॉडल को आगे रखते हुए केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हाल ही में एक रैली में तृणमूल कांग्रेस पर “उद्योग विरोधी नीतियों” का आरोप लगाए जाने के कुछ ही दिनों बाद ममता बनर्जी ने सिंगूर में विशाल जनसभा की। इस अवसर पर उन्होंने लगभग 33,551 करोड़ रुपये की लागत वाली 1,694 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया। इन परियोजनाओं में बुनियादी ढांचे, सड़क, जल आपूर्ति, शहरी विकास, स्वास्थ्य और औद्योगिक निवेश से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।
ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा, “हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास नहीं चाहते जो किसानों की जमीन छीनकर थोपा जाए। बंगाल में उद्योग और खेती—दोनों साथ-साथ चलेंगे।” यह बयान सीधे तौर पर उस राजनीतिक बहस को संबोधित करता है, जो सिंगूर भूमि आंदोलन के समय से राज्य की राजनीति में गहराई से जुड़ी रही है।
सिंगूर वही स्थान है, जहां 2006–07 में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों के आंदोलन ने तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार को राजनीतिक रूप से कमजोर कर दिया था। इसी आंदोलन से ममता बनर्जी को व्यापक जनसमर्थन मिला और 2011 में वे सत्ता में आईं। इसलिए सिंगूर आज भी तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रतीकात्मक और रणनीतिक—दोनों दृष्टियों से अहम माना जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी हालिया रैली में कहा था कि बंगाल में निवेश का माहौल कमजोर है और उद्योगों को प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा। इसके जवाब में ममता बनर्जी ने निवेश के आंकड़ों और परियोजनाओं का हवाला देते हुए दावा किया कि राज्य में औद्योगिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार छोटे और मध्यम उद्योगों, स्टार्टअप्स और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समान महत्व दे रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह टकराव केवल विकास मॉडल का नहीं, बल्कि आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक धारणा बनाने की कोशिश का हिस्सा है। भाजपा जहां बंगाल में औद्योगिक निवेश और रोजगार को बड़ा मुद्दा बना रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस किसानों, भूमि अधिकारों और समावेशी विकास के मुद्दे को केंद्र में रखकर जवाब दे रही है।
एक राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक, “सिंगूर से ममता बनर्जी का संदेश स्पष्ट है—वे भाजपा के उद्योग-केंद्रित आरोपों का जवाब विकास के संतुलित मॉडल से देना चाहती हैं, जिसमें सामाजिक स्वीकार्यता को प्राथमिकता दी जाए।”
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने बंगाल को निवेश के लिए आकर्षक बनाने के साथ-साथ किसानों और मजदूरों के हितों की रक्षा की है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह राज्यों के अधिकारों और संघीय ढांचे की अनदेखी कर रही है।
भाजपा की ओर से इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य नेतृत्व ने कहा है कि घोषणाओं और शिलान्यास से अधिक जरूरी है कि परियोजनाएं जमीन पर उतरें और युवाओं को रोजगार मिले। पार्टी का दावा है कि बंगाल की औद्योगिक क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा।
फिलहाल, सिंगूर से दिया गया ममता बनर्जी का यह संदेश राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। यह न केवल प्रधानमंत्री मोदी के आरोपों का सीधा जवाब है, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के उस पुराने नैरेटिव को भी दोहराता है, जिसने उसे सत्ता तक पहुंचाया था—कि विकास जनता की सहमति और संतुलन के साथ होना चाहिए।
जैसे-जैसे चुनावी माहौल गर्माएगा, उद्योग बनाम किसान और केंद्र बनाम राज्य की यह बहस बंगाल की राजनीति के केंद्र में बनी रहने की संभावना है।
