नई दिल्ली — वैश्विक व्यापार कूटनीति के लिए एक ऐतिहासिक क्षण में, भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने बीस साल के लंबे इंतजार को समाप्त करते हुए एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए बातचीत आधिकारिक तौर पर संपन्न कर ली है। मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के दौरान इस समझौते को औपचारिक रूप दिया गया, जिसे यूरोपीय नेतृत्व ने “सभी समझौतों की जननी” (Mother of all deals) करार दिया है।
इस समझौते का भारत के राजनीतिक हलकों में व्यापक स्वागत हुआ है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए इसे एक मील का पत्थर बताया, जो केवल व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि एक “नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था” स्थापित करता है।
राजनीतिक सहमति: चतुर्वेदी ने “लंबे समय से लंबित” सौदे का स्वागत किया
बुधवार को एएनआई (ANI) से बात करते हुए, चतुर्वेदी ने इस बात पर जोर दिया कि यह सौदा साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के मिलन को दर्शाता है।
“मैं मुक्त व्यापार समझौते का स्वागत करती हूँ; यह 20 वर्षों से लंबित था। दो दशकों से भारत और यूरोपीय संघ इस तरह के व्यापार सौदे पर चर्चा कर रहे थे और आखिरकार इसे निष्कर्ष तक पहुँचाना हमारे देशों और यूरोपीय संघ के देशों के लिए अच्छा है,” चतुर्वेदी ने कहा।
उन्होंने यह भी नोट किया कि वर्तमान भू-राजनीतिक माहौल को देखते हुए इस सौदे का समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को उन जटिल बिंदुओं पर बातचीत सफल बनाने के लिए बधाई दी, जिन्होंने पहले दशकों तक इस सौदे को रोक रखा था।
आर्थिक प्रभाव: किसे क्या मिलेगा?
यह समझौता व्यावसायिक रूप से बहुत बड़ा है, जो दुनिया की अर्थव्यवस्था के लगभग 25% हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। वित्त वर्ष 2027-28 तक लागू होने वाले इस समझौते से 96% से अधिक व्यापारिक वस्तुओं पर टैरिफ खत्म या कम हो जाएंगे।
भारत के लिए प्रमुख लाभ:
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कपड़ा और परिधान: भारतीय निर्यातकों को, जो वर्तमान में 4% से 12% शुल्क का सामना करते हैं, $260 बिलियन के यूरोपीय बाजार में जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलेगा।
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रत्न और आभूषण: इस क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार अगले तीन वर्षों में दोगुना होकर ₹910 बिलियन तक पहुँच सकता है।
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कृषि: चाय, कॉफी, मसालों और झींगा जैसे समुद्री उत्पादों के लिए बेहतर पहुंच से ग्रामीण और महिला-नेतृत्व वाली आजीविका को बढ़ावा मिलेगा।
यूरोपीय संघ के लाभ:
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ऑटोमोटिव: भारत प्रीमियम यूरोपीय कारों (वॉक्सवैगन, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज) पर टैरिफ को 110% से घटाकर पांच वर्षों में केवल 10% कर देगा।
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पेय पदार्थ: वाइन पर शुल्क तत्काल 150% से घटकर 75% हो जाएगा, जो अंततः 20% तक गिरेगा।
रणनीतिक एजेंडा 2030: व्यापार से आगे
शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय नेतृत्व ने एक रणनीतिक दस्तावेज भी जारी किया, जिसका शीर्षक है ‘टुवर्ड्स 2030 – ए जॉइंट इंडिया-यूरोपीय संघ कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक एजेंडा’।
रणनीतिक एजेंडा के तीन स्तंभ:
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सुरक्षा और रक्षा: समुद्री सुरक्षा, साइबर-रक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग को गहरा करने के लिए अपनी तरह की पहली ‘सुरक्षा और रक्षा साझेदारी’ पर हस्ताक्षर किए गए।
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गतिशीलता (Mobility): छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए एक ढांचा तैयार किया गया है, जिसके तहत भारत में एक “यूरोपीय कानूनी गेटवे कार्यालय” खोला जाएगा।
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स्वच्छ ऊर्जा: ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स की शुरुआत और 2030 तक वैज्ञानिक सहयोग का नवीनीकरण जलवायु परिवर्तन के प्रति संयुक्त प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
20 साल का सफर
इस एफटीए की यात्रा 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन बाजार पहुंच और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मतभेदों के कारण 2013 में इसे निलंबित कर दिया गया था। 2022 में बातचीत फिर से शुरू हुई और 2026 का यह निष्कर्ष भारत की व्यापार नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता और ‘चीन प्लस वन’ रणनीति ने दोनों पक्षों को इस समझौते के लिए प्रेरित किया है।
