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बिना मुकाबले भाजपा अध्यक्ष नियुक्त

In Politics
January 20, 2026
rajneetiguru.com - नितिन नबीन का चयन और भाजपा अध्यक्ष प्रक्रिया। Image Credit – The Indian Express

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नितिन नबीन को निर्विरोध रूप से अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना है। उनके पदभार ग्रहण के साथ ही एक बार फिर पार्टी की उस परंपरा पर चर्चा शुरू हो गई है, जिसके तहत 1980 में पार्टी की स्थापना के बाद से आज तक राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए कभी प्रत्यक्ष चुनाव नहीं हुआ। भाजपा के संविधान में चुनाव का प्रावधान मौजूद है, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह पद हमेशा सर्वसम्मति से ही तय किया गया है।

भाजपा की संगठनात्मक संरचना बहु-स्तरीय है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन से पहले मंडल, जिला, क्षेत्रीय और राज्य स्तर पर संगठनात्मक चुनाव पूरे किए जाते हैं। इसके बाद पार्टी का इलेक्टोरल कॉलेज राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया में भाग लेता है। संविधान के अनुसार, अध्यक्ष पद के लिए एक से अधिक उम्मीदवार खड़े हो सकते हैं, लेकिन अब तक हर बार केवल एक ही नामांकन सामने आया है, जिससे मुकाबले की स्थिति उत्पन्न ही नहीं हुई।

नितिन नबीन का चयन भी इसी प्रक्रिया के तहत हुआ। नामांकन की अंतिम तिथि तक उनके अलावा किसी अन्य उम्मीदवार ने वैध नामांकन दाखिल नहीं किया, जिसके बाद उन्हें निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि यह प्रक्रिया संगठन के भीतर व्यापक सहमति और एकजुटता को दर्शाती है।

भाजपा नेताओं का तर्क है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद केवल एक संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पार्टी की वैचारिक दिशा और चुनावी रणनीति को आकार देने वाला पद है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व यह सुनिश्चित करता है कि इस पद पर ऐसा व्यक्ति हो, जिसे संगठन के सभी स्तरों का समर्थन प्राप्त हो। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, “राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन सहमति से होना संगठन की मजबूती और अनुशासन का प्रतीक है।”

हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर आलोचनाएं भी होती रही हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निर्विरोध चयन की परंपरा पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र की संभावनाओं को सीमित करती है। उनके अनुसार, चुनाव होने से संगठन में वैचारिक बहस और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिल सकता है। इसके विपरीत, भाजपा का मानना है कि खुली प्रतिस्पर्धा से संगठन में गुटबाजी का खतरा बढ़ सकता है, जिसे वह टालना चाहती है।

नितिन नबीन का राजनीतिक सफर संगठन और सरकार दोनों में सक्रिय रहा है। वे बिहार से कई बार विधायक रह चुके हैं और पार्टी संगठन में विभिन्न महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके हैं। इससे पहले उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसे उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की भूमिका के रूप में देखा गया। पार्टी के भीतर उन्हें एक संगठक और अनुशासित नेता के रूप में जाना जाता है।

भाजपा के इतिहास पर नजर डालें तो जनसंघ से लेकर वर्तमान भाजपा तक, पार्टी नेतृत्व ने हमेशा संगठनात्मक स्थिरता को प्राथमिकता दी है। अतीत में भी पार्टी के सभी राष्ट्रीय अध्यक्ष इसी तरह सर्वसम्मति से चुने गए हैं। यह परंपरा भाजपा की उस कार्यशैली को दर्शाती है, जिसमें नेतृत्व परिवर्तन को टकराव के बजाय सहयोग के माध्यम से पूरा किया जाता है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नितिन नबीन की नियुक्ति पार्टी के आगामी चुनावी लक्ष्यों और दीर्घकालिक रणनीति से जुड़ी हुई है। 2029 के आम चुनावों को देखते हुए भाजपा संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर समन्वय बढ़ाने पर जोर दे रही है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

कुल मिलाकर, नितिन नबीन का निर्विरोध चयन भाजपा की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है, जिसमें नेतृत्व परिवर्तन को सहमति, संगठनात्मक अनुशासन और केंद्रीय निर्णय-प्रणाली के माध्यम से अंजाम दिया जाता है। यह मॉडल समर्थकों के लिए संगठनात्मक मजबूती का उदाहरण है, जबकि आलोचकों के लिए आंतरिक लोकतंत्र पर बहस का विषय बना हुआ है।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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