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कांग्रेस ने डीके शिवकुमार की मुख्यमंत्री दावेदारी रोकी

In Politics
January 09, 2026
rajneetiguru.com - कांग्रेस ने डीके शिवकुमार की CM दावेदारी क्यों रोकी। Image Credit – The Indian Express

कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सत्ता संतुलन को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा डी. के. शिवकुमार को असम विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी का वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने को महज़ एक संगठनात्मक फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे कर्नाटक में सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इस कदम ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल शिवकुमार की मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा को “कोल्ड स्टोरेज” में डाल दिया गया है।

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही यह चर्चा रही है कि सत्ता साझा व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री पद का कार्यकाल बदला जा सकता है। डी. के. शिवकुमार, जो राज्य कांग्रेस के मजबूत संगठनकर्ता और उपमुख्यमंत्री हैं, लंबे समय से मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार माने जाते रहे हैं। हालांकि, पार्टी नेतृत्व की हालिया रणनीति ने संकेत दिया है कि कांग्रेस फिलहाल कोई जोखिम उठाने के मूड में नहीं है।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा शिवकुमार को असम के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किया जाना ऐसे समय में हुआ है, जब कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें तेज़ थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जिम्मेदारी देकर पार्टी ने शिवकुमार को राष्ट्रीय स्तर पर व्यस्त रखने के साथ-साथ यह संदेश भी दिया है कि राज्य में नेतृत्व स्थिर रहेगा।

कांग्रेस नेतृत्व से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,
“कर्नाटक में सरकार स्थिर है और अभी नेतृत्व परिवर्तन का कोई सवाल नहीं है। पार्टी के सामने अन्य राज्यों में चुनावी चुनौतियां हैं, जहां अनुभवी नेताओं की जरूरत है।”

कांग्रेस की रणनीति को समझने के लिए पार्टी की वर्तमान स्थिति पर नज़र डालना जरूरी है। कर्नाटक में पार्टी ने हालिया विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल किया था और सिद्धारमैया की अगुवाई में सरकार ने सामाजिक कल्याण योजनाओं के जरिए अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की है। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन से सरकार की स्थिरता और जनविश्वास पर असर पड़ सकता है।

साथ ही, पार्टी को यह भी ध्यान में रखना पड़ रहा है कि डी. के. शिवकुमार और सिद्धारमैया दोनों ही बड़े जनाधार वाले नेता हैं। किसी एक को हटाने या पद बदलने से आंतरिक असंतोष बढ़ने का खतरा बना रहता है। यही कारण है कि कांग्रेस फिलहाल “स्थिति बनाए रखने” की नीति अपना रही है।

एक राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार,
“कांग्रेस के पास फिलहाल नेतृत्व बदलने का व्यावहारिक विकल्प नहीं है। सिद्धारमैया सरकार का प्रदर्शन पार्टी के लिए फायदेमंद है और किसी भी तरह का प्रयोग जोखिम भरा हो सकता है।”

डी. के. शिवकुमार को राज्य में पार्टी संगठन को मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है। चुनाव से पहले उनकी रणनीतिक भूमिका और संसाधन प्रबंधन को कांग्रेस की जीत का बड़ा कारण माना गया था। इसके बावजूद, मुख्यमंत्री पद को लेकर उनकी उम्मीदों पर बार-बार विराम लगना यह दर्शाता है कि पार्टी नेतृत्व राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक राजनीतिक गणित को प्राथमिकता दे रहा है।

हालिया घटनाक्रम के बाद शिवकुमार ने सार्वजनिक रूप से संयमित प्रतिक्रिया दी है और पार्टी के फैसले के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई है। उन्होंने कहा,
“पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, मैं उसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा। हमारा लक्ष्य कांग्रेस को मजबूत करना है।”

दूसरी ओर, सिद्धारमैया की स्थिति फिलहाल मजबूत दिखाई देती है। पार्टी हाईकमान की ओर से उनके नेतृत्व को लेकर कोई सार्वजनिक असंतोष सामने नहीं आया है। सरकार की योजनाएं और प्रशासनिक स्थिरता कांग्रेस को यह भरोसा दिला रही हैं कि नेतृत्व परिवर्तन की कोई तत्काल आवश्यकता नहीं है।

असम में होने वाले विधानसभा चुनाव भी कांग्रेस के लिए अहम हैं। ऐसे में पार्टी चाहती है कि अनुभवी नेताओं को वहां लगाया जाए, ताकि संगठनात्मक मजबूती और चुनावी रणनीति को धार दी जा सके। शिवकुमार की नियुक्ति इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

कुल मिलाकर, कांग्रेस का यह कदम यह दर्शाता है कि पार्टी फिलहाल जोखिम से बचने और स्थिरता बनाए रखने की नीति पर चल रही है। डी. के. शिवकुमार की मुख्यमंत्री बनने की आकांक्षा को अस्थायी रूप से रोककर पार्टी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सिद्धारमैया का नेतृत्व कम से कम आगामी विधानसभा चुनावों तक बरकरार रहेगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह रणनीति पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रख पाती है या फिर नेतृत्व को लेकर नई राजनीतिक हलचल जन्म लेती है।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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