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अंकिता भंडारी मामले में नए आरोपों से सियासी हलचल

In Politics
January 08, 2026
rajneetiguru.com - अंकिता भंडारी मामले में नए आरोप और सियासी विवाद। Image Credit – The Indian Express

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस बार विवाद के केंद्र में दो नए नाम सामने आए हैं— उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर। उर्मिला सनावर, जो स्वयं को उत्तराखंड के पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की दूसरी पत्नी बताती हैं, ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि एक वरिष्ठ भाजपा नेता घटना के समय उस रिसॉर्ट में मौजूद थे, जहां 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या वर्ष 2022 में हुई थी।

इन आरोपों के सामने आने के बाद मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। उर्मिला सनावर का कहना है कि जिस रात अंकिता भंडारी की हत्या हुई, उस समय रिसॉर्ट में कई प्रभावशाली लोग मौजूद थे, जिनके नाम पहले सार्वजनिक नहीं किए गए। उन्होंने विशेष रूप से भाजपा के वरिष्ठ नेता दुष्यंत गौतम का नाम लिया है।

हालांकि दुष्यंत गौतम ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश बताया है। उन्होंने एक बयान में कहा,
“मुझ पर लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं। मेरा इस घटना से कोई संबंध नहीं है।”

अंकिता भंडारी, जो उत्तराखंड के ऋषिकेश के पास एक निजी रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम कर रही थीं, सितंबर 2022 में लापता हो गई थीं। बाद में उनका शव बरामद हुआ, जिसके बाद हत्या का मामला दर्ज किया गया। जांच में सामने आया कि उन पर रिसॉर्ट में कथित तौर पर अनैतिक गतिविधियों के लिए दबाव बनाया जा रहा था, जिसका उन्होंने विरोध किया था।

इस मामले में मुख्य आरोपी रिसॉर्ट का मालिक था, जिसका संबंध एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से बताया गया। घटना के बाद राज्यभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे। अदालत ने बाद में दोषियों को सजा सुनाई, लेकिन मामले से जुड़े कई पहलू लगातार विवादों में बने रहे।

उर्मिला सनावर के ताजा आरोपों ने इस पुराने मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने पहले भी कुछ जानकारियां साझा करने की कोशिश की थी, लेकिन उन पर दबाव डाला गया। उनके अनुसार, यह केवल एक हत्या का मामला नहीं, बल्कि “सत्ता और प्रभाव के दुरुपयोग” का उदाहरण है।

पूर्व विधायक सुरेश राठौर, जिनका नाम इस विवाद में उर्मिला सनावर के निजी दावे के कारण जुड़ा है, ने इस पूरे प्रकरण पर संयमित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत संबंधों को इस संवेदनशील मामले से जोड़ना अनुचित है और जांच एजेंसियों को तथ्यों के आधार पर काम करना चाहिए।

राजनीतिक गलियारों में इन आरोपों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। विपक्षी दलों ने मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि सत्तारूढ़ दल ने इसे राजनीतिक बदनाम करने की कोशिश करार दिया है।

एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक का कहना है,
“जब ऐसे संवेदनशील मामलों में नए आरोप सामने आते हैं, तो यह जरूरी हो जाता है कि उनकी जांच पारदर्शी तरीके से हो, ताकि जनता का भरोसा बना रहे।”

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नए आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत सामने आते हैं, तो जांच के दायरे का विस्तार संभव है। हालांकि केवल आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालना न्यायसंगत नहीं होगा। इस बीच, पीड़िता के परिवार की ओर से भी यह मांग उठ रही है कि पूरे मामले की हर परत को सार्वजनिक रूप से सामने लाया जाए।

सामाजिक स्तर पर यह मामला एक बार फिर महिला सुरक्षा, कार्यस्थल पर शोषण और प्रभावशाली लोगों की जवाबदेही जैसे मुद्दों को केंद्र में ले आया है। कई महिला संगठनों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में राजनीतिक प्रभाव से ऊपर उठकर कार्रवाई होनी चाहिए।

अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े नए आरोपों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह मामला अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उर्मिला सनावर के दावे और दुष्यंत गौतम की सफाई के बीच सच्चाई क्या है, यह आने वाली जांच और कानूनी प्रक्रियाओं से ही सामने आएगा। फिलहाल, यह प्रकरण उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए एक नई परीक्षा बनकर उभरा है।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
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मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
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