उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। यह मामला, जिसने वर्ष 2022 में पूरे देश को झकझोर दिया था, अब दोबारा राज्य की राजनीति को प्रभावित करता दिखाई दे रहा है। जैसे-जैसे 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, यह मुद्दा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए चुनौती और कांग्रेस के लिए राजनीतिक अवसर के रूप में उभर रहा है।
अंकिता भंडारी, जो ऋषिकेश के पास एक निजी रिसॉर्ट में कार्यरत थीं, की हत्या ने महिला सुरक्षा, सत्ता के दुरुपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे गंभीर सवाल खड़े किए थे। इस मामले में मुख्य आरोपी एक प्रभावशाली राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ा होने के कारण शुरुआत से ही जांच प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे। यद्यपि अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई, लेकिन राजनीतिक विवाद पूरी तरह थमा नहीं।
अब इस मामले ने नया मोड़ तब लिया है जब कांग्रेस ने इसे लेकर राज्यव्यापी “न्याय यात्रा” शुरू की है। पार्टी का दावा है कि यह यात्रा केवल एक राजनीतिक अभियान नहीं, बल्कि पीड़िता और उसके परिवार को पूर्ण न्याय दिलाने की मांग है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कुछ अहम सवाल आज भी अनुत्तरित हैं और पूरे सच को जनता के सामने लाया जाना चाहिए।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा,
“यह केवल एक हत्या का मामला नहीं है, यह सत्ता, प्रभाव और न्याय के बीच की लड़ाई है। जब तक हर सवाल का जवाब नहीं मिलेगा, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”
न्याय यात्रा के दौरान कई जिलों में सभाएं, पदयात्राएं और जनसंवाद आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें महिला सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। कांग्रेस इस मुद्दे को 2027 के चुनावों से जोड़ते हुए यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि राज्य में कानून का राज कमजोर हुआ है।
वहीं BJP ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास बताया है। सत्तारूढ़ पार्टी का कहना है कि सरकार ने मामले में कड़ी कार्रवाई की, जांच पूरी की गई और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाई गई। BJP नेताओं का तर्क है कि इस मामले को बार-बार उठाकर जनता की भावनाओं से खेला जा रहा है।
BJP के एक प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और दोषियों को सजा मिल चुकी है। अब इस मामले को चुनावी हथियार बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है।”
हालांकि, राजनीतिक बयानबाजी से इतर, यह मामला आम जनता के बीच अब भी संवेदनशील बना हुआ है। कई सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा और प्रभावशाली लोगों की जवाबदेही से जुड़ा व्यापक मुद्दा है। यही कारण है कि समय बीतने के बावजूद यह मामला जनचर्चा में बना हुआ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंकिता भंडारी मामला उत्तराखंड की राजनीति में भावनात्मक और नैतिक मुद्दों को फिर से केंद्र में ले आया है। कांग्रेस इसे सत्ता विरोधी माहौल बनाने का माध्यम मान रही है, जबकि BJP इसे कानून व्यवस्था की अपनी प्रतिबद्धता का उदाहरण बताने की कोशिश कर रही है।
जैसे-जैसे चुनावी माहौल गर्माएगा, यह स्पष्ट होता जा रहा है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक कानूनी मामला नहीं रह गया है। यह अब एक राजनीतिक प्रतीक बन चुका है, जो आने वाले समय में उत्तराखंड की राजनीति की दिशा और विमर्श को प्रभावित कर सकता है।
