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सुरेश कलमाडी: पुणे के विकास को नई ऊंचाइयां देने वाला पायलट

In Politics
January 06, 2026
RajneetiGuru.com - सुरेश कलमाडी पुणे के विकास को नई ऊंचाइयां देने वाला पायलट - Image Credited by Press Trust of India

भारतीय सार्वजनिक जीवन के सबसे बहुआयामी और चर्चित अध्यायों में से एक का अंत हो गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री, दिग्गज कांग्रेस नेता और भारतीय खेल प्रशासन के लंबे समय तक ‘चाणक्य’ रहे सुरेश कलमाडी का मंगलवार तड़के पुणे में निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे। कलमाडी, जो पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे, ने दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली।

उनका निधन पुणे के लिए एक युग का अंत है, जिस शहर का उन्होंने तीन बार लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया और लगभग चार दशकों तक वहां की राजनीति और बुनियादी ढांचे को प्रभावित किया। भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान के कॉकपिट से लेकर भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के गलियारों और केंद्रीय मंत्रिमंडल तक, कलमाडी का जीवन महत्वाकांक्षा और संगठनात्मक कौशल का एक अनूठा उदाहरण था।

विकास की विरासत: पवार बंधुओं की श्रद्धांजलि

अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में राजनीतिक विवादों के साये में रहने के बावजूद, महाराष्ट्र में उनके निधन पर गहरा सम्मान व्यक्त किया गया। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि कलमाडी के निधन से पुणे के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में एक “शून्य” पैदा हो गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक पूर्व वायुसेना पायलट के रूप में कलमाडी ने शहर के परिदृश्य पर एक अमिट छाप छोड़ी है।

एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार, जिन्होंने कलमाडी को उनके शुरुआती वर्षों में राजनीति में आगे बढ़ाया था, ने भी अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

शरद पवार ने कहा, “राजनीति में मतभेद और आलोचना अपरिहार्य हैं; फिर भी, ऐसी परिस्थितियों में भी उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया। पुणे फेस्टिवल और पुणे इंटरनेशनल मैराथन जैसी पहल के माध्यम से उन्होंने पुणे को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।”

आसमान से सड़कों तक: शुरुआती सफर

सुरेश कलमाडी का जन्म 1 मई 1944 को हुआ था। उन्होंने 1960 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) जॉइन की और 1964 में भारतीय वायु सेना में पायलट के रूप में कमीशन प्राप्त किया। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ 1965 और 1971 के युद्धों में वीरता के साथ भाग लिया और आठ सेवा पदक प्राप्त किए। 1974 में वे स्क्वाड्रन लीडर के पद से सेवानिवृत्त हुए।

सेवानिवृत्ति के बाद वे पुणे लौट आए और ‘पुणे कॉफी हाउस’ के माध्यम से चर्चा में आए। 1977 में युवा कांग्रेस के माध्यम से राजनीति में उनके प्रवेश ने उनके उत्थान का मार्ग प्रशस्त किया। वे पहली बार 1982 में राज्यसभा के लिए चुने गए और उच्च सदन में चार कार्यकाल पूरे किए। बाद में, उन्होंने 1996, 2004 और 2009 में पुणे लोकसभा सीट जीती। पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार में रेल राज्य मंत्री के रूप में, उन्हें पुणे रेलवे डिवीजन बनाने और विक्टोरिया टर्मिनस का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी टर्मिनस करने का श्रेय दिया जाता है।

खेल प्रशासक और राष्ट्रमंडल खेलों का विवाद

कलमाडी की असली रुचि खेल प्रशासन में थी। लगभग 20 वर्षों तक वे भारतीय खेलों का चेहरा रहे। उन्होंने 1996 से 2011 तक भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उन्होंने 2003 के एफ्रो-एशियन गेम्स और 2008 के कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स को पुणे में आयोजित कराने में मुख्य भूमिका निभाई।

हालांकि, 2010 के दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों (CWG) ने उनके करियर की दिशा बदल दी। वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के कारण उन्हें अप्रैल 2011 में गिरफ्तार किया गया और उन्होंने 10 महीने तिहाड़ जेल में बिताए। हालांकि, अप्रैल 2025 में, एक दिल्ली अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया, जिससे उन्हें इस मामले में बड़ी राहत मिली थी।

पुणे का “सुरेश कलमाडी” स्टाइल

पुणे के लोगों के लिए, कलमाडी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे शहर के लिए एक ‘इवेंट मैनेजर’ की तरह थे। उन्होंने 1989 में पुणे फेस्टिवल की शुरुआत की, जिसने गणेशोत्सव को पर्यटन और संस्कृति से जोड़ा। उन्होंने पुणे इंटरनेशनल मैराथन की भी नींव रखी, जो भारत की सबसे पुरानी मैराथन में से एक है।

वैकुंठ श्मशान घाट पर उनके अंतिम संस्कार के साथ ही, पुणे एक ऐसे व्यक्ति को विदाई दे रहा है जो युद्ध नायक भी था, खेल दूरदर्शी भी और एक विवादित राजनीतिक दिग्गज भी। उनकी विरासत एक ऐसी जटिल बुनावट है जहां अंतरराष्ट्रीय स्टेडियमों की चमक और शहरी विकास का संकल्प, अदालती कार्यवाही की परछाइयों के साथ हमेशा के लिए जुड़ा रहेगा।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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