2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को नंदीग्राम सहकारी कृषि विकास समिति (CADC) के चुनाव में क्लीन स्वीप किया।15 भगवा पार्टी ने चुनाव लड़ी गई सभी नौ सीटों पर जीत हासिल की, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) का खाता भी नहीं खुल सका। बंगाल की राजनीति के “ग्राउंड जीरो” माने जाने वाले नंदीग्राम में इस जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमकर जश्न मनाया।
नंदीग्राम, जो विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) सुवेंदु अधिकारी का निर्वाचन क्षेत्र है, एक बार फिर राज्य के राजनीतिक मिजाज की परीक्षा के रूप में उभरा है। अधिकारी, जिन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराया था, इस कृषि प्रधान क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं।
चुनावी फैसला और इसके निहितार्थ
सहकारी चुनाव, हालांकि स्थानीय प्रकृति के होते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में इन्हें अक्सर बड़ी चुनावी लड़ाइयों के पूर्वाभ्यास के रूप में देखा जाता है। CADC की सभी नौ सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। परिणाम घोषित होने के बाद, भाजपा समर्थकों ने सुवेंदु अधिकारी के समर्थन में नारे लगाते हुए और पार्टी के झंडे लहराते हुए सड़कों पर जुलूस निकाला।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सहकारी संस्था में एक भी सीट सुरक्षित करने में टीएमसी की विफलता पूर्व मेदिनीपुर में भाजपा के लिए निरंतर समर्थन का संकेत देती है। यह जीत ऐसे समय में हुई है जब दोनों पार्टियाँ 2026 के राज्य चुनावों के लिए अपने जनसंपर्क कार्यक्रमों को तेज कर रही हैं।
जुबानी जंग: सुवेंदु बनाम ममता
इस जीत ने भाजपा नेतृत्व को मुख्यमंत्री पर निशाना साधने का नया मौका दे दिया है। भाजपा विधायक शंकर घोष ने ममता बनर्जी पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “कंपार्टमेंटल” मुख्यमंत्री कहा—विपक्ष द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला यह शब्द 2021 में नंदीग्राम में उनकी हार और बाद में भवानीपुर उपचुनाव के माध्यम से विधानसभा में उनके प्रवेश को रेखांकित करता है।
घोष ने पत्रकारों से कहा, “किसी भी अराजकता से बचने के लिए उन्हें समझदारी से बोलना चाहिए था। हमारे अकेले विपक्ष के नेता ने उन्हें हिलाकर रख दिया। वह खुद नंदीग्राम विधानसभा चुनाव हार गईं और फिर एक कंपार्टमेंटल मुख्यमंत्री के रूप में विधानसभा में आईं। यह पश्चिम बंगाल के लिए शर्म की बात है।”
नंदीग्राम का महत्व
नंदीग्राम लगभग दो दशकों से पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिवर्तन का केंद्र रहा है। मूल रूप से 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन का स्थल, जिसने टीएमसी को सत्ता में पहुँचाया, यह 2021 में प्रतिष्ठा की लड़ाई का मैदान बन गया जब सुवेंदु अधिकारी ने भाजपा में शामिल होकर अपनी पूर्व गुरु को चुनौती दी।
| मुख्य घटना | वर्ष | परिणाम/महत्व |
| नंदीग्राम आंदोलन | 2007 | 34 वर्षीय वाम शासन का अंत; टीएमसी का उदय। |
| विधानसभा चुनाव | 2021 | सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 1,956 मतों से हराया। |
| सहकारी चुनाव18 | 202619 | भाजपा ने 9/9 सीटें जीतीं; टीएमसी शून्य पर रही।20 |
विशेषज्ञ विश्लेषण और भविष्य की राह
हालांकि टीएमसी अक्सर सहकारी चुनावों के परिणामों को स्थानीय प्रभाव बताकर खारिज करती रही है, लेकिन भाजपा का दावा है कि ये जीत जमीनी स्तर पर बदलाव की वास्तविक इच्छा को दर्शाती हैं।
प्रमुख राजनीतिक विश्लेषक डॉ. विश्वनाथ चक्रवर्ती ने टिप्पणी की:
“नंदीग्राम सिर्फ एक निर्वाचन क्षेत्र नहीं है; यह बंगाल में राजनीतिक वैधता का प्रतीक है। सहकारी चुनावों में क्लीन स्वीप, विशेष रूप से जब सत्तारूढ़ दल के पास पूरी मशीनरी हो, यह बताता है कि सुवेंदु अधिकारी की संगठनात्मक पकड़ बरकरार है। टीएमसी के लिए, यह 2026 के चुनावों से पहले मेदिनीपुर क्षेत्र में अपनी रणनीति का पुनर्मूल्यांकन करने की चेतावनी है।”
जैसे-जैसे पश्चिम बंगाल 2026 के विधानसभा चुनावों के करीब पहुँच रहा है, मुकाबला टीएमसी और भाजपा के बीच सीधा और कड़ा होने की उम्मीद है।
