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इंदौर जल संकट: दूषित पानी से मौतें, दहशत में शहर

In Topshoot
January 02, 2026
RAjneetiguru.com - इंदौर जल संकट दूषित पानी से मौतें, दहशत में शहर - Image Credited byThe Economic Times

भारत के सबसे स्वच्छ शहर का गौरव रखने वाले इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के संकट ने मातम फैला दिया है। 2 जनवरी, 2026 तक इस जल जनित त्रासदी में मरने वालों की संख्या आठ हो गई है, जबकि 200 से अधिक लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। इस घटना ने शहर के बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के कड़े रुख और मुख्यमंत्री की सक्रियता के बीच, पूरा शहर इस समय स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति से जूझ रहा है।

पीड़ितों की दास्तां: चंद घंटों में उजड़ गए परिवार

भागीरथपुरा में रहने वाले अनिल लिखार की आपबीती इस त्रासदी की भयावहता को बयां करती है। उनके भाई, 35 वर्षीय श्रमिक अरविंद लिखार, इस संकट के शिकार हुए। अनिल ने बताया, “रविवार को वह काम से लौटे और पानी पीने के कुछ ही देर बाद उन्हें उल्टियां होने लगीं। हमें लगा कि मामूली फूड पॉइजनिंग है, लेकिन बुधवार तक उनकी हालत बहुत बिगड़ गई। जब तक हम उन्हें अस्पताल ले गए, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने कहा कि रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।”

अरविंद जैसे आठ लोगों की मौत ने पूरे इलाके में दहशत पैदा कर दी है। एमवाय (MY) अस्पताल के वार्ड गैस्ट्रोएंटेराइटिस के मरीजों से भरे पड़े हैं।

प्रशासनिक रिपोर्ट: सीवेज का पानी बना जहर

इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने पुष्टि की है कि प्रारंभिक जांच में पानी के दूषित होने के प्रमाण मिले हैं। शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि पानी की पाइपलाइन में सीवेज का रिसाव हुआ है, जिससे पानी जहरीला हो गया।

कलेक्टर वर्मा ने कहा, “शुरुआती रिपोर्ट दूषित पानी की ओर इशारा करती है। हमारी टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं और लक्षण वाले मरीजों की पहचान कर रही हैं। पूरे क्षेत्र में क्लोरीन की गोलियां बांटी जा रही हैं और फिलहाल प्रभावित पाइपलाइन से सप्लाई रोककर टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है।” अब तक 201 मरीज भर्ती किए गए हैं, जिनमें से 71 को डिस्चार्ज कर दिया गया है।

मानवाधिकार आयोग का नोटिस: लापरवाही पर सवाल

इस त्रासदी पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने कहा कि स्थानीय निवासी पिछले कई दिनों से पानी के खराब स्वाद और गंध की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।

आयोग ने सख्त लहजे में कहा:

“रिपोर्टों के अनुसार, लोग दूषित पानी की शिकायत कर रहे थे लेकिन प्रशासन ने इसे नजरअंदाज किया। यह स्वास्थ्य के अधिकार और जीवन के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को दो सप्ताह के भीतर इस पर विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी।”

सरकार की राहत और कार्रवाई

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले में उच्च स्तरीय बैठक की और निर्देश दिए हैं कि सभी पीड़ितों का इलाज मुफ्त किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मरीज ने निजी अस्पताल में पैसे जमा किए हैं, तो उसे वापस (रिफंड) किया जाएगा।

नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और कहा, “मरीजों की संख्या अधिक है, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण में है। आईसीयू में भर्ती मरीज भी खतरे से बाहर हैं। हमारा पूरा ध्यान इस समय उचित इलाज और पानी की नई लाइन बहाल करने पर है।”

स्वच्छता के पीछे की हकीकत

इंदौर लगातार सात वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है, लेकिन इस घटना ने यह उजागर कर दिया है कि केवल ऊपरी सफाई काफी नहीं है। शहर की पुरानी पाइपलाइनें और उनके सीवेज लाइनों के पास होना एक बड़ा खतरा बन चुका है। भागीरथपुरा की त्रासदी यह सबक देती है कि पाइपलाइनों का समय पर रखरखाव और जनता की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई कितनी अनिवार्य है।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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