कोलकाता, 2 जनवरी — पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपनी राजनीतिक तैयारियों को तेज करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की राज्यव्यापी यात्रा “आबार जितबे बंगला” की शुरुआत की है। इस यात्रा को पार्टी नेतृत्व विधानसभा चुनावों से पहले एक अहम राजनीतिक पहल के रूप में देख रहा है, जिसका उद्देश्य सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाना और संगठनात्मक स्तर पर मजबूती लाना है।
यह यात्रा ऐसे समय में शुरू हुई है जब राज्य की राजनीति में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच टकराव तेज है। तृणमूल का मानना है कि अभिषेक बनर्जी की यह यात्रा जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करेगी और मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित करने में मदद करेगी। पार्टी के भीतर इसे केवल एक चुनावी अभियान नहीं, बल्कि जनसंपर्क और संगठनात्मक समीक्षा का माध्यम माना जा रहा है।
यात्रा के दौरान अभिषेक बनर्जी विभिन्न जिलों में सार्वजनिक सभाएं, सड़क शो और स्थानीय बैठकों के माध्यम से आम लोगों से संवाद करेंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस दौरान राज्य सरकार की सामाजिक कल्याण योजनाओं, महिलाओं और किसानों से जुड़ी पहलों तथा बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों को प्रमुखता से सामने रखा जाएगा। साथ ही, पार्टी कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेकर स्थानीय नेतृत्व की भूमिका और प्रदर्शन की भी समीक्षा की जाएगी।
तृणमूल कांग्रेस इस यात्रा की तुलना अभिषेक बनर्जी की 2023 की “नबो जोअर यात्रा” से कर रही है। पार्टी का दावा है कि उस यात्रा ने संगठन को नई ऊर्जा दी थी और उसके बाद हुए पंचायत तथा लोकसभा चुनावों में तृणमूल को राजनीतिक लाभ मिला। इसी अनुभव के आधार पर पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि “आबार जितबे बंगला” यात्रा भी आगामी विधानसभा चुनावों से पहले माहौल बनाने में सहायक होगी।
एक वरिष्ठ तृणमूल नेता ने इस यात्रा के महत्व पर टिप्पणी करते हुए कहा,
“अभिषेक बनर्जी आज पार्टी के सबसे सक्रिय रणनीतिक चेहरों में से एक हैं। संगठन और जनसंपर्क दोनों स्तरों पर उनकी भूमिका लगातार बढ़ी है, और यह यात्रा उसी नेतृत्व क्षमता को आगे बढ़ाने का प्रयास है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा केवल भाजपा पर हमला करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए तृणमूल कांग्रेस अपनी आंतरिक संगठनात्मक संरचना को भी मजबूत करना चाहती है। टिकट वितरण, स्थानीय असंतोष और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं जैसे मुद्दों पर प्रत्यक्ष संवाद पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भाजपा ने हालांकि इस यात्रा को चुनावी दिखावा करार दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि राज्य में बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सरकार जनता की नाराजगी का सामना कर रही है, और केवल यात्राओं से इन सवालों से बचा नहीं जा सकता। वाम दलों ने भी इस अभियान को सत्ता पक्ष की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में यात्राओं का इतिहास पुराना रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं कई बार पदयात्राओं और आंदोलनों के माध्यम से जनता से जुड़ती रही हैं। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अभिषेक बनर्जी की यह यात्रा तृणमूल के युवा नेतृत्व को सामने लाने की कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है।
जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, “आबार जितबे बंगला” यात्रा का असर राज्य की राजनीति में साफ दिखाई देगा। यह यात्रा तृणमूल कांग्रेस के लिए एक अवसर है, जहां वह अपनी उपलब्धियों को सामने रखे और संगठन को एकजुट करे, जबकि विपक्ष इसे चुनौती देने के लिए नए राजनीतिक मुद्दे तलाशता रहेगा।
