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अयोध्या ध्वजारोहण में आंदोलन के सैनिकों की झड़ी

In National
November 25, 2025
rajneetiguru.com - अंतिम राम मंदिर कार्यक्रम में जमीनी नेता प्रमुख। Image Credit – The Indian Express

अयोध्या — राम मंदिर आंदोलन की लंबी ऐतिहासिक यात्रा के अंतिम चरण के रूप में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में इस बार जमीनी स्तर पर संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को प्रमुख स्थान देने की तैयारी है। मंगलवार को होने वाले इस आयोजन में सभी सामाजिक वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों को प्रमुखता दी जाएगी। यह पहल न केवल प्रतिनिधित्व को व्यापक बनाने की कोशिश है, बल्कि आंदोलन की जड़ों से जुड़े उन लोगों को मान्यता देने का प्रयास भी है, जिन्होंने वर्षों तक इस अभियान को जीवित रखा।

कार्यक्रम से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस बार मंच पर उन कार्यकर्ताओं को स्थान दिया जाएगा, जिन्होंने न तो कभी राजनीतिक पदों की इच्छा जताई और न ही सुर्खियों में आए, लेकिन आंदोलन की बुनियाद के रूप में लंबे समय तक कार्य किया। एक आयोजक ने कहा,

“यह कार्यक्रम सिर्फ एक ऐतिहासिक क्षण नहीं, बल्कि उन हजारों साधारण कार्यकर्ताओं का सम्मान भी है जिन्होंने इसे संभव बनाया।”

सभी जातियों और समुदायों को शामिल करने का प्रयास

इस कार्यक्रम की विशेषता यह है कि विभिन्न जाति समूहों—ओबीसी, एससी, एसटी और सवर्ण—सभी को मंच और उपस्थिति में प्रतिनिधित्व मिलेगा। आयोजन समिति का मानना है कि मंदिर आंदोलन वैचारिक रूप से जितना व्यापक था, प्रतिनिधित्व भी उतना ही व्यापक होना चाहिए।

इसके अलावा, महिलाओं की भागीदारी को भी विशेष रूप से बढ़ाया जा रहा है। आयोजन टीम का कहना है कि आंदोलन के दौरान महिलाओं ने कई सामाजिक और धार्मिक अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसे अब औपचारिक रूप से मान्यता देने की जरूरत है।

मुस्लिम समुदाय से भी सहभागिता का संकेत

कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय के उन व्यक्तियों को भी निमंत्रण भेजा गया है, जिनका कानूनन या सामाजिक रूप से इस विवाद से जुड़ाव रहा है। इनमें इक़बाल अंसारी का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो अयोध्या विवाद में मुस्लिम पक्ष के प्रमुख वादी रहे हैं।

उनकी उपस्थिति को सामाजिक सद्भाव और संवाद का प्रतीक बताया जा रहा है। आयोजन से जुड़े एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा,

“आमंत्रण का संदेश साफ है—अतीत को स्वीकार करते हुए, भविष्य में सौहार्द और सम्मान की ओर बढ़ना।”

ऐतिहासिक संदर्भ और आंदोलन की पृष्ठभूमि

अयोध्या का विवाद भारतीय राजनीति, समाज और धार्मिक विमर्श का केंद्र बिंदु कई दशकों तक बना रहा। आंदोलन से जुड़े हजारों कार्यकर्ताओं ने लंबे समय तक जुलूस, यात्राएँ, सभाएँ और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए थे।
समय के साथ विवाद कानूनी, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कई चरणों से गुज़रा।

इस पृष्ठभूमि में अंतिम कार्यक्रम को आंदोलन की यात्रा के पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है—जहाँ बड़ी संस्थाएं, राजनीतिक चेहरे और प्रमुख धार्मिक नेता के बजाय आंदोलन के मूल आधार—गांव, कस्बे और स्थानीय इकाइयों के कार्यकर्ता—प्रमुख स्थान पर हैं।

महिलाओं और SC/ST समुदाय की भूमिका पर नया फोकस

कार्यक्रम का एक मुख्य उद्देश्य उन वर्गों को प्रमुखता देना बताया गया है, जिनकी आवाज़ कई बार बड़े राजनीतिक विमर्श में ओझल हो जाती है।
आयोजकों का कहना है कि आंदोलन में दलित समुदाय और आदिवासी परंपराओं ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था, जिसे अब औपचारिक रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए।

राजनीतिक और सामाजिक महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्यक्रम के कई सामाजिक और राजनीतिक आयाम हैं। एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा,

“अयोध्या का कार्यक्रम केवल धार्मिक आयोजन नहीं रह गया है। यह सामाजिक प्रतिनिधित्व, राजनीतिक संतुलन और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े संदेशों का भी वाहक बन चुका है।”

उनका कहना था कि सभी वर्गों की भागीदारी से यह संकेत देने की कोशिश है कि यह कार्यक्रम केवल किसी एक समूह का नहीं, बल्कि सभी नागरिकों और समाज के सभी वर्गों के लिए है।

कार्यक्रम की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं और स्थानीय प्रशासन से लेकर धार्मिक संगठनों तक सभी टीमें इसे सुचारू रूप से संपन्न कराने में जुटी हैं।
आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन केवल एक ऐतिहासिक क्षण नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत भी हो सकता है—जहाँ अतीत की जटिलताओं के बावजूद आगे की राह संवाद, सहभागिता और समावेशिता पर आधारित हो।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
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मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
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