नई दिल्ली: देश की राजनीति में एक बार फिर ऊपरी सदन यानी राज्यसभा को लेकर सियासी सरगर्मी तेज़ हो गई है। 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनावों ने सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी खेमे के बीच स्पष्ट राजनीतिक रेखाएँ खींच दी हैं। इन चुनावों का असर न केवल संसद के शक्ति संतुलन पर पड़ेगा, बल्कि आने वाले वर्षों की विधायी राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है।
वर्तमान में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) राज्यसभा में बहुमत से कुछ ही कदम दूर है। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले इस गठबंधन को हाल के विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन का लाभ मिलता दिख रहा है, खासकर महाराष्ट्र और बिहार जैसे राजनीतिक रूप से अहम राज्यों में। यदि NDA अपने अनुमानित आंकड़ों के अनुसार सीटें हासिल करता है, तो वह उच्च सदन में पूर्ण बहुमत के बेहद करीब पहुंच सकता है।
राज्यसभा में बहुमत हासिल करना किसी भी सरकार के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे न केवल विधेयकों को पारित कराना आसान हो जाता है, बल्कि नीतिगत फैसलों पर भी सरकार की पकड़ मजबूत होती है। फिलहाल NDA बहुमत से लगभग 20 सीट पीछे है, और इन 37 सीटों के चुनाव उसके लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र और बिहार में भाजपा के हालिया प्रदर्शन ने पार्टी की स्थिति मजबूत की है। इन राज्यों में संख्या बल का सीधा असर राज्यसभा चुनावों पर पड़ता है, क्योंकि विधायक ही उच्च सदन के सदस्यों का चुनाव करते हैं।
एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने कहा,
“राज्यसभा में बहुमत केवल संख्या का खेल नहीं है, यह सरकार की नीति लागू करने की क्षमता से सीधे जुड़ा होता है। इन चुनावों का असर आने वाले कई वर्षों तक दिखेगा।”
दूसरी ओर, विपक्षी INDIA गठबंधन के लिए यह चुनाव अपनी एकजुटता और रणनीतिक समझ को साबित करने का बड़ा मौका है। लोकसभा चुनावों में तालमेल दिखाने के बाद अब राज्यसभा चुनाव विपक्ष के लिए अग्निपरीक्षा माने जा रहे हैं। सीटों के बंटवारे, उम्मीदवार चयन और आपसी समन्वय जैसे मुद्दे विपक्षी दलों के सामने बड़ी चुनौती हैं।
विपक्ष जानता है कि यदि NDA राज्यसभा में बहुमत के करीब पहुंचता है, तो संसदीय प्रतिरोध की उसकी क्षमता सीमित हो सकती है। इसी वजह से INDIA गठबंधन के दल उन राज्यों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, जहां उनके पास संख्या बल या गठबंधन की संभावना मजबूत है।
इन 37 सीटों का चुनाव 10 अलग-अलग राज्यों में होना है, जिनकी राजनीतिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं। कुछ राज्यों में मुकाबला सीधा है, जबकि कुछ जगहों पर गठबंधन की राजनीति निर्णायक भूमिका निभा सकती है। स्थानीय समीकरण, दल-बदल की संभावना और विधायकों की एकजुटता—ये सभी कारक परिणाम को प्रभावित करेंगे।
राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष न हों, लेकिन इनका राजनीतिक संदेश बेहद स्पष्ट होता है। यही कारण है कि सभी दल इन्हें “सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया” नहीं मान रहे।
राज्यसभा को संसद का स्थायी सदन माना जाता है, जहां एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त होते हैं। सरकार के कई अहम विधेयक, विशेषकर आर्थिक और संवैधानिक महत्व वाले कानून, इसी सदन की भूमिका से प्रभावित होते हैं। अतीत में कई बार सरकारों को राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यदि NDA इन चुनावों में मजबूत बढ़त हासिल करता है, तो यह सरकार के लिए नीतिगत स्थिरता का संकेत होगा। वहीं, यदि INDIA गठबंधन अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन करता है, तो यह विपक्ष को नई ऊर्जा और नैरेटिव दे सकता है।
आने वाले हफ्तों में उम्मीदवारों की घोषणा और राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ होंगी। यह साफ है कि 37 राज्यसभा सीटों की यह लड़ाई केवल संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक दिशा तय करने वाला मुकाबला बन चुकी है।
