हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की पंजाब में लगातार बढ़ती राजनीतिक सक्रियता ने आम आदमी पार्टी (AAP) को असहज कर दिया है। सैनी के बार-बार पंजाब दौरे, सार्वजनिक कार्यक्रमों में भागीदारी और सिख समुदाय से संवाद स्थापित करने की कोशिशों को भाजपा की दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इस बढ़ती गतिविधि ने राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी AAP को सतर्क कर दिया है, जो इसे अपने राजनीतिक क्षेत्र में हस्तक्षेप मान रही है।
पिछले कुछ महीनों में नायब सिंह सैनी ने पंजाब के विभिन्न जिलों में धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लिया है। इन दौरों के दौरान उन्होंने कई बार अपनी मातृ जड़ों का उल्लेख करते हुए पंजाब के साथ भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव को रेखांकित किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रणनीति भाजपा के उस प्रयास का हिस्सा है, जिसके तहत पार्टी पंजाब में अपनी पहचान को केवल पारंपरिक हिंदू वोट बैंक तक सीमित न रखते हुए सिख समुदाय तक विस्तार देना चाहती है।
पंजाब लंबे समय से भाजपा के लिए एक चुनौतीपूर्ण राज्य रहा है, जहां क्षेत्रीय और वैकल्पिक राजनीति का प्रभाव अधिक रहा है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व अब उन चेहरों को आगे कर रहा है, जिनकी सामाजिक पृष्ठभूमि और क्षेत्रीय स्वीकार्यता पार्टी के विस्तार में सहायक हो सकती है। नायब सिंह सैनी को इसी दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है, जो उत्तर भारत की राजनीति में ओबीसी समुदाय के बीच भी प्रभाव रखते हैं।
AAP की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि सैनी के दौरे ऐसे समय पर हो रहे हैं, जब पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी धीरे-धीरे तेज हो रही है। पार्टी का मानना है कि भाजपा बाहरी नेतृत्व के माध्यम से पंजाब की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। AAP नेताओं ने इसे राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति बताते हुए सवाल उठाया है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री को पंजाब की राजनीति में इतनी सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
AAP के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “पंजाब के लोग बाहरी राजनीतिक प्रयोगों को समझते हैं। राज्य की समस्याओं का समाधान यहां की जनता और चुनी हुई सरकार ही कर सकती है।” इस तरह के बयानों से स्पष्ट है कि AAP भाजपा की इस रणनीति को सीधे तौर पर चुनौती के रूप में देख रही है।
दूसरी ओर, भाजपा का तर्क है कि नायब सिंह सैनी के पंजाब दौरे केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक संवाद का हिस्सा हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि पंजाब और हरियाणा के बीच ऐतिहासिक, पारिवारिक और आर्थिक संबंध रहे हैं, और इन संबंधों को मजबूत करना किसी भी लोकतांत्रिक राजनीति का स्वाभाविक हिस्सा है।
सैनी स्वयं भी कई मंचों से यह कह चुके हैं कि उनका उद्देश्य पंजाब के लोगों से संवाद स्थापित करना और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “पंजाब और हरियाणा की संस्कृति, परंपराएं और सामाजिक ताने-बाने एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। राजनीति से ऊपर उठकर विकास पर बात होनी चाहिए।” इस बयान को भाजपा समर्थक सकारात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा की यह रणनीति जहां एक ओर AAP को दबाव में ला रही है, वहीं यह जोखिम भरी भी हो सकती है। पंजाब में बाहरी नेतृत्व की सक्रियता को लेकर संवेदनशीलता पहले से मौजूद रही है। ऐसे में भाजपा को संतुलन साधना होगा ताकि उसका संदेश संवाद के रूप में लिया जाए, न कि हस्तक्षेप के तौर पर।
पंजाब की राजनीति फिलहाल बहुकोणीय प्रतिस्पर्धा के दौर से गुजर रही है। AAP सत्ता में है, कांग्रेस विपक्ष में अपनी जगह बनाए हुए है और भाजपा धीरे-धीरे अपने लिए नया राजनीतिक आधार तलाश रही है। नायब सिंह सैनी की पंजाब यात्राएं इसी बदलते राजनीतिक समीकरण का संकेत देती हैं।
जैसे-जैसे चुनावी समय नजदीक आएगा, पंजाब में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी। सैनी की मौजूदगी और भाजपा की रणनीति AAP के लिए एक चुनौती बनकर उभर रही है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि यह राजनीतिक पहल भाजपा के लिए अवसर साबित होती है या पंजाब की जटिल राजनीति में एक सीमित प्रभाव तक ही सिमट कर रह जाती है।
