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हरियाणा कांग्रेस में सद्भाव यात्रा पर मतभेद

In Politics
February 16, 2026
rajneetiguru.com - हरियाणा कांग्रेस में सद्भाव यात्रा से उथल-पुथल। Image Credit – The Indian Express

हरियाणा में कांग्रेस पार्टी इन दिनों एक अनोखे राजनीतिक दौर से गुजर रही है, जहां एक ओर जमीनी स्तर पर सक्रियता और उत्साह देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर पुराने गुटीय मतभेद भी उभरकर सामने आ रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में हैं पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह, जिनकी चार महीने से जारी सद्भाव यात्रा ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

यह पदयात्रा अब तक लगभग 1,800 किलोमीटर का सफर तय कर चुकी है और हरियाणा के कई जिलों व विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरी है। यात्रा का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ना, भाईचारे का संदेश देना और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरना बताया जा रहा है। यह पहल कांग्रेस की हालिया जनसंपर्क रणनीतियों से प्रेरित मानी जा रही है, जिनमें सीधा जनता से संवाद पर जोर दिया गया है।

सद्भाव यात्रा में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सेल्जा, राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला और कई मौजूदा विधायक यात्रा के अलग-अलग चरणों में शामिल हुए। पार्टी के भीतर इसे एक ऐसे मंच के रूप में देखा जा रहा है, जो संगठन को फिर से जमीनी स्तर पर मजबूत कर सकता है।

बृजेंद्र सिंह ने एक सार्वजनिक बातचीत में कहा, “यह यात्रा किसी व्यक्ति या गुट के लिए नहीं, बल्कि समाज में आपसी विश्वास और कांग्रेस संगठन को एकजुट करने के लिए है।” उनके अनुसार, यात्रा का मकसद केवल चुनावी राजनीति नहीं बल्कि सामाजिक सद्भाव और संवाद को आगे बढ़ाना है।

हालांकि, इस पहल को लेकर कांग्रेस के सभी धड़े एकमत नहीं हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और उनके समर्थक इस यात्रा से अब तक औपचारिक दूरी बनाए हुए हैं। हुड्डा खेमे के नेताओं का मानना है कि किसी भी बड़े राजनीतिक अभियान को पार्टी के आधिकारिक ढांचे के तहत चलाया जाना चाहिए।

हुड्डा ने हाल ही में इस संदर्भ में कहा, “कांग्रेस में हर नेता को अपनी बात रखने और कार्यक्रम करने का अधिकार है, लेकिन पार्टी के कार्यक्रम अलग तरीके से तय होते हैं।” उनके इस बयान को यात्रा के प्रति सतर्क समर्थन, लेकिन स्पष्ट प्रतिबद्धता के अभाव के रूप में देखा जा रहा है।

हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों से पार्टी में नेतृत्व और रणनीति को लेकर अलग-अलग विचारधाराएं सक्रिय रही हैं। हुड्डा और सेल्जा खेमों के बीच संतुलन साधना पार्टी नेतृत्व के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में सद्भाव यात्रा ने जहां एक ओर नए समर्थक जोड़े हैं, वहीं इन आंतरिक समीकरणों को भी फिर से उजागर कर दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की यात्राएं संगठनात्मक मजबूती के लिए उपयोगी हो सकती हैं, बशर्ते उन्हें सभी धड़ों का समर्थन मिले। एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार, “यदि पार्टी के भीतर संवाद और समन्वय नहीं बना, तो ऐसे अभियान सकारात्मक होने के बावजूद आंतरिक तनाव बढ़ा सकते हैं।”

यह यात्रा उस राजनीतिक शैली से प्रेरित मानी जा रही है, जिसे कांग्रेस ने हाल के वर्षों में अपनाया है, खासकर राहुल गांधी की जनसंपर्क पहलों के बाद। पैदल यात्राएं अब कांग्रेस की राजनीति में केवल प्रतीकात्मक नहीं रहीं, बल्कि संगठन और जनता के बीच सीधा संबंध बनाने का माध्यम बनती जा रही हैं।

हरियाणा में आने वाले समय में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह इस उत्साह को एकजुट रणनीति में कैसे बदले। सद्भाव यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी के भीतर ऊर्जा की कमी नहीं है, लेकिन उसे सही दिशा देने के लिए नेतृत्व में तालमेल जरूरी है।

फिलहाल, बृजेंद्र सिंह की यात्रा जहां एक ओर कांग्रेस के लिए संभावनाओं के नए दरवाजे खोल रही है, वहीं यह भी दिखा रही है कि हरियाणा कांग्रेस को आंतरिक एकता के मोर्चे पर अभी लंबा रास्ता तय करना है।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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