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हरियाणा कांग्रेस में मतभेद, यूपी में भाजपा का दलित-आदिवासी फोकस

In Politics
February 16, 2026
rajneetiguru.com - हरियाणा कांग्रेस की खींचतान और यूपी में भाजपा की नई रणनीति। Image Credit – The Indian Express

नई दिल्ली/चंडीगढ़ — देश की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), में इस समय संगठनात्मक गतिविधियां और रणनीतिक कवायद तेज़ हो गई हैं। जहां हरियाणा में कांग्रेस एक पूर्व सांसद की पदयात्रा को लेकर उत्साह और आंतरिक मतभेद दोनों का सामना कर रही है, वहीं उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए दलित और आदिवासी समुदायों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए एक विस्तृत सालाना कार्यक्रम तैयार किया है।

हरियाणा में कांग्रेस के पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह द्वारा निकाली जा रही राज्यव्यापी पदयात्रा ने पार्टी में नई हलचल पैदा की है। बीते चार महीनों में लगभग 1,800 किलोमीटर की दूरी तय कर चुकी यह यात्रा सामाजिक सद्भाव, संगठन को मज़बूत करने और जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। कई विधायक और वरिष्ठ नेता यात्रा के विभिन्न चरणों में शामिल हुए हैं, जिससे पार्टी में एक नई ऊर्जा का संकेत मिला है।

हालांकि, इस पहल को लेकर कांग्रेस के भीतर एकरूपता नहीं दिख रही। पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा से जुड़े खेमे ने अब तक इस पदयात्रा से औपचारिक दूरी बनाए रखी है, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सेल्जा और उनके समर्थकों ने इसे सकारात्मक कदम बताया है। यह स्थिति एक बार फिर हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय से चले आ रहे गुटीय समीकरणों को उजागर करती है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यात्रा ने कार्यकर्ताओं में जोश भरा है, लेकिन अगर सभी गुट एक साथ नहीं आए तो इसका राजनीतिक लाभ सीमित रह सकता है।” विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के लिए यह एक अवसर भी है और चुनौती भी—अवसर संगठन को मज़बूत करने का और चुनौती आंतरिक एकता बनाए रखने की।

इसी बीच उत्तर प्रदेश में भाजपा ने सामाजिक समीकरणों को साधने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की अनुसूचित जाति (SC) इकाई ने एक साल लंबा कार्यक्रम तय किया है, जिसके तहत दलित और आदिवासी समुदायों के प्रमुख सामाजिक-राजनीतिक प्रतीकों की जयंती और पुण्यतिथि पर राज्यव्यापी आयोजन किए जाएंगे।

इस कार्यक्रम में डॉ. भीमराव अंबेडकर, कांशीराम और आदिवासी नायक बिरसा मुंडा सहित एक दर्जन से अधिक प्रमुख व्यक्तित्व शामिल हैं। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि इन आयोजनों के माध्यम से पार्टी दलित और आदिवासी समाज के बीच अपनी वैचारिक और राजनीतिक पकड़ को और मज़बूत कर सकती है।

भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल आयोजन करना नहीं, बल्कि इन महापुरुषों के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और समाज के वंचित वर्गों के साथ निरंतर संवाद बनाना है।” यह रणनीति भाजपा के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत वह सामाजिक आधार को और विस्तार देना चाहती है।

उत्तर प्रदेश और हरियाणा, दोनों ही राज्यों में आने वाले वर्षों में राजनीतिक मुकाबला अहम रहने वाला है। हरियाणा में कांग्रेस सत्ता में वापसी की कोशिश में संगठनात्मक मजबूती पर ज़ोर दे रही है, जबकि उत्तर प्रदेश में भाजपा अपने सामाजिक गठजोड़ को और सुदृढ़ करने में जुटी है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, कांग्रेस की पदयात्रा और भाजपा का सामाजिक कैलेंडर दोनों ही इस बात का संकेत हैं कि पार्टियां अब केवल चुनावी भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि लगातार जनसंपर्क और प्रतीकात्मक राजनीति के जरिए अपना आधार मजबूत करना चाहती हैं।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कांग्रेस हरियाणा में अपने आंतरिक मतभेदों को सुलझाकर पदयात्रा से मिले उत्साह को राजनीतिक लाभ में बदल पाती है, और क्या भाजपा उत्तर प्रदेश में अपने दलित-आदिवासी आउटरीच कार्यक्रम के जरिए 2027 के चुनावी समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने में सफल होती है।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
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मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
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