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स्टालिन सरकार ने पोंगल पर दिया ₹3000 नकद उपहार

In Politics
January 04, 2026
RajneetiGuru.com - स्टालिन सरकार ने पोंगल पर दिया ₹3000 नकद उपहार - Image Credited by The Daily Jagran

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने रविवार को राज्य के करोड़ों नागरिकों के लिए फसल उत्सव ‘पोंगल’ के अवसर पर ₹3,000 के नकद उपहार की घोषणा की। यह राज्य के इतिहास में इस त्यौहार के लिए दी जाने वाली अब तक की सबसे बड़ी नकद सहायता है। इस घोषणा से 2.22 करोड़ से अधिक ‘चावल’ श्रेणी के राशन कार्ड धारकों और श्रीलंकाई तमिलों के पुनर्वास शिविरों में रहने वाले परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

यह घोषणा 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले की गई है, जो द्रमुक (DMK) सरकार के “द्रविड़ मॉडल” के तहत जनकल्याणकारी नीतियों को मजबूत करने के इरादे को दर्शाती है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तमिल समाज के सभी वर्गों के लोग इस पारंपरिक उत्सव को धूमधाम से मना सकें।

एक व्यापक उत्सव उपहार पोटली (हैम्पर)

यह नकद उपहार एक बड़ी पोंगल उपहार योजना का हिस्सा है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) आउटलेट के माध्यम से वितरित किए जाने वाले इस पैकेज में निम्नलिखित सामग्री शामिल होगी:

  • ₹3,000 नकद सहायता: प्रत्येक पात्र परिवार को।

  • खाद्य सामग्री: एक किलो कच्चा चावल और एक किलो चीनी।

  • पारंपरिक वस्तुएं: एक पूरा गन्ना, जो पोंगल पूजा का एक अनिवार्य हिस्सा है।

  • वस्त्र: एक धोती और एक साड़ी, जिससे राज्य के बुनकर समुदाय को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है, “पोंगल केवल एक त्यौहार नहीं है, यह तमिल लोगों की पहचान है। यह उपहार राज्य के अपने नागरिकों के प्रति प्रेम और देखभाल का प्रतीक है।”

राजकोषीय प्रभाव और बजट

इस विशाल जनहितैषी पहल का बजट भी उतना ही बड़ा है। राज्य सरकार ने पुष्टि की है कि नकद सहायता और सामग्री हैम्पर के वितरण पर कुल ₹6,936.17 करोड़ का खर्च आएगा। यह राशि राज्य के कल्याणकारी बजट का एक बड़ा हिस्सा है।

वितरण प्रक्रिया जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में शुरू होने की उम्मीद है, ताकि 14 जनवरी को त्यौहार शुरू होने से पहले सभी 2.22 करोड़ लाभार्थियों तक यह सहायता पहुँच सके।

पृष्ठभूमि: पोंगल उपहारों का राजनीतिक इतिहास

तमिलनाडु में पोंगल उपहार देने की परंपरा अब एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परंपरा बन चुकी है। नकद सहायता के इतिहास पर नज़र डालें तो पता चलता है कि राज्य के दो प्रमुख द्रविड़ दलों—द्रमुक और अन्नाद्रमुक—के बीच कल्याणकारी खर्चों को लेकर एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रही है:

  • 2011–2016 (अन्नाद्रमुक): नकद उपहार मात्र ₹100 था।

  • 2016–2021 (अन्नाद्रमुक): इस राशि को बढ़ाकर ₹1,000 कर दिया गया। हालांकि, बीच के कुछ वर्षों में नकद सहायता नहीं दी गई थी।

  • 2021 (अन्नाद्रमुक): पिछले चुनाव वर्ष के दौरान, तत्कालीन मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने इसे बढ़ाकर ₹2,500 कर दिया था, जो उस समय का रिकॉर्ड था।

  • 2026 (द्रमुक): वर्तमान स्टालिन सरकार ने अब इस सीमा को ₹3,000 तक पहुँचा दिया है, जो पिछली उच्चतम राशि से 20% अधिक है।

विशेषज्ञों और हितधारकों की राय

जहाँ लाभार्थियों ने इस घोषणा का स्वागत किया है, वहीं विशेषज्ञों ने इसके समय पर ध्यान आकर्षित किया है। चेन्नई स्थित राजनीतिक विश्लेषक डॉ. एस. रामास्वामी ने कहा:

“तमिलनाडु जैसे राज्य में, जहाँ कल्याणकारी राजनीति की जड़ें बहुत गहरी हैं, ₹3,000 का नकद उपहार सामाजिक पहुँच के लिए एक शक्तिशाली साधन है। यह त्यौहार के समय आम आदमी पर महंगाई के बोझ को कम करता है। हालांकि, विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले इसकी घोषणा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

किसानों ने भी गन्ने को हैम्पर में शामिल करने के फैसले का स्वागत किया है। डेल्टा क्षेत्र के एक किसान के. सेल्लामुथु ने कहा, “सरकार द्वारा सीधे खरीद से हमें अपनी फसल का उचित मूल्य मिलता है और बिचौलियों से बचाव होता है।”

निष्कर्ष

₹3,000 की यह सहायता केवल एक वित्तीय लेनदेन नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु के सामाजिक-राजनीतिक ढांचे का प्रतिबिंब है। श्रीलंकाई तमिलों को इसमें शामिल करके, स्टालिन सरकार ने अपनी समावेशी कल्याण नीति को जारी रखा है। जैसे-जैसे राज्य पोंगल की तैयारियों में जुट गया है, राशन की दुकानें सरकारी सक्रियता का केंद्र बन गई हैं। इस वितरण अभियान की सफलता आगामी चुनावी अभियानों में भी चर्चा का विषय बनेगी।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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