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सेना सम्मान पर सियासी बहस तेज

In Politics
February 06, 2026
rajneetiguru.com - निर्मला सीतारमण का राहुल गांधी पर हमला, सेना सम्मान का मुद्दा। Image Credit – The Indian Express

नई दिल्ली — वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भारतीय सेना और पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के नाम का राजनीतिक रूप से इस्तेमाल कर “मज़ाक उड़ाने” का आरोप लगाया है। एक साक्षात्कार के दौरान सीतारमण ने कहा कि सरकार और देश, दोनों ही सशस्त्र बलों का सम्मान करते हैं, लेकिन सेना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के नामों को राजनीतिक बहस में इस तरह लाना अनुचित है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना की भूमिका और राजनीतिक विमर्श में मर्यादा को लेकर बहस तेज हो गई है।

वित्त मंत्री ने कहा, “हम उन्हें (जनरल नरवणे) पूरा सम्मान देते हैं। लेकिन राहुल गांधी ने उनके नाम और उनके कद का इस्तेमाल मज़ाक उड़ाने के लिए किया।” सीतारमण का यह बयान कांग्रेस द्वारा हाल के दिनों में सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों और सेना से जुड़े मुद्दों पर उठाए गए सवालों की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सशस्त्र बलों को पूरी स्वतंत्रता और भरोसा दिया है। उनके शब्दों में, “प्रधानमंत्री ने सशस्त्र बलों को एक ब्लैंक चेक दिया है। इससे ज़्यादा और क्या कहा जा सकता है?”

सीतारमण ने अपने बयान में ऐतिहासिक संदर्भ का भी उल्लेख किया और कहा कि यह स्थिति वैसी नहीं है जैसी आज़ादी के बाद के शुरुआती वर्षों में थी। उन्होंने कहा, “यह ऐसा नहीं है कि जैसे (पंडित) नेहरू ने कहा हो कि ‘अरुणाचलियों, आप खुद ही अपना ख्याल रखिए।’” इस टिप्पणी को सरकार की मौजूदा सुरक्षा नीति और सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे व सैन्य तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

यह विवाद उस व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा है, जिसमें विपक्ष सरकार पर चीन के साथ सीमा विवाद, सैन्य तैनाती और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाता रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी कई मौकों पर सरकार से यह पूछते रहे हैं कि सीमा पर वास्तविक स्थिति क्या है और क्या भारत की जमीन पर किसी तरह का अतिक्रमण हुआ है। भाजपा और सरकार इन आरोपों को सिरे से खारिज करती रही हैं और कहती रही हैं कि सेना पूरी तरह सक्षम और सशक्त है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे भारत में बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में इन विषयों पर बयानबाज़ी अक्सर तीखी प्रतिक्रिया को जन्म देती है। एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार, “भारतीय राजनीति में सेना को आम तौर पर दलगत राजनीति से ऊपर रखा जाता है। जब किसी बयान को यह महसूस कराया जाता है कि सेना या उसके वरिष्ठ अधिकारियों का अपमान हुआ है, तो उसका असर राजनीतिक बहस से कहीं आगे तक जाता है।”

पृष्ठभूमि में देखें तो जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारत के थलसेना प्रमुख के रूप में सेवा दी थी। उनके कार्यकाल के दौरान भारत-चीन सीमा पर तनाव, विशेषकर पूर्वी लद्दाख में स्थिति, राष्ट्रीय चर्चा का बड़ा विषय रही। इसी दौर में सेना की तैयारियों, आधुनिकीकरण और राजनीतिक नेतृत्व के साथ उसके संबंधों पर भी लगातार बहस होती रही।

भाजपा नेताओं ने सीतारमण के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि विपक्ष को सेना से जुड़े मुद्दों पर अधिक जिम्मेदारी से बोलना चाहिए। उनका कहना है कि सेना का मनोबल बनाए रखना हर राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है। वहीं कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है और सरकार को आलोचना को व्यक्तिगत या अपमानजनक बताकर टालना नहीं चाहिए।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब देश में आम चुनावों का माहौल धीरे-धीरे बन रहा है और राष्ट्रीय सुरक्षा एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस तरह की बयानबाज़ी और तेज हो सकती है, क्योंकि दोनों प्रमुख दल अपने-अपने नैरेटिव को मजबूत करने की कोशिश करेंगे।

कुल मिलाकर, निर्मला सीतारमण का बयान न केवल राहुल गांधी पर सीधा राजनीतिक हमला है, बल्कि यह सरकार की उस रणनीति को भी रेखांकित करता है, जिसके तहत वह खुद को सेना के सम्मान और समर्थन के साथ खड़ा दिखाना चाहती है। वहीं विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जवाबदेही के सवाल से जोड़कर देख रहा है। आने वाले दिनों में यह बहस किस दिशा में जाती है, यह राजनीतिक परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
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