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सीतारमण का कांग्रेस पर हमला: 2013 में WTO के सामने PDS का ‘समर्पण’ किया

In Politics
February 10, 2026
RajneetiGuru.com - सीतारमण का कांग्रेस पर हमला 2013 में WTO के सामने PDS का 'समर्पण' किया - Image Credited by Hinditan Times

नई दिल्लीकेंद्रीय बजट 2026-27 पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि 2013 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सामने भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का “समर्पण” कर दिया था। वित्त मंत्री की यह टिप्पणी लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी के उस आरोप के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते ने 1.4 अरब भारतीयों के भविष्य को “गिरवी” रख दिया है।

बुधवार को लोकसभा में बोलते हुए सीतारमण ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “हमेशा भारत के हित में काम करेंगे।” उन्होंने इसकी तुलना 2013 के बाली मंत्रिस्तरीय सम्मेलन से की, जहाँ उनके अनुसार, कांग्रेस ने गरीब और किसानों के हितों को अंतरराष्ट्रीय कानूनी चुनौतियों के सामने असुरक्षित छोड़ दिया था।

2013 का बाली समझौता: विवाद की जड़

वित्त मंत्री के तर्क का मुख्य आधार दिसंबर 2013 में बाली में आयोजित नौवां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC9) है। उस समय, भारत ने एक अंतरिम “पीस क्लॉज” (शांति खंड) पर सहमति व्यक्त की थी। यह क्लॉज उन विकासशील देशों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता था जिनकी खाद्य सब्सिडी 1986-88 की कीमतों के आधार पर WTO की 10% की सीमा से अधिक हो जाती थी।

हालांकि, 2013 के समझौते में यह शर्त थी कि यह सुरक्षा केवल अस्थायी थी और 2017 (MC11) तक समाप्त हो जाएगी। सीतारमण ने तर्क दिया कि बिना किसी स्थायी समाधान की गारंटी के एक निश्चित समाप्ति तिथि पर सहमत होकर कांग्रेस ने देश के संप्रभु हितों के साथ समझौता किया था।

उन्होंने सदन को बताया, “यह मोदी सरकार थी जिसने 2014 में हस्तक्षेप किया और भारत के संप्रभु नीतिगत स्थान को बहाल किया।” उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे 2014 में वाणिज्य मंत्री के रूप में उन्होंने ‘पीस क्लॉज’ को स्थायी बनाने की मांग की। “यदि ऐसा नहीं होता, तो 2017 से हम सार्वजनिक वितरण के तहत अपने गरीबों को राशन देने की स्थिति में नहीं होते,” उन्होंने कहा।

वैश्विक अस्थिरता के खिलाफ बजटीय ढाल

वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट 2026-27 में उन रणनीतिक आवंटनों पर भी प्रकाश डाला, जो ऊर्जा, तकनीक और वित्त के वैश्विक “हथियारीकरण” (weaponization) से भारत की रक्षा करने के लिए किए गए हैं।

मुख्य आवंटन निम्नलिखित हैं:

  • आर्थिक स्थिरता कोष: वैश्विक भू-राजनीति से उत्पन्न अप्रत्याशित खर्चों को पूरा करने के लिए ₹50,000 करोड़ का कोष।

  • तकनीक और वित्त सुरक्षा: तकनीकी और वित्तीय प्रणालियों के दुरुपयोग का मुकाबला करने के लिए ₹9,800 करोड़ का बजट।

  • इंडिया एआई मिशन: घरेलू डेटा सेंटरों को प्रोत्साहित करने के लिए ₹1,000 करोड़ का आवंटन।

  • खाद्य सब्सिडी: 80 करोड़ नागरिकों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु ₹2.27 लाख करोड़ का विशाल आवंटन।

राहुल गांधी की डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताओं को खारिज करते हुए सीतारमण ने कहा, “हम भारत में क्लाउड और डेटा सेंटर स्थापित करने को प्रोत्साहित कर रहे हैं ताकि डेटा यहीं रहे और हमारे युवाओं को रोजगार मिले।”

राजनीतिक तीखी प्रतिक्रिया: शर्म-अल-शेख से ‘बिकाऊ’ राष्ट्र तक

चर्चा ने तब राजनीतिक मोड़ ले लिया जब सीतारमण ने 2009 के शर्म-अल-शेख संयुक्त बयान का जिक्र किया। उन्होंने यूपीए पर “भारत को पाकिस्तान के साथ जोड़ने” और आतंक पर कार्रवाई को बातचीत से अलग करने का आरोप लगाया।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जो लोग शर्म-अल-शेख में पाकिस्तान के साथ बातचीत करना चाहते थे, वे अब हमें बातचीत पर सुझाव दे रहे हैं।” उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के उस बयान को दोहराया कि “आज तक ऐसा कोई व्यक्ति पैदा नहीं हुआ जो भारत को बेच सके।”

2026-27 का व्यापक आर्थिक खाका

देश की वित्तीय स्थिति का विवरण देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि 2026-27 के लिए कुल व्यय ₹53.47 लाख करोड़ अनुमानित है।

  • पूंजीगत व्यय (CapEx): ₹12.22 लाख करोड़ तय किया गया है, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमानों से 11.5% अधिक है।

  • प्रभावी CapEx: राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए ₹2 लाख करोड़ के ब्याज मुक्त ऋण (SASCI) को शामिल करने के बाद यह ₹17.1 लाख करोड़ (जीडीपी का 4.4%) तक पहुँच जाता है।

विशेषज्ञ विश्लेषण: पीस क्लॉज का महत्व

व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि ‘पीस क्लॉज’ वास्तव में भारत के एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) कार्यक्रम की जीवनरेखा है। 2014 के अंत में सुरक्षित किए गए इस क्लॉज के बिना, अमेरिका और ब्राजील जैसे अनाज निर्यातक देश भारत की खरीद प्रणाली को WTO के विवाद निपटान निकाय में घसीट सकते थे।

आईसीआरआईईआर (ICRIER) की प्रोफेसर डॉ. अर्पिता मुखर्जी के अनुसार, “निश्चित अवधि वाले पीस क्लॉज से अनिश्चितकालीन क्लॉज की ओर बढ़ना भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत थी। इसने भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिबंधों के तत्काल खतरे के बिना अपने खाद्य सुरक्षा कानून का विस्तार करने की अनुमति दी।”

निष्कर्ष

विपक्ष के विरोध के बीच जब लोकसभा ने बजट के संबंधित हिस्सों को पारित किया, तो वित्त मंत्री के हस्तक्षेप ने सरकार के उस नैरेटिव को स्पष्ट किया कि भारत “रक्षात्मक” व्यापार मुद्रा से निकलकर “रणनीतिक मुखरता” की ओर बढ़ गया है। आज के व्यापारिक समझौतों को PDS के अस्तित्व से जोड़कर, सीतारमण ने मोदी सरकार को भारत की आर्थिक और खाद्य संप्रभुता के अंतिम रक्षक के रूप में पेश करने की कोशिश की है।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।

    अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

    उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है।
    उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।

    राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —

    स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,

    ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,

    जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,

    रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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