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सम्मान अपराधों पर सिद्धारमैया सरकार का सख्त कानून

In Politics
January 22, 2026
rajneetiguru.com - कर्नाटक में ऑनर किलिंग पर सख्त कानून | सिद्धारमैया सरकार। Image Credit – The Indian Express

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने तथाकथित ‘सम्मान’ और ‘परंपरा’ के नाम पर होने वाले अपराधों पर कड़ा प्रहार करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। सिद्धारमैया सरकार द्वारा प्रस्तावित “कर्नाटक स्वतंत्र विवाह चयन एवं सम्मान व परंपरा के नाम पर अपराधों की रोकथाम और निषेध विधेयक, 2026” न केवल ऑनर किलिंग के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करता है, बल्कि अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह करने वाले जोड़ों की सुरक्षा और पुनर्वास को भी कानूनी दायरे में लाता है।

यह विधेयक ऐसे समय लाया गया है जब राज्य में एक लिंगायत महिला की उसके पिता द्वारा हत्या ने समाज को झकझोर दिया। महिला ने एक दलित युवक से विवाह किया था, जिसे परिवार ने ‘इज्जत के खिलाफ’ मानते हुए घातक कदम उठाया। इस घटना के बाद राज्य सरकार पर कड़े कानून की मांग तेज हो गई थी।

प्रस्तावित विधेयक के तहत सम्मान हत्या के दोषियों को न्यूनतम पांच वर्ष की जेल, आर्थिक दंड और पीड़ित परिवार को मुआवजे का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, जो लोग विवाह करने वाले जोड़ों को धमकाते हैं, सामाजिक बहिष्कार करते हैं या हिंसा के लिए उकसाते हैं, उन्हें भी अपराधी माना जाएगा। यह कानून केवल हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक उत्पीड़न, जबरन अलगाव और हिंसा की साजिश को भी दंडनीय बनाता है।

सरकार ने अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों के लिए सरकारी आश्रय गृह (शेल्टर होम), कानूनी सहायता, पुलिस सुरक्षा और काउंसलिंग जैसी व्यवस्थाओं का भी प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बालिग जोड़े बिना किसी डर के अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग कर सकें।

कानून मंत्री के करीबी एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “यह विधेयक समाज को स्पष्ट संदेश देता है कि किसी की जान लेने या हिंसा करने को परंपरा के नाम पर正 नहीं ठहराया जा सकता।” वहीं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा, “विवाह दो बालिगों का निजी फैसला है। राज्य की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों की जान और स्वतंत्रता की रक्षा करे, चाहे सामाजिक दबाव कितना भी क्यों न हो।”

भारत में ऑनर किलिंग की समस्या नई नहीं है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, हर साल ऐसे कई मामले सामने आते हैं, हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है क्योंकि अनेक घटनाएं रिपोर्ट ही नहीं होतीं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जाति व्यवस्था, पितृसत्ता और सामाजिक नियंत्रण की मानसिकता इन अपराधों की जड़ में है।

कर्नाटक सरकार का यह कदम ऐसे राज्यों के प्रयासों की कड़ी में देखा जा रहा है, जहां सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद ऑनर किलिंग के खिलाफ विशेष उपाय किए गए हैं। वर्ष 2018 में शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा था कि दो बालिगों के विवाह में हस्तक्षेप संविधान का उल्लंघन है और राज्यों को निवारक कदम उठाने चाहिए।

हालांकि, इस विधेयक पर कुछ वर्गों ने चिंता भी जताई है। आलोचकों का कहना है कि कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के बिना इसका उद्देश्य पूरा नहीं होगा। वहीं सरकार का दावा है कि पुलिस और प्रशासन को विशेष दिशा-निर्देश दिए जाएंगे ताकि पीड़ितों को समय पर सुरक्षा मिल सके।

कुल मिलाकर, सिद्धारमैया सरकार का यह प्रस्तावित कानून न केवल दंडात्मक है, बल्कि सामाजिक सुधार और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि यह विधेयक विधानसभा से पारित होने के बाद ज़मीन पर कितना असर दिखा पाता है।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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