बिहार में अगले मुख्यमंत्री के चयन को लेकर मची गहमागहमी के बीच, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के केंद्रीय नेतृत्व ने चयन प्रक्रिया को तेज कर दिया है। रविवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पार्टी का केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। यह निर्णय 15 अप्रैल को पटना में होने वाले संभावित शपथ ग्रहण समारोह से ठीक तीन दिन पहले लिया गया है।
बीजेपी कोटे से नया मुख्यमंत्री बनाने का यह कदम निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद उठाया गया है। कुमार ने 10 अप्रैल को उच्च सदन के सदस्य के रूप में शपथ ली, जिससे बिहार में नई सरकार के गठन की राह साफ हो गई।
नेतृत्व की दौड़ में प्रमुख नाम
मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम सामने आ रहे हैं, जिनमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सबसे आगे बताए जा रहे हैं। चौधरी के पास गृह विभाग संभालने का प्रशासनिक अनुभव है और वे राज्य के प्रभावशाली कुशवाहा (कोइरी) समुदाय से आते हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बीजेपी एक ऐसे उम्मीदवार को अंतिम रूप देना चाहती है जो न केवल पार्टी की विचारधारा के अनुरूप हो, बल्कि अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का भी प्रतिनिधित्व करता हो। सम्राट चौधरी इस मापदंड में पूरी तरह फिट बैठते हैं। उनके अलावा जमुई की विधायक श्रेयसी सिंह और संजीव चौरसिया के नामों पर भी चर्चा जारी है।
महत्वपूर्ण मोड़ पर बिहार की राजनीति
शिवराज सिंह चौहान 14 अप्रैल को पटना पहुंचेंगे, जहां वे बीजेपी विधायक दल की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसके बाद एनडीए (NDA) के घटक दलों के साथ विचार-विमर्श कर नए नेता के नाम की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
जेडीयू (JD-U) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा:
“2025-30 का जनादेश एनडीए को नीतीश कुमार के नेतृत्व में मिला था। नई सरकार नीतीश जी के मार्गदर्शन में काम करना जारी रखेगी और उनके विकास कार्यों को आगे बढ़ाएगी।”
मुख्यमंत्री के रूप में बीजेपी के पहले नेता का चुनाव बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा, जो पिछले दो दशकों से नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूमती रही है।
