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वित्त आयोग प्रस्ताव पर हिमाचल में सियासी टकराव

In Politics
February 11, 2026
rajneetiguru.com - 16वें वित्त आयोग प्रस्ताव पर हिमाचल सरकार बनाम बीजेपी। Image Credit – The Indian Express

हिमाचल प्रदेश में 16वें वित्त आयोग से जुड़े प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया है। राज्य की कांग्रेस सरकार जहां इस प्रस्ताव को हिमाचल की वित्तीय सेहत के लिए गंभीर खतरा बता रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इसे लेकर रक्षात्मक मुद्रा में नजर आ रही है। प्रस्तावित बदलावों को लेकर राज्य के राजस्व और वित्त विभाग के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र से मिलने वाले हिस्से में कटौती होती है, तो इसका सीधा असर कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए), लंबित एरियर और बिजली, खाद्य एवं पानी जैसी आवश्यक सेवाओं पर दी जाने वाली सब्सिडी पर पड़ सकता है।

16वां वित्त आयोग, केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के बंटवारे के लिए सिफारिशें करता है। हर पांच साल में गठित होने वाला यह आयोग राज्यों की आर्थिक स्थिति, जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों और विकास जरूरतों को ध्यान में रखकर अपना फार्मूला तय करता है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य लंबे समय से विशेष भौगोलिक चुनौतियों और सीमित राजस्व स्रोतों के आधार पर विशेष सहायता की मांग करते रहे हैं। राज्य सरकार का कहना है कि नए प्रस्ताव में इन कारकों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया, जिससे हिमाचल को नुकसान हो सकता है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “यदि वित्त आयोग की सिफारिशें पहाड़ी राज्यों की वास्तविक जरूरतों को नजरअंदाज करती हैं, तो इसका असर सीधे आम लोगों और कर्मचारियों पर पड़ेगा।” उनका तर्क है कि राज्य पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं, सीमित औद्योगिक आधार और बढ़ते सामाजिक खर्चों से जूझ रहा है। ऐसे में केंद्रीय करों में हिस्सेदारी घटने से वित्तीय संतुलन बिगड़ सकता है।

राज्य के वरिष्ठ वित्त अधिकारियों के अनुसार, संभावित कटौती का सबसे पहले असर सरकारी कर्मचारियों पर पड़ सकता है। डीए में देरी, एरियर का भुगतान रुकना और सामाजिक कल्याण योजनाओं के बजट में कटौती जैसे कदम मजबूरी बन सकते हैं। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “राज्य के पास संसाधन सीमित हैं। यदि केंद्रीय हस्तांतरण घटता है, तो प्राथमिकताओं को दोबारा तय करना पड़ेगा, जो आसान नहीं होगा।”

बीजेपी ने कांग्रेस सरकार के आरोपों को राजनीतिक बताते हुए कहा है कि वित्त आयोग की प्रक्रिया अभी अंतिम चरण में नहीं है और राज्य सरकार बेवजह डर का माहौल बना रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार ने हमेशा हिमाचल के हितों का ध्यान रखा है और किसी भी अंतिम सिफारिश से पहले सभी राज्यों की राय ली जाएगी। हालांकि, बीजेपी पर यह दबाव भी है कि वह अपने केंद्रीय नेतृत्व के जरिए राज्य के हितों को स्पष्ट रूप से आगे बढ़ाए।

हिमाचल की राजनीति में यह मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि राज्य की अर्थव्यवस्था काफी हद तक केंद्र से मिलने वाली सहायता पर निर्भर करती है। पहाड़ी इलाकों में बुनियादी ढांचा विकसित करने की लागत अधिक होती है, जबकि राजस्व के पारंपरिक स्रोत सीमित हैं। बिजली सब्सिडी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और पेयजल योजनाएं राज्य की सामाजिक स्थिरता का अहम हिस्सा रही हैं। इनमें किसी भी तरह की कटौती का सीधा असर आम जनता पर पड़ सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 16वें वित्त आयोग का प्रस्ताव आने वाले महीनों में हिमाचल की सियासत का बड़ा मुद्दा बन सकता है। कांग्रेस इसे “राज्य के अधिकारों” से जोड़कर केंद्र के खिलाफ राजनीतिक मोर्चाबंदी में बदल सकती है, जबकि बीजेपी के लिए संतुलन साधना चुनौतीपूर्ण होगा—उसे एक ओर केंद्र का बचाव करना है और दूसरी ओर राज्य के हितों की चिंता भी दिखानी है। शिमला स्थित एक राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार, “यह मुद्दा केवल वित्तीय नहीं, बल्कि संघीय ढांचे और राज्यों की स्वायत्तता से भी जुड़ा है।”

फिलहाल, राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह वित्त आयोग के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष रखेगी और अन्य पहाड़ी राज्यों से भी समर्थन जुटाने की कोशिश करेगी। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या वास्तव में केंद्र–राज्य संबंधों में एक नए टकराव की जमीन तैयार करता है।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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