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विजय का पलटवार: टीवीके प्रमुख ने फूँका चुनावी बिगुल

In Politics
January 25, 2026
RajneetiGuru.com - विजय का पलटवार टीवीके प्रमुख ने फूँका चुनावी बिगुल -AI Generated Image

एक बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए, अभिनेता से राजनेता बने विजय ने रविवार को अपनी चुप्पी तोड़ी और तमिलनाडु की स्थापित राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ “लोकतांत्रिक युद्ध” की घोषणा की। मामल्लपुरम में तमिलनाडु वेत्री कड़गम (TVK) की एक उच्च-स्तरीय रणनीति बैठक को संबोधित करते हुए, विजय ने स्पष्ट किया कि कोई भी दबाव—चाहे वह कानूनी हो या फिल्म से संबंधित—उन्हें झुकने पर मजबूर नहीं कर सकता। उनकी यह टिप्पणी करूर भगदड़ मामले में सीबीआई (CBI) की पूछताछ और उनकी आगामी फिल्म ‘जन नायगन’ की रिलीज पर लगी रोक के बीच आई है।

लगभग 3,000 राज्य और जिला स्तरीय पदाधिकारियों की इस सभा ने टीवीके के लिए एक “शक्ति प्रदर्शन” के रूप में काम किया। विजय ने इस मंच का उपयोग एक अभिनेता के बजाय 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए एक गंभीर दावेदार के रूप में खुद को पेश करने के लिए किया।

“लोकतांत्रिक युद्ध”: 2026 की जंग का खाका

उत्साहित भीड़ के सामने खड़े होकर विजय ने खुद को एक फिल्मी सितारे के रूप में नहीं, बल्कि एक जमीनी सेना का नेतृत्व करने वाले जनरल के रूप में पेश किया। उन्होंने गरजते हुए कहा, “यह केवल एक चुनाव नहीं है; यह एक लोकतांत्रिक युद्ध है। आप मेरे कमांडो हैं जो इस युद्ध को लड़ेंगे। हम यहाँ लोगों को बचाने और इस मिट्टी की रक्षा उन लोगों से करने के लिए हैं जो इसे नुकसान पहुँचाना चाहते हैं।”

टीवीके प्रमुख का हमला विशेष रूप से राज्य की दो बड़ी द्रविड़ पार्टियों—सत्ताधारी द्रमुक (DMK) और विपक्षी अन्नाद्रमुक (AIADMK) पर था। उन्होंने दोनों दलों पर सी.एन. अन्नादुरई के आदर्शों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। विजय ने आरोप लगाया कि उनके शासन में मतदान केंद्र “फर्जी वोट केंद्रों” में बदल गए हैं।

सीबीआई जांच और फिल्म विवाद

यह बैठक विजय के लिए व्यक्तिगत और व्यावसायिक बाधाओं के बीच हुई। कुछ ही दिन पहले, नई दिल्ली में सीबीआई ने उनसे करूर भगदड़ को लेकर दो दौर की पूछताछ की थी। यह घटना सितंबर 2025 में हुई थी जब एक रैली के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की जान चली गई थी। जहाँ विजय ने इस त्रासदी के लिए पुलिस की विफलता को जिम्मेदार ठहराया है, वहीं सीबीआई का ध्यान पार्टी के कुप्रबंधन और विजय के आगमन में सात घंटे की देरी पर है।

साथ ही, उनकी आखिरी फिल्म ‘जन नायगन’ सेंसर बोर्ड और कानूनी विवादों में फंसी हुई है। समर्थकों ने इसे विजय के राजनीतिक उदय को रोकने की साजिश बताया है। विजय ने सीधे तौर पर कहा, “क्या यह चेहरा दबाव में झुकने वाला लगता है? हम किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। मेरी राजनीति किसी के लिए समझौता नहीं करेगी।”

द्रविड़ राजनीति के ‘स्टेटस क्वो’ पर हमला

विजय ने द्रमुक को “अधर्म की शक्ति” (evil force) और अन्नाद्रमुक को “भ्रष्ट शक्ति” (corrupt force) करार दिया। उन्होंने खुद को एक साफ-सुथरे विकल्प के रूप में पेश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्नाद्रमुक ने सीधे तौर पर भाजपा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है और द्रमुक ने परोक्ष रूप से।

सेन्कोट्टयन का जोरदार समर्थन

बैठक में वरिष्ठ नेता सेन्कोट्टयन ने विजय को तमिलनाडु का “भावी मुख्यमंत्री” बताया। उन्होंने कहा कि विजय ने जनता की सेवा के लिए “हजार करोड़ रुपये” के फिल्मी करियर का त्याग किया है। मंच पर विजय ने अपनी पार्टी का प्रतीक चिन्ह—सीटी (Whistle)—भी जारी किया और उसे बजाकर कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन किया।

सेन्कोट्टयन ने सीटी के प्रतीक का उपयोग करते हुए कार्यकर्ताओं को आगाह किया: “सोते हुए व्यक्ति के कान में सीटी मत बजाओ, वरना वोट खो जाएगा। सावधानी से और बुद्धिमानी से इस प्रतीक का उपयोग करें।”

टीवीके का बढ़ता कदम

तमिलनाडु वेत्री कड़गम का गठन फरवरी 2024 में हुआ था। विजय अब एमजीआर और जयललिता की तरह फिल्मी लोकप्रियता को चुनावी सफलता में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, 2026 के चुनावों से पहले, उनके सामने दोहरी चुनौती है: एक तरफ सीबीआई जांच का कानूनी पेच और दूसरी तरफ द्रमुक की मजबूत मशीनरी का मुकाबला करने के लिए एक मजबूत संगठन खड़ा करना।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।

    अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

    उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है।
    उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।

    राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —

    स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,

    ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,

    जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,

    रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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