महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ पर, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे और शिव सेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को ‘सामना’ में प्रकाशित एक संयुक्त साक्षात्कार में “मराठी मानुस” को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुंबई की पहचान को कमजोर करने और अंततः इसे महाराष्ट्र से अलग करने का सुनियोजित प्रयास कर रही है।
राज्यसभा सदस्य संजय राउत और फिल्म निर्देशक महेश मांजरेकर द्वारा लिए गए इस साक्षात्कार ने 15 जनवरी को होने वाले बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। लगभग दो दशक पुरानी प्रतिद्वंद्विता को खत्म कर गठबंधन करने वाले ठाकरे भाइयों ने दावा किया कि उनका साथ आना व्यक्तिगत अस्तित्व के लिए नहीं, बल्कि राज्य में “मराठी अस्मिता” की रक्षा के लिए है।
मुंबई को अलग करने की साजिश और ऐतिहासिक संदर्भ
राज ठाकरे ने केंद्र और राज्य की भाजपा नीत सरकारों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान राजनीतिक माहौल 1950 के दशक के ‘संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन’ की याद दिलाता है, जब मुंबई को महाराष्ट्र का हिस्सा बनाए रखने के लिए बड़ा संघर्ष करना पड़ा था।
राज ठाकरे ने कहा, “जो लोग मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करना चाहते हैं, वे दिल्ली और मुंबई दोनों जगह सत्ता में हैं।” उन्होंने तर्क दिया कि यदि भाजपा मुंबई, पुणे, ठाणे, नासिक और छत्रपति संभाजीनगर जैसे प्रमुख नगर निगमों पर नियंत्रण कर लेती है, तो स्थानीय मराठी आबादी अपनी ही जमीन पर “शक्तिहीन” हो जाएगी।
मनसे प्रमुख ने जोर देकर कहा कि बाहरी राज्यों से आने वाले लोग अब केवल आजीविका के लिए नहीं आ रहे हैं, बल्कि वे अपने “स्वयं के निर्वाचन क्षेत्र” बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह एक पुराना घाव है जिसे फिर से हरा किया जा रहा है। इस अतिक्रमण पर सीमाएं तय करने के लिए नागरिक निकायों पर नियंत्रण आवश्यक है।”
नियोजन रहित विकास: उद्धव ठाकरे का प्रहार
राज ठाकरे की सांस्कृतिक चिंताओं के साथ सुर मिलाते हुए, उद्धव ठाकरे ने वर्तमान प्रशासन की प्रशासनिक विफलताओं पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने सरकार के बुनियादी ढांचे के विस्तार को “बिना नियोजन का विकास” करार दिया और आरोप लगाया कि यह प्रगति के बजाय विनाश की ओर ले जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, “सरकार को पता ही नहीं है कि उसे क्या चाहिए। वे विकास का दावा करते हैं, लेकिन वास्तव में वे केवल ‘ठेकेदारों’ के लिए काम करते हैं।” उन्होंने अफसोस जताया कि सत्ता में बैठे कई नेता मराठी होने के बावजूद मुंबई के लोगों की भावनाओं से कोई सरोकार नहीं रखते और केवल बाहरी हितों के लिए काम कर रहे हैं।
नशीली दवाओं का खतरा और शासन पर सवाल
साक्षात्कार में राज्य में बढ़ते ड्रग्स के मुद्दे पर भी चर्चा की गई। राज ठाकरे ने राजनीति में धन के उपयोग और नशीली दवाओं के व्यापार के बीच सांठगांठ की जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि नशीली दवाओं के तस्करों पर राज्य सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है और छापेमारी की कार्रवाई भी धीमी पड़ गई है।
उन्होंने कहा, “ड्रग्स की आसानी से उपलब्धता डरावनी है। हमें राजनीति में पैसे के इस्तेमाल को इस खतरे से जोड़कर देखना होगा ताकि समस्या की गहराई समझ में आए।”
निष्कर्ष: बीएमसी चुनाव और मराठी गौरव का दांव
29 नगर निगमों के आगामी चुनावों को “मिनी-विधानसभा” चुनाव के रूप में देखा जा रहा है। ₹50,000 करोड़ से अधिक के बजट वाली बीएमसी (BMC) इस लड़ाई का सबसे बड़ा पुरस्कार है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ठाकरे भाइयों के लिए ‘मराठी गौरव’ का मुद्दा मतदाताओं को एकजुट करने का सबसे बड़ा हथियार है।
भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “भावनात्मक ब्लैकमेल” करार दिया है और कहा है कि मुंबई को अलग करने की कोई योजना नहीं है। 15 जनवरी के नजदीक आने के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति में यह जुबानी जंग और तेज होने की उम्मीद है।
