हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा के चुनावी हलफनामे ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है। हलफनामे में दिए गए विवरण के अनुसार, पिछले दो वर्षों में उन्हें हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) से कांगड़ा जिले में लगभग 16 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों के ठेके प्राप्त हुए हैं।
अनुराग शर्मा ने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, उम्मीदवारों को अपनी संपत्ति, आय के स्रोत और व्यावसायिक गतिविधियों का विवरण हलफनामे में देना होता है। इसी प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत दस्तावेजों में उनके व्यवसाय और सरकारी ठेकों से जुड़े विवरण सामने आए हैं।
हलफनामे के अनुसार, सितंबर 2024 से फरवरी 2026 के बीच शर्मा को लगभग 15.98 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों के ठेके मिले। इन परियोजनाओं में सड़क निर्माण, पुल निर्माण और अन्य बुनियादी ढांचा विकास से जुड़े कार्य शामिल हैं।
दस्तावेजों के अनुसार, फरवरी 2026 में ही उन्हें दो प्रमुख परियोजनाओं के लिए ठेके प्रदान किए गए थे। इनमें एक परियोजना प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्र में रिटेनिंग वॉल के निर्माण से जुड़ी थी, जबकि दूसरी परियोजना लगभग 85 मीटर लंबे मोटरेबल पुल के निर्माण की थी। इन दोनों परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 12 करोड़ रुपये बताई गई है।
चुनावी हलफनामे में यह भी उल्लेख है कि अनुराग शर्मा पेशे से सरकारी ठेकेदार और परिवहन व्यवसायी हैं। उन्होंने अपने व्यावसायिक अनुभव के बारे में बताते हुए कहा कि वह लंबे समय से निर्माण क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। शर्मा ने कहा, “मैं 2003 से ठेकेदारी के व्यवसाय में हूं। मेरे परिवार के सदस्य भी इसी क्षेत्र में काम करते रहे हैं। जो भी ठेके मिले हैं, वे निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत प्राप्त हुए हैं और सभी परियोजनाएं नियमानुसार पूरी की गई हैं।”
अनुराग शर्मा कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी हैं और पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने उन्हें राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाकर संगठन से जुड़े स्थानीय नेता को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ठेकेदारी एक वैध व्यवसाय है और इसे लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अनुराग शर्मा एक स्वनिर्मित व्यक्ति हैं और लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं।
हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की यह सीट मौजूदा सांसद का कार्यकाल समाप्त होने के कारण खाली हो रही है। राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान मार्च में प्रस्तावित है। राज्य विधानसभा में कांग्रेस के पास बहुमत होने के कारण पार्टी उम्मीदवार के चुने जाने की संभावना मजबूत मानी जा रही है।
पिछले वर्ष हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान हिमाचल प्रदेश की राजनीति में क्रॉस-वोटिंग को लेकर काफी विवाद हुआ था, जिसके कारण चुनाव परिणाम अप्रत्याशित रहे थे। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार राजनीतिक दलों ने उम्मीदवार चयन में संगठनात्मक मजबूती और स्थानीय प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देने की रणनीति अपनाई है।
हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क और पुल निर्माण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण परिवहन नेटवर्क को मजबूत करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। लोक निर्माण विभाग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि राज्य के अधिकांश बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाएं इसी विभाग के माध्यम से संचालित होती हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हलफनामे में सामने आए विवरणों ने उम्मीदवार की पेशेवर पृष्ठभूमि को स्पष्ट किया है। हालांकि, राज्यसभा चुनाव का अंतिम परिणाम विधानसभा में मौजूद राजनीतिक समीकरणों और दलों की रणनीति पर निर्भर करेगा।
