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यूपी में ब्राह्मण राजनीति फिर गरमाई

In Politics
February 20, 2026
rajneetiguru.com - यूपी में ब्राह्मण राजनीति गरम, डिप्टी सीएम का समर्थन। Image Credit – The Indian Express

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दे केंद्र में आ गए हैं। हालिया घटनाक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा संत स्वामी प्रसाद सरस्वती की उस मांग का समर्थन किया गया है, जिसमें कथित रूप से दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही गई है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में सामाजिक समीकरणों और सत्ता संतुलन को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

स्वामी सरस्वती ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से यह आरोप लगाया था कि एक विशेष घटना में ब्राह्मण समाज के साथ अन्याय हुआ है और इसमें प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही या पक्षपात देखने को मिला। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए इसे केवल एक व्यक्ति या घटना का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान और न्याय से जुड़ा विषय बताया।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इस मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार किसी भी समुदाय के साथ अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई तय है।

“कानून सभी के लिए समान है। यदि किसी अधिकारी ने अपने दायित्वों का सही ढंग से पालन नहीं किया है, तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे,”
पाठक ने कहा।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब भाजपा के भीतर भी सामाजिक संतुलन और विभिन्न वर्गों के समर्थन को लेकर मंथन चल रहा है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समाज की भूमिका ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रही है। लंबे समय तक सत्ता और प्रशासन में इस वर्ग की मजबूत उपस्थिति रही है। हालांकि बीते वर्षों में जातीय राजनीति के समीकरण बदले हैं, लेकिन ब्राह्मण मतदाता अब भी राजनीतिक दलों के लिए अहम माने जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के लोकसभा और आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा सहित अन्य दल सामाजिक संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। ब्रजेश पाठक का बयान इसी रणनीति के तहत देखा जा रहा है, जिसमें सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह सभी वर्गों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्षी दलों ने सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रशासनिक कार्रवाई को जातीय चश्मे से देखने के बजाय निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम होना चाहिए। विपक्ष का यह भी कहना है कि सरकार कुछ वर्गों को साधने के लिए बयानबाज़ी कर रही है, जबकि ज़मीनी समस्याओं पर ठोस कदम कम दिख रहे हैं।

इस मुद्दे ने एक बार फिर प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकारी तंत्र जाति या सामाजिक दबाव से प्रभावित हुए बिना निष्पक्ष कार्रवाई कर पा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और समयबद्ध निर्णय ही विश्वास बहाली का रास्ता हो सकते हैं।

एक राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार,

“जब सामाजिक पहचान राजनीति के केंद्र में आ जाती है, तो प्रशासनिक फैसलों की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह न्याय और राजनीति के बीच संतुलन बनाए।”

भाजपा ने उत्तर प्रदेश में सत्ता में आने के बाद खुद को कानून-व्यवस्था और विकास केंद्रित पार्टी के रूप में पेश किया है। इसके साथ ही पार्टी ने विभिन्न सामाजिक वर्गों को साधने की रणनीति भी अपनाई है। ब्राह्मण नेताओं को अहम पदों पर जिम्मेदारी देना इसी प्रयास का हिस्सा माना जाता है।

ब्रजेश पाठक, जो स्वयं ब्राह्मण समुदाय से आते हैं, अक्सर सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों पर मुखर नजर आते हैं। उनका ताजा बयान इस धारणा को और मजबूत करता है कि पार्टी ब्राह्मण मतदाताओं को लेकर सतर्क है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि स्वामी सरस्वती की मांग पर सरकार किस तरह की कार्रवाई करती है। यदि प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो यह सरकार की जवाबदेही की छवि को मजबूत कर सकता है। वहीं, यदि मामला केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहता है, तो विपक्ष को हमले का मौका मिल सकता है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण राजनीति एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ चुकी है, और इसका असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
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