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मुंबई कोस्टल रोड पर ‘जय हो’ बना निवासियों का सिरदर्द

In Metro
February 18, 2026
RajneetiGuru.com - मुंबई कोस्टल रोड पर 'जय हो' बना निवासियों का सिरदर्द - Image Credited by Times NOW

मुंबईबृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा शहर के बुनियादी ढांचे में एक ‘सिम्फनी’ (सुरीलापन) जोड़ने की महत्वाकांक्षी कोशिश अब विवादों के घेरे में है। मुंबई कोस्टल रोड (धर्मवीर स्वराज्य रक्षक छत्रपति संभाजी महाराज कोस्टल रोड) पर हाल ही में शुरू किया गया ‘म्यूजिकल रोड’, जिसे ऑस्कर विजेता धुन ‘जय हो’ बजाने के लिए डिजाइन किया गया था, दक्षिण मुंबई के पॉश ब्रीच कैंडी और नेपियन सी रोड इलाकों के निवासियों के लिए इंजीनियरिंग के गौरव के बजाय एक “दैनिक दुःस्वप्न” में बदल गया है।

महानगर के लिए इस तरह का पहला प्रयोग होने वाले इस म्यूजिकल स्ट्रेच में बारीकी से इंजीनियर की गई ‘रंबल स्ट्रिप्स’ (उभरी हुई पट्टियाँ) का उपयोग किया गया है। जब कोई वाहन एक स्थिर गति (आमतौर पर 60 किमी/घंटा) पर इन पट्टियों के ऊपर से गुजरता है, तो कंपन से ए.आर. रहमान की प्रतिष्ठित रचना की धुन निकलती है। हालांकि, जिसे सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रोत्साहन के रूप में शुरू किया गया था, उसने ध्वनि प्रदूषण और गंभीर सुरक्षा जोखिमों का हवाला देते हुए स्थानीय नागरिकों के बीच भारी विरोध पैदा कर दिया है।

मधुर धुन से शोर के आतंक तक

क्षेत्र के 650 से अधिक परिवारों का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्रीच कैंडी एडवांस्ड लोकैलिटी मैनेजमेंट (ALM) और ब्रीच कैंडी रेजिडेंट्स फोरम (BCRF) ने इस सुविधा को बंद करने के लिए नगर प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। नगर आयुक्त भूषण गगरानी को संबोधित एक कड़े पत्र में, जिसकी एक प्रति महाराष्ट्र मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को भी भेजी गई है, निवासियों ने इस अनुभव को “एक निरंतर, दबे हुए लेकिन घुसपैठ करने वाले गूँज कक्ष (echo chamber)” में रहने जैसा बताया है।

फोरम के अनुसार, यह संगीत कोस्टल रोड के संचालन के समय के अनुसार सुबह 6:00 बजे से आधी रात तक लगातार बजता रहता है। पारंपरिक ट्रैफिक शोर के विपरीत, ‘जय हो’ धुन की लयबद्ध और बार-बार दोहराई जाने वाली प्रकृति वरिष्ठ नागरिकों और घर से काम करने वाले लोगों के लिए विशेष रूप से तनावपूर्ण साबित हो रही है।

BCRF के एक प्रतिनिधि ने कहा, “मुंबई पहले से ही दुनिया के सबसे शोर वाले शहरों में से एक है। हॉर्न, निर्माण कार्य और इंजनों के शोर के बीच, हम पहले से ही अपनी सहनशक्ति की सीमा पर थे। एक आवासीय क्षेत्र में इस तरह का संगीत जोड़ना कोई नवाचार नहीं है; यह एक सार्वजनिक उपद्रव (civic nuisance) है। हम अपनी खिड़कियां स्थायी रूप से बंद रखने को मजबूर हैं, फिर भी कंपन-आधारित ध्वनि दीवारों के माध्यम से अंदर रिसती है।”

म्यूजिकल रोड की कार्यप्रणाली

म्यूजिकल रोड एक वैश्विक अवधारणा है, जो जापान, डेनमार्क और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में पाई जाती है। ये ध्वनिकी (acoustics) और कंपन के सिद्धांतों पर काम करते हैं।

मुंबई के इस हिस्से में रंबल स्ट्रिप्स को संगीत के सुरों (notes) के अनुसार विशेष दूरी पर रखा गया है। जैसे ही टायर इन पट्टियों से टकराते हैं, प्रभाव की आवृत्ति (frequency) ध्वनि पैदा करती है।

इस सूत्र में, F सुर की आवृत्ति (पिच) को दर्शाता है, V वाहन का वेग है, और D पट्टियों के बीच की दूरी है। धुन को सही ढंग से सुनने के लिए, ड्राइवर को एक स्थिर गति बनाए रखनी चाहिए। यदि गति बहुत अधिक या बहुत कम होती है, तो धुन विकृत या बेसुरी हो जाती है, जिससे संगीत के बजाय कर्कश शोर पैदा होता है।

सुरक्षा जोखिम और अनियंत्रित ड्राइविंग

ध्वनि संबंधी परेशानी के अलावा, निवासियों की शिकायत एक अधिक खतरनाक परिणाम की ओर इशारा करती है: यातायात में अस्थिरता। कोस्टल रोड का उत्तर की ओर जाने वाला हिस्सा एक तेज़ गति वाला कॉरिडोर है। निवासियों का तर्क है कि यह म्यूजिकल फीचर ड्राइवरों के व्यवहार को अनियंत्रित बना रहा है, जिससे घातक दुर्घटनाएं हो सकती हैं।

  • ड्राइवर का ध्यान भटकना: मुख्य चिंता यह है कि मोटर चालक सड़क की दृश्य जटिलताओं के बजाय सुनने वाली धुन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले घंटों के दौरान।

  • गति में अचानक उतार-चढ़ाव: कथित तौर पर, धुन को पूरी तरह से “पकड़ने” के लिए ड्राइवर अचानक ब्रेक लगा रहे हैं या गति बढ़ा रहे हैं, जिससे पीछे चल रहे वाहनों के लिए खतरा पैदा हो रहा है।

  • ‘सुपरकार’ का खतरा: निवासियों ने बताया कि यह सड़क सुपरकार मालिकों के लिए आधी रात का खेल का मैदान बन गई है। तेज़ आवाज़ वाले इंजनों और रंबल स्ट्रिप्स के शोर ने समुद्र के किनारे रहने वाले लोगों का सोना नामुमकिन कर दिया है।

संवेदनशील क्षेत्रों से निकटता

ब्रीच कैंडी क्षेत्र में ब्रीच कैंडी अस्पताल सहित कई प्रमुख अस्पताल और कई शैक्षणिक संस्थान स्थित हैं। आयुक्त को लिखे पत्र में कहा गया है, “नवाचार का एक उद्देश्य होना चाहिए। ऐसे क्षेत्र में जहां उपचार और एकाग्रता के लिए शांति की आवश्यकता होती है, वहां म्यूजिकल रोड स्थापित करना भौगोलिक संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है।”

निवासियों का तर्क है कि ऐसी अनावश्यक गतिविधियों के बजाय प्रशासन को ध्वनि अवरोधक (noise barriers) लगाने जैसी अधिक महत्वपूर्ण नागरिक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, जो इस अरबों डॉलर की परियोजना के कुछ हिस्सों में नदारद हैं।

आधिकारिक प्रतिक्रिया और मिसालें

हालांकि BMC ने अभी तक इस परियोजना को बंद करने पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन नगर निकाय के इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का सुझाव है कि इस पहल का उद्देश्य “पर्यटक आकर्षण और सुरक्षा अनुस्मारक” होना था।

इस मामले पर विशेषज्ञों की राय विभाजित है। नाम न छापने की शर्त पर एक सेवानिवृत्त शहरी योजनाकार (urban planner) ने कहा:

“अन्य देशों में म्यूजिकल रोड आमतौर पर ग्रामीण इलाकों के लंबे, उबाऊ राजमार्गों पर स्थित होते हैं ताकि ड्राइवर की थकान या ‘हाईवे हिप्नोसिस’ को रोका जा सके। ब्रीच कैंडी जैसे घनी आबादी वाले शहरी आवासीय क्लस्टर के बीच में इसे लगाना एक प्रयोगात्मक चूक है।”

प्रशासन पर अब प्रभावित घरों में ध्वनि डेसिबल ऑडिट करने का दबाव है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि क्या शोर का स्तर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा आवासीय क्षेत्रों के लिए निर्धारित सीमा से अधिक है।

मुंबई कोस्टल रोड परियोजना

मुंबई कोस्टल रोड प्रोजेक्ट मरीन ड्राइव को बांद्रा-वरली सी लिंक के वर्ली छोर से जोड़ने वाला 10.58 किमी का हिस्सा है। इसका उद्देश्य दक्षिण मुंबई और उपनगरों के बीच यात्रा के समय को लगभग 70% और ईंधन की खपत को 34% कम करना था। हालांकि इस परियोजना को इसके इंजीनियरिंग कौशल—जिसमें देश की पहली समुद्री सुरंगें शामिल हैं—के लिए सराहा गया है, लेकिन इसके अंतिम कार्यों, जैसे म्यूजिकल रोड और थीम वाली लाइटिंग को सार्वजनिक आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

जब शहर आयुक्त भूषण गगरानी के निर्णय का इंतजार कर रहा है, ‘जय हो’ की धुन अरब सागर के किनारे गूंज रही है, जो शहरी नियोजन में यह याद दिलाती है कि “मधुर पुरस्कार” और “नागरिक दुःस्वप्न” के बीच की रेखा एक रंबल स्ट्रिप जितनी ही पतली है।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।

    अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

    उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है।
    उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।

    राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —

    स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,

    ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,

    जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,

    रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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