दुनिया के लगभग 125 देशों के नीति निर्माताओं और उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को घोषणा की कि भारत का ऊर्जा क्षेत्र $500 बिलियन (लगभग ₹41 लाख करोड़) के निवेश अवसरों के साथ वैश्विक बदलाव के लिए तैयार है। ‘इंडिया एनर्जी वीक 2026’ के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए, प्रधानमंत्री ने भारत को “वैश्विक ऊर्जा आकांक्षाओं का केंद्र” बताया।
प्रधानमंत्री का संबोधन भारत की दोहरी रणनीति पर केंद्रित था: पारंपरिक तेल शोधन (refining) क्षमता का विस्तार करना और ऊर्जा स्वतंत्रता की ओर वैश्विक नेतृत्व करना।
रिफाइनिंग पावरहाउस: 300 MTPA का लक्ष्य
भारत पहले से ही पेट्रोलियम उत्पादों के दुनिया के शीर्ष पांच निर्यातकों में शामिल है। सरकार का लक्ष्य अब देश को दुनिया का सबसे बड़ा तेल शोधन केंद्र (Refining Hub) बनाना है।
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वर्तमान क्षमता: ~260 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA)।
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लक्ष्य: इसे जल्द ही 300 MMTPA से ऊपर ले जाना।
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निवेश: 2030 तक तेल और गैस क्षेत्र में $100 बिलियन का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य।
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खोज (Exploration): कच्चे तेल की खोज के दायरे को 10 लाख वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाने की योजना है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत ऊर्जा क्षेत्र के लिए अवसरों की भूमि है। हम केवल ऊर्जा सुरक्षा की बात नहीं कर रहे, हम ऊर्जा स्वतंत्रता (Energy Independence) के मिशन की ओर बढ़ रहे हैं।”
“सभी समझौतों की जननी”: भारत-यूरोपीय संघ FTA
प्रधानमंत्री ने हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने इसे “सभी समझौतों की जननी” बताया जो वैश्विक व्यापार के ढांचे को बदल देगा।
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आर्थिक महत्व: यह समझौता वैश्विक जीडीपी के 25% और वैश्विक व्यापार के एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।
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ऊर्जा तालमेल: यह समझौता हरित प्रौद्योगिकी, हाइड्रोजन और उन्नत विनिर्माण के लिए आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) को मजबूत करेगा।
बुनियादी ढांचा: LNG और गैस क्षेत्र
प्रधानमंत्री ने गैस-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने पर जोर दिया, जिसका लक्ष्य भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को वर्तमान 6% से बढ़ाकर 15% करना है। उन्होंने इसके लिए एलएनजी टर्मिनल, पाइपलाइन नेटवर्क और सिटी गैस वितरण (CGD) में निवेश का आह्वान किया।
