बिहार में आगामी राज्यसभा चुनावों को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहा है। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में गठबंधन के पास 202 विधायकों का मजबूत समर्थन है, जिसके चलते NDA के लिए चार राज्यसभा सीटें लगभग तय मानी जा रही हैं। इसके अलावा, यदि विपक्ष उम्मीदवार उतारता भी है और मुकाबला होता है, तो गठबंधन को पांचवीं सीट जीतने के लिए केवल तीन अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी।
राज्यसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में सत्तारूढ़ दलों के बीच सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के नामों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जनता दल (यूनाइटेड) ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वह वर्तमान सांसद रामनाथ ठाकुर को दोबारा राज्यसभा भेजने की तैयारी में है। रामनाथ ठाकुर, जो सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के मुद्दों पर मुखर माने जाते हैं, जदयू के एक महत्वपूर्ण चेहरे के रूप में देखे जाते हैं।
जदयू नेताओं का मानना है कि रामनाथ ठाकुर का दोबारा चयन न केवल पार्टी की सामाजिक संतुलन की राजनीति को मजबूती देगा, बल्कि गठबंधन के भीतर भी एक स्थिर संदेश जाएगा। जदयू के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “रामनाथ ठाकुर ने सदन में पार्टी की विचारधारा और बिहार के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया है। उनका अनुभव NDA के लिए उपयोगी साबित होगा।”
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के खेमे में अभी तक राज्यसभा उम्मीदवारों के नामों को लेकर स्पष्टता नहीं है। हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने से पहले केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी और जातीय तथा क्षेत्रीय समीकरणों का गहन आकलन कर रही है। भाजपा की कोशिश है कि राज्यसभा में बिहार से ऐसे चेहरे भेजे जाएं, जो राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की नीतियों को मजबूती से प्रस्तुत कर सकें।
बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनावों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह विधानसभा के मौजूदा शक्ति संतुलन को भी दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में NDA ने बिहार में अपनी स्थिति को मजबूत किया है, जबकि विपक्षी दल आंतरिक मतभेदों और संगठनात्मक कमजोरियों से जूझते रहे हैं। मौजूदा संख्या बल NDA को रणनीतिक बढ़त देता है।
विपक्ष की भूमिका इस चुनाव में सीमित मानी जा रही है। यदि विपक्ष संयुक्त उम्मीदवार उतारता है, तब भी उसके पास इतनी संख्या नहीं है कि वह NDA की राह में बड़ा अवरोध बन सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के लिए यह चुनाव अपनी एकजुटता दिखाने का अवसर हो सकता है, लेकिन परिणाम बदलना आसान नहीं होगा।
एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार, “बिहार में इस समय राज्यसभा चुनाव गणित का खेल ज्यादा है, राजनीतिक रोमांच का नहीं। NDA की स्थिति इतनी मजबूत है कि विपक्ष के लिए सिर्फ प्रतीकात्मक लड़ाई की गुंजाइश बची है।” यह टिप्पणी वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
राज्यसभा चुनावों का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ये चुनाव अक्सर दलों की आंतरिक प्राथमिकताओं और भविष्य की रणनीति को भी उजागर करते हैं। NDA के लिए यह चुनाव न केवल संख्या बल दिखाने का अवसर है, बल्कि गठबंधन की एकजुटता और समन्वय को भी प्रदर्शित करने का माध्यम है।
भविष्य की दृष्टि से देखें तो बिहार के राज्यसभा चुनाव NDA के लिए एक सहज प्रक्रिया प्रतीत हो रहे हैं। जदयू द्वारा अपने उम्मीदवार को लेकर स्पष्ट रुख और भाजपा द्वारा रणनीतिक चुप्पी यह संकेत देती है कि गठबंधन भीतरखाने पूरी तरह तैयार है। आने वाले दिनों में जैसे ही उम्मीदवारों के नामों की औपचारिक घोषणा होगी, चुनावी तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो जाएगी।
कुल मिलाकर, मौजूदा राजनीतिक गणित और परिस्थितियों को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि बिहार राज्यसभा चुनावों में NDA एक निर्णायक बढ़त के साथ आगे बढ़ रहा है, और पांचवीं सीट पर भी उसकी नजर टिकी हुई है।
