नई दिल्ली — केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट 2026 पेश किए जाने के दौरान लोकसभा में अलग-अलग रंग देखने को मिले। करीब डेढ़ घंटे लंबे बजट भाषण के समापन पर जहां सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर और खड़े होकर वित्त मंत्री की सराहना की, वहीं विपक्ष का रुख अपेक्षाकृत संयमित और शांत रहा। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने वित्त मंत्री को बधाई दी, जबकि विपक्षी बेंचों से सीमित सवाल और टिप्पणियां ही सामने आईं।
लोकसभा की कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष का उत्साह स्पष्ट दिखाई दिया। भाषण समाप्त होते ही प्रधानमंत्री मोदी ने वित्त मंत्री से मिलकर उन्हें बधाई दी। भाजपा और सहयोगी दलों के सांसदों ने बजट को विकासोन्मुख, दूरदर्शी और आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने वाला बताया। सत्ता पक्ष का कहना था कि यह बजट बुनियादी ढांचे, रोजगार सृजन, विनिर्माण और डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। कई सांसदों ने इसे “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में एक और मजबूत कदम करार दिया।
इसके विपरीत, विपक्ष का रुख अपेक्षाकृत शांत रहा। सदन में न तो व्यापक नारेबाजी देखने को मिली और न ही बड़े पैमाने पर व्यवधान। हालांकि, बजट के कुछ प्रावधानों को लेकर सवाल जरूर उठाए गए। खास तौर पर केरल से कांग्रेस सांसद एम. के. राघवन के नेतृत्व में तीन सांसदों ने अपने राज्य के लिए आवंटन को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि बजट में केरल की वित्तीय जरूरतों और विकास चुनौतियों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया।
एम. के. राघवन ने सदन के बाहर पत्रकारों से कहा, “हम यह नहीं कह रहे कि बजट पूरी तरह नकारात्मक है, लेकिन केरल जैसे राज्य, जो प्राकृतिक आपदाओं और वित्तीय दबावों से जूझ रहे हैं, उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।” उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को राज्यों की विविध परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संसाधनों का वितरण करना चाहिए।
बजट सत्र के दौरान विपक्ष की सीमित प्रतिक्रिया को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा रही। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्ष इस समय बजट पर तीखे विरोध के बजाय बाद की विस्तृत बहस में सरकार को घेरने की रणनीति अपना सकता है। एक वरिष्ठ संसदीय विश्लेषक के अनुसार, “लोकसभा में शोर-शराबे की जगह इस बार विपक्ष ने अपेक्षाकृत शांत रवैया अपनाया। संभव है कि वे बजट के प्रभावों को विस्तार से समझने के बाद अपनी आलोचना को धार दें।”
लोकसभा में बजट पेश होने के दृश्य संसद की परंपराओं की भी याद दिलाते हैं। ऐतिहासिक रूप से, बजट भाषण संसद के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक रहा है, जहां सरकार अपनी आर्थिक प्राथमिकताएं रखती है और विपक्ष उसकी दिशा पर सवाल उठाता है। पहले के वर्षों में बजट के दौरान तीखी बहस और व्यवधान आम रहे हैं, लेकिन इस बार का सत्र अपेक्षाकृत नियंत्रित और औपचारिक नजर आया।
सरकार का तर्क है कि बजट 2026 का फोकस दीर्घकालिक विकास और राजकोषीय अनुशासन पर है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण में कहा, “यह बजट भारत की आर्थिक मजबूती को बनाए रखते हुए भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी का दस्तावेज है।” उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों को केंद्र प्रायोजित योजनाओं और वित्त आयोग के माध्यम से निरंतर सहायता मिलती रहेगी।
हालांकि, विपक्ष का कहना है कि बजट की असली तस्वीर आने वाले महीनों में सामने आएगी, जब इसके प्रावधानों का जमीनी स्तर पर असर दिखेगा। खास तौर पर राज्यों को मिलने वाले संसाधनों, रोजगार के अवसरों और महंगाई पर नियंत्रण जैसे मुद्दों पर सरकार की नीतियों की परीक्षा होगी।
कुल मिलाकर, बजट 2026 के दौरान लोकसभा का माहौल सत्ता पक्ष की संतुष्टि, सीमित सवालों और अपेक्षाकृत शांत विपक्ष के रूप में सामने आया। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस बजट पर चर्चा तेज होने की संभावना है, जहां सरकार और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी व्याख्याओं और दावों के साथ जनता के सामने होंगे।
