पुणे, 2 जनवरी — पुणे में महापालिका चुनावों की नामांकन प्रक्रिया के दौरान बुधवार को एक असामान्य और विवादास्पद घटना सामने आई, जब शिवसेना के एक नेता पर अपने ही पार्टी के प्रतिद्वंदी उम्मीदवार का AB फॉर्म फाड़ने और निगलने का आरोप लगा। इस घटना के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है, जिससे स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
यह घटना धनकवड़ी–सहकारनगर वार्ड कार्यालय में उस समय हुई, जब उम्मीदवारों के नामांकन दस्तावेजों की जांच की जा रही थी। AB फॉर्म किसी भी राजनीतिक दल के लिए आधिकारिक उम्मीदवार तय करने का अहम दस्तावेज होता है। आरोप है कि शिवसेना की ओर से गलती से एक ही वार्ड के लिए दो उम्मीदवारों को AB फॉर्म जारी कर दिए गए, जिससे विवाद की स्थिति पैदा हुई।
जानकारी के अनुसार, जैसे ही उद्धव कांबले को यह पता चला कि उनके ही पार्टी सहयोगी मच्छिंद्र धवाले के पास भी AB फॉर्म है, दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। पुलिस का कहना है कि इस दौरान कांबले ने धवाले का फॉर्म छीना, उसे फाड़ दिया और कथित रूप से उसके टुकड़े निगल लिए। घटना के समय चुनाव अधिकारी और अन्य उम्मीदवार मौके पर मौजूद थे।
हालांकि, उद्धव कांबले ने फॉर्म फाड़ने की बात स्वीकार की है, लेकिन फॉर्म निगलने के आरोप से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से दो फॉर्म जारी किया जाना एक गंभीर गलती थी और उसी क्षण गुस्से में आकर उन्होंने यह कदम उठाया।
इस मामले में पुणे पुलिस ने कांबले के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
वहीं, मच्छिंद्र धवाले ने आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा है कि उन्होंने समय पर और नियमों के अनुसार अपना नामांकन जमा किया था। चुनाव अधिकारियों ने उन्हें फॉर्म की प्रतिलिपि जमा करने की सलाह दी है, ताकि उनकी उम्मीदवारी प्रक्रिया बाधित न हो।
इस घटना के बाद शिवसेना के स्थानीय नेतृत्व ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने स्वीकार किया है कि एक ही सीट के लिए दो AB फॉर्म जारी होना प्रशासनिक चूक थी। पार्टी नेताओं का कहना है कि आंतरिक स्तर पर मामले की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही यह स्पष्ट किया जाएगा कि आधिकारिक उम्मीदवार कौन होगा।
चुनाव अधिकारियों ने भी नामांकन प्रक्रिया की गंभीरता पर जोर दिया है। एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी ने कहा,
“फॉर्म A और B चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा होते हैं। इनके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ चुनाव नियमों का उल्लंघन है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दलों के भीतर उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में मौजूद दबाव और प्रतिस्पर्धा को भी उजागर करती है। महाराष्ट्र में आगामी चुनावों से पहले इस तरह की घटनाएं राजनीतिक दलों की संगठनात्मक चुनौतियों की ओर भी इशारा करती हैं।
पुणे महापालिका चुनाव राज्य की राजनीति में अहम माने जाते हैं, और ऐसे में इस विवाद का असर न केवल शिवसेना की छवि पर, बल्कि व्यापक राजनीतिक माहौल पर भी पड़ सकता है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, यह स्पष्ट होगा कि इस मामले का कानूनी और राजनीतिक परिणाम क्या होता है।
