नई दिल्ली – राष्ट्रीय राजधानी के बुनियादी ढांचे को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को लगभग ₹33,500 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस समारोह में कई उच्च पदस्थ अधिकारियों और शहरी योजनाकारों ने भाग लिया, जो दिल्ली के आवासीय और वाणिज्यिक परिदृश्य के आधुनिकीकरण में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
दिन के कार्यक्रमों का मुख्य आकर्षण ‘जनरल पूल रेजिडेंशियल अकोमोडेशन’ (GPRA) पुनर्विकास योजना के तहत नए घरों को सौंपना था। इससे पहले, प्रधानमंत्री ने सरोजनी नगर में नवनिर्मित टाइप-5 क्वार्टरों का दौरा किया, जहां उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कई महिला आवंटियों को चाबियां सौंपीं, जो सरकारी कर्मचारियों के लिए “ईज़ ऑफ लिविंग” (जीवन की सुगमता) के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
शहरी जीवन का आधुनिकीकरण: सात कॉलोनियों की परियोजना
केंद्र सरकार ने दिल्ली की सात पुरानी सरकारी आवास कॉलोनियों: सरोजनी नगर, नेताजी नगर, नौरोजी नगर, कस्तूरबा नगर, त्यागराज नगर, श्रीनिवासपुरी और मोहम्मदपुर के पुनर्विकास का एक विशाल मिशन शुरू किया है। लगभग 537 एकड़ में फैली ये कॉलोनियां—जिनमें से कुछ कई दशक पुरानी हैं—ढांचागत रूप से कमजोर हो गई थीं। आधिकारिक सर्वेक्षणों के अनुसार, लगभग 40 प्रतिशत मौजूदा क्वार्टरों को रहने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
पुनर्विकास का उद्देश्य इन कम ऊँचाई वाली, जर्जर संरचनाओं को आधुनिक, ऊंची आवासीय इमारतों से बदलना है। पूरा होने पर, यह परियोजना 21,000 से अधिक नई आवासीय इकाइयां प्रदान करेगी, जिससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए आवास की कमी की समस्या का प्रभावी ढंग से समाधान होगा।
परियोजना के पैमाने पर टिप्पणी करते हुए, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा: “यह केवल घर बनाने के बारे में नहीं है; यह एक स्थायी शहरी पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के बारे में है। लगभग 13,000 पुराने घरों को 21,000 से अधिक आधुनिक इकाइयों से बदलकर, हम भूमि उपयोग का अनुकूलन कर रहे हैं और राष्ट्र की सेवा करने वालों के परिवारों के लिए विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा सुनिश्चित कर रहे हैं।”
अभिनव स्व-वित्तपोषण मॉडल
इस ₹33,500 करोड़ की पहल का सबसे उल्लेखनीय पहलू सरकारी खजाने पर इसका “शून्य बोझ” दृष्टिकोण है। यह परियोजना एक अभिनव स्व-वित्तपोषण मॉडल के माध्यम से निष्पादित की जा रही है। निर्माण लागत को पूरा करने के लिए, सरकार वाणिज्यिक और आवासीय उपयोग के लिए कुल परियोजना क्षेत्र का लगभग 12.9 प्रतिशत (लगभग 69.41 एकड़) मुद्रीकृत (monetize) कर रही है।
इसका मतलब है कि सरकारी क्वार्टरों के पुनर्विकास के लिए करदाताओं के पैसे से प्रत्यक्ष धन की आवश्यकता नहीं है। शहरी अर्थशास्त्रियों द्वारा इस मॉडल को भारत के महानगरों में भविष्य की पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए एक ब्लूप्रिंट के रूप में सराहा जा रहा है।
आवास से परे: व्यापक बुनियादी ढांचा
प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन की गई परियोजनाओं में उन्नत नागरिक बुनियादी ढांचा भी शामिल है, जैसे बेहतर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली और विस्तृत हरित क्षेत्र। नई कॉलोनियों को “वॉकेबल” (पैदल चलने योग्य) और पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया है।
समारोह के दौरान सभा को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने जोर दिया कि राष्ट्रीय राजधानी का विकास “न्यू इंडिया” के विजन का प्रतिबिंब है—जो वित्तीय जिम्मेदारी के साथ तेजी से आधुनिकीकरण को संतुलित करता है।
