गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को जारी इस सर्वे के मुताबिक, यदि आज लोकसभा चुनाव होते हैं, तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) न केवल अपने दम पर बहुमत हासिल करेगी, बल्कि 2024 के अपने प्रदर्शन में भी सुधार करेगी। दूसरी ओर, राहुल गांधी की व्यक्तिगत लोकप्रियता नए स्तर पर पहुंचने के बावजूद, कांग्रेस पार्टी इस जनसमर्थन को सीटों में बदलने में संघर्ष करती दिख रही है।
नेतृत्व की जंग: 55% बनाम 27%
सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी 55 प्रतिशत लोगों की पसंद हैं। अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 52 प्रतिशत और अगस्त 2024 में 49 प्रतिशत था। यह वृद्धि दर्शाती है कि हाल के प्रशासनिक निर्णयों और मजबूत विदेश नीति के बाद ‘ब्रांड मोदी’ पर जनता का भरोसा और मजबूत हुआ है।
वहीं, राहुल गांधी के ग्राफ में भी बड़ी उछाल देखी गई है। जनवरी 2022 में जहां मात्र 7 प्रतिशत लोग उन्हें पीएम के रूप में देखना चाहते थे, वहीं जनवरी 2026 में यह संख्या बढ़कर 27 प्रतिशत हो गई है। यह चार गुना वृद्धि राहुल गांधी की बढ़ती स्वीकार्यता और उनकी बदली हुई छवि का प्रमाण है।
भाजपा की रिकवरी, कांग्रेस की मुश्किलें
सीटों के अनुमान के मामले में भाजपा को बड़ी बढ़त मिलती दिख रही है। सर्वे के अनुसार, भाजपा आज चुनाव होने पर 287 सीटें जीत सकती है, जो 272 के बहुमत के आंकड़े से कहीं अधिक है। यह अगस्त 2025 के सर्वे की तुलना में 27 सीटों का फायदा है।
इसके विपरीत, कांग्रेस को 80 सीटों पर सिमटना पड़ सकता है, जो पिछले सर्वे के मुकाबले 17 सीटों की गिरावट है। पूरे इंडिया (INDIA) गठबंधन की बात करें तो इसकी सीटें 234 (2024 के नतीजे) से घटकर 182 रह सकती हैं।
सीटों का अनुमानित विवरण (जनवरी 2026):
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भाजपा: 287 सीटें (+27 की बढ़त)
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कांग्रेस: 80 सीटें (17 की गिरावट)
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राजग (NDA): 352 सीटें
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इंडिया (INDIA) गठबंधन: 182 सीटें
विशेषज्ञों की राय और धरातल की हकीकत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता और पार्टी के प्रदर्शन के बीच एक “गैप” बना हुआ है। सीवोटर के संस्थापक-निदेशक यशवंत देशमुख के अनुसार, “पश्चिम बंगाल और अन्य प्रमुख राज्यों में मुकाबला द्विध्रुवीय होता जा रहा है। भाजपा ने अपनी हालिया राज्य-स्तरीय हार के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की है।”
सर्वे यह भी बताता है कि महंगाई (20%) और बेरोजगारी (17%) जनता की सबसे बड़ी चिंताएं बनी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद 57% लोग प्रधानमंत्री के कामकाज को “अच्छा” मानते हैं।
2026 का चुनावी बिगुल
यह सर्वे ऐसे समय में आया है जब 2025 में भाजपा ने बिहार और दिल्ली विधानसभा चुनावों में शानदार जीत दर्ज की है। इन नतीजों ने 2024 के बाद बने “विपक्ष के उदय” के नैरेटिव को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। कांग्रेस के लिए चुनौती यह है कि वह राहुल गांधी की व्यक्तिगत बढ़त को एक मजबूत चुनावी संगठन में कैसे बदले। आने वाले महीनों में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में होने वाले चुनाव इस ‘मूड’ की असली परीक्षा करेंगे।
