असम विधानसभा चुनाव 2026 से कुछ दिन पहले राज्य में एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस पार्टी के बीच मुख्यमंत्री की पत्नी की विदेशी नागरिकता और संपत्तियों को लेकर तीखी जंग छिड़ गई है। रविवार, 5 अप्रैल, 2026 को वरिष्ठ कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की पत्नी, रिनिकी भुइयां शर्मा के पास तीन अलग-अलग देशों—यूएई, एंटीगुआ और बारबुडा, और मिस्र—के सक्रिय पासपोर्ट हैं। मुख्यमंत्री ने इन दावों को “डिजिटल रूप से हेरफेर किया गया प्रोपेगेंडा” बताकर सिरे से खारिज कर दिया है।
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब असम 9 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान की तैयारी कर रहा है। इन आरोपों ने न केवल चुनावी माहौल को गरमा दिया है, बल्कि गंभीर कानूनी सवाल भी खड़े कर दिए हैं, क्योंकि भारतीय कानून दोहरी नागरिकता और कई विदेशी पासपोर्ट रखने की अनुमति नहीं देता है।
‘ट्रिपल पासपोर्ट’ का आरोप
नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पवन खेड़ा ने कुछ दस्तावेज पेश किए, जिनमें दावा किया गया कि रिनिकी भुइयां शर्मा के पास यूएई का ‘गोल्डन कार्ड’ (मार्च 2027 तक वैध), एंटीगुआ और बारबुडा का पासपोर्ट (2021 में जारी), और मिस्र का पासपोर्ट (2022 में जारी) है। खेड़ा ने इसे “स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक अभूतपूर्व रहस्योद्घाटन” करार दिया।
खेड़ा ने सवाल किया, “एक मौजूदा मुख्यमंत्री, जो नागरिकता और राष्ट्रीयता के मुद्दे पर अपनी पूरी राजनीति करते हैं, उनकी पत्नी भारतीय नागरिक कैसे नहीं हो सकतीं?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी हलफनामे में दुबई की महंगी संपत्तियों और अमेरिका की एक कंपनी में निवेश की जानकारी छिपाई है। कांग्रेस ने अब चुनाव आयोग (ECI) से सरमा का नामांकन रद्द करने की मांग की है।
सरमा का पलटवार: ‘जालसाजी का घटिया प्रयास’
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन आरोपों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कांग्रेस द्वारा साझा किए गए दस्तावेजों में “भारी विसंगतियों” की ओर इशारा किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, कथित पासपोर्ट प्रतियों में ‘Egyptiann’ जैसी वर्तनी की गलतियां थीं और मशीन रीडेबल ज़ोन (MRZ) कोड अंतरराष्ट्रीय मानकों से मेल नहीं खाते थे।
सरमा ने कहा, “प्रसारित किए जा रहे दस्तावेज डिजिटल हेरफेर का एक घटिया प्रयास हैं।” उन्होंने यह भी खुलासा किया कि असम पुलिस ने राजनयिक चैनलों के माध्यम से प्राथमिक जांच की है। उन्होंने कहा, “यूएई का पासपोर्ट फर्जी है। कोई भी सामान्य व्यक्ति यूएई की आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर इसकी पुष्टि कर सकता है। अन्य देशों के दस्तावेजों की जांच भी जल्द पूरी हो जाएगी।”
“सत्य की जीत होगी। गलत सूचना फैलाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। मेरी पत्नी और मैं अगले 48 घंटों के भीतर पवन खेड़ा के खिलाफ आपराधिक और नागरिक मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे। अंततः, श्री खेड़ा को धोखाधड़ी के लिए जेल जाना होगा,” मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक कड़े बयान में कहा।
पृष्ठभूमि: कानूनी और राजनीतिक टकराव
सरमा और कांग्रेस के बीच यह मौजूदा गतिरोध कोई नया नहीं है। पिछले एक साल में मुख्यमंत्री ने जमीन विवाद से लेकर वित्तीय अनियमितताओं तक के आरोपों पर विपक्षी नेताओं के खिलाफ कई मानहानि के मुकदमे दर्ज किए हैं।
चुनाव के ठीक पहले इस “खुलासे” का समय काफी महत्वपूर्ण है। जब 126 विधानसभा सीटों के लिए प्रचार अपने चरम पर है, कांग्रेस भाजपा के “असमिया पहचान” और “राष्ट्रीय सुरक्षा” के नैरेटिव को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री के परिवार को निशाना बनाकर विपक्ष सरकार की नैतिक सत्ता पर सवाल उठा रहा है।
चुनावी प्रभाव और आगे की राह
माना जा रहा है कि यह कानूनी लड़ाई लोकतांत्रिक चुनाव के साथ-साथ चलती रहेगी। जहां रिनिकी भुइयां शर्मा ने कांग्रेस के दावों को “हास्यास्पद” और “एआई-जनरेटेड कंटेंट” बताया है, वहीं कांग्रेस नेतृत्व अपने रुख पर कायम है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने इस मामले में एसआईटी (SIT) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच की मांग की है।
सोमवार सुबह तक मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री की कानूनी टीम मानहानि के मसौदे को अंतिम रूप दे रही है। यह देखना बाकी है कि क्या ये आरोप मतदाताओं को प्रभावित करेंगे या इसे विपक्ष की “हताशा” के रूप में देखा जाएगा। हालांकि, एक बात तय है कि “पासपोर्ट विवाद” 2026 के असम चुनावों का सबसे चर्चित मुद्दा बन गया है।
