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पश्चिम एशिया संघर्ष का असर बेंगलुरु की थाली पर; रेस्तरां ने कम किया मेनू

In Economy
March 11, 2026
RajneetiGuru.com - पश्चिम एशिया संघर्ष का असर बेंगलुरु की थाली पर; रेस्तरां ने कम किया मेनू - AI Generated Image

बेंगुलुरुपश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष की लहरें भारत की टेक राजधानी की डाइनिंग टेबल तक पहुंच गई हैं। युद्ध को लेकर बाजार में मची हलचल और आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधान के कारण कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की भारी कमी हो गई है। इसका सीधा असर शहर के प्रसिद्ध ‘दरशिनी’ रेस्तरां पर पड़ा है, जिन्हें अपने मेनू में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

लगातार दूसरे दिन, शहर के खाद्य उद्योग को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति नहीं मिली। ईंधन की कमी के कारण सबसे पहले ‘पूरी’ (Poori) को मेनू से हटाया गया है। चूंकि पूरी तलने के लिए तेल को लंबे समय तक उच्च तापमान पर रखना पड़ता है, जिसमें गैस की खपत अधिक होती है, इसलिए कई होटलों ने इडली और डोसा जैसे कम गैस खपत वाले व्यंजनों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इसे बंद कर दिया है।

मेनू में कटौती और कालाबाजारी

बसावनगुड़ी स्थित ऐतिहासिक ‘विद्यार्थी भवन‘ के अरुण अडिगा ने बताया कि उन्हें अपने चार डोसा बर्नर में से दो को बंद करना पड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बुधवार शाम तक आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो संचालन जारी रखना असंभव होगा। दूसरी ओर, कुछ इलाकों में सिलेंडरों की भारी कालाबाजारी की खबरें भी सामने आई हैं। जहाँ आधिकारिक कीमत ₹1,900 के करीब है, वहीं डीलरों द्वारा ₹3,000 से ₹3,500 तक वसूले जा रहे हैं।

बेंगलुरु नेशनल रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अध्यक्ष अनंत नारायण ने कहा: “सोमवार से स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। अधिकांश रेस्तरां के पास सुरक्षा कारणों से केवल 1 से 3 दिनों का स्टॉक होता है। यदि यह व्यवधान जारी रहा, तो कई प्रतिष्ठानों को पूरी तरह से बंद करना पड़ सकता है।”

पीजी (PG) और पीएनजी (PNG) की स्थिति

शहर के पेइंग गेस्ट (PG) आवास भी इस संकट से अछूते नहीं हैं। पीजी ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण कुमार डीटी ने बताया कि वे निवासियों के लिए भोजन सुनिश्चित करने हेतु डोसा और पूरी जैसे व्यंजनों को सरल व्यंजनों से बदल रहे हैं। हालांकि, गेल (GAIL) पाइपलाइन कनेक्शन वाले लगभग 4,000 रेस्तरां इस संकट से सुरक्षित हैं, क्योंकि वहां गैस की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी है।

निष्कर्ष: वैश्विक संकट का स्थानीय प्रभाव

यह कमी सीधे तौर पर खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध का परिणाम है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी व्यवधान का सीधा असर घरेलू कमर्शियल दरों और उपलब्धता पर पड़ता है। बेंगलुरु का होटल उद्योग अब सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहा है।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।

    अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

    उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है।
    उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।

    राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —

    स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,

    ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,

    जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,

    रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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