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पटका विवाद: सरमा ने राहुल पर साधा निशाना, बताया पूर्वोत्तर का अपमान

In Politics
January 26, 2026
RajneetiGuru.com - पटका विवाद सरमा ने राहुल पर साधा निशाना, बताया पूर्वोत्तर का अपमान - Image Credited by India Today

नई दिल्ली — भारत की संवैधानिक एकता और सांस्कृतिक विविधता के उत्सव के दिन, एक तीखी राजनीतिक तकरार ने गणतंत्र दिवस के समारोहों पर अपनी छाया डाल दी है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘एट होम’ (At Home) रिसेप्शन के दौरान पारंपरिक पूर्वोत्तर ‘पटका’ (स्टोल) न पहनने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है।

इस वर्ष राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा आयोजित रिसेप्शन का मुख्य विषय (Theme) पूर्वोत्तर की संस्कृति, कला और विरासत था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और विदेशी राजनयिकों सहित अन्य मेहमानों को इस क्षेत्र के कारीगरों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए एरी सिल्क से बने पारंपरिक स्टोल पहने देखा गया। हालांकि, राहुल गांधी द्वारा इसे न पहनना अब सांस्कृतिक संवेदनशीलता और प्रोटोकॉल पर एक बड़ी बहस का कारण बन गया है।

प्रतीकों का टकराव: ‘पटका’ विवाद

विवाद सोमवार शाम को तब शुरू हुआ जब सरमा ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने गांधी के फैसले को पूरे पूर्वोत्तर के लोगों के लिए “गहरा असंवेदनशील और अपमानजनक” बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, पटका केवल कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।

सरमा ने एक्स (X) पर लिखा, “समय बदल सकता है, लेकिन कांग्रेस पार्टी के वास्तविक सर्वोच्च नेता का रवैया अपरिवर्तित लगता है।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि खुद राष्ट्रपति ने विपक्ष के नेता को दो बार पटका पहनने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।

सरमा ने कहा, “राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से लेकर विदेशी गणमान्य व्यक्तियों तक, सभी ने सम्मान के साथ पटका पहना। केवल मिस्टर गांधी अलग खड़े रहे, जो पूर्वोत्तर के प्रति उपेक्षा की धारणा को पुख्ता करता है। ऐसा आचरण बताता है कि उनकी पार्टी ने इस क्षेत्र का विश्वास क्यों खो दिया है।”

कांग्रेस का पलटवार: “सस्ती राजनीति”

कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को ध्यान भटकाने वाली रणनीति बताकर खारिज कर दिया। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए उन अन्य अतिथियों की तस्वीरें साझा कीं, जिन्होंने कथित तौर पर उस समय पटका नहीं पहना था, जिनमें केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल थे।

कांग्रेस सांसद मानिकम टैगोर ने सरमा की आलोचना को “बकवास” करार दिया।

टैगोर ने लिखा, “विश्वासघातियों के 2016 बैच को यह सब बंद करना चाहिए। फिर राजनाथ सिंह जी ने पूर्वोत्तर का पटका क्यों नहीं पहना है? माननीय राष्ट्रपति को अपनी सस्ती राजनीति में घसीटना बंद करें।”

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी सवाल किया कि क्या असम के मुख्यमंत्री अपने ही सहयोगी राजनाथ सिंह से माफी मांगेंगे, या उनकी “सत्ता विरोधी लहर (anti-incumbency) से लड़ने की पूरी रणनीति ऐसे गैर-मुद्दों को उठाना ही है।”

‘एट होम’ रिसेप्शन 2026

गणतंत्र दिवस पर आयोजित होने वाला ‘एट होम’ रिसेप्शन एक उच्च-स्तरीय राजनयिक कार्यक्रम है। 2026 में, इसका ध्यान “अष्टलक्ष्मी” यानी पूर्वोत्तर के आठ राज्यों पर केंद्रित था।

कार्यक्रम के निमंत्रण किट इस क्षेत्र की शिल्पकारी को समर्पित थे:

  • आमंत्रण बॉक्स: त्रिपुरा की बुनी हुई बांस की मैट से बना।

  • उपहार: विशेष रूप से डिजाइन किया गया एरी सिल्क स्टोल, जिसे इसके नैतिक उत्पादन के लिए “शांति रेशम” के रूप में जाना जाता है।

भाजपा का तर्क है कि इस थीम की अनदेखी करके गांधी उन 50 से अधिक कारीगरों का सम्मान करने में विफल रहे जिनके काम को वहां प्रदर्शित किया जा रहा था।

प्रोटोकॉल युद्ध: तीसरी पंक्ति की सीट

77वें गणतंत्र दिवस पर प्रोटोकॉल से जुड़ा यह एकमात्र विवाद नहीं था। इससे पहले दिन में, कांग्रेस पार्टी ने कर्तव्य पथ परेड में बैठने की व्यवस्था पर भी नाराजगी व्यक्त की थी, जहाँ राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को कथित तौर पर तीसरी पंक्ति में बिठाया गया था।

केंद्र का कहना है कि बैठने की व्यवस्था प्रोटोकॉल की तालिका और विदेशी प्रतिनिधिमंडल के आकार के अनुसार थी, लेकिन कांग्रेस ने इसे विपक्ष के नेता को किनारे करने के प्रयास के रूप में देखा। राष्ट्रपति भवन में हुआ “पटका” विवाद अब इस प्रोटोकॉल युद्ध का नया केंद्र बन गया है।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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