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नागरिक चुनाव पर हिंसा का साया: बांद्रा में शिव सेना उम्मीदवार पर हमला

In Politics
January 08, 2026
Samachartoday.co.in - नागरिक चुनाव पर हिंसा का साया बांद्रा में शिव सेना उम्मीदवार पर हमला - Image Credited by Times NOW

महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों के लिए जारी गहमागहमी के बीच हिंसा की वारदातों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुंबई के बांद्रा ईस्ट में चुनाव प्रचार के दौरान शिव सेना (एकनाथ शिंदे गुट) के उम्मीदवार हाजी सलीम कुरैशी पर चाकू से हमला किया गया है। पुलिस ने बताया है कि नेता अब खतरे से बाहर हैं।

यह घटना बुधवार शाम बांद्रा के संत ज्ञानेश्वर नगर इलाके में हुई। मुंबई पुलिस के अनुसार, कुरैशी अपने समर्थकों के साथ घर-घर जाकर प्रचार कर रहे थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने उनके पेट में चाकू मार दिया। उन्हें तुरंत बांद्रा वेस्ट के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

“हाजी सलीम कुरैशी के पेट में चोटें आई हैं, लेकिन उनकी हालत स्थिर है,” खेरवाड़ी पुलिस स्टेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को पुष्टि की। “हमने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया है और हमलावरों की पहचान करने के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच के साथ मिलकर तीन टीमें बनाई हैं।”

राजनीतिक तनाव में लगातार बढ़ोतरी

कुरैशी पर हमला कोई अकेली घटना नहीं है। पुणे में शिव सेना नेता प्रमोद ‘नाना’ भंगीरे ने आरोप लगाया कि श्रीराम चौक के पास एक जनसभा के दौरान उनकी कार पर पथराव किया गया। इस हमले में पुणे नगर निगम (PMC) की उम्मीदवार सारिका पवार को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई।

भंगीरे ने बताया, “जब मैं प्रचार कर रहा था, तब कुछ लोगों ने मेरी कार पर पत्थर फेंके। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि दोषियों को पकड़ा जा सके। लोकतंत्र में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है।”

तनाव की लहर छत्रपति संभाजीनगर तक भी पहुंच गई है, जहाँ एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष इम्तियाज जलील ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी की रैली पर 20-25 हथियारबंद लोगों ने हमला किया। जलील ने दावा किया कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद ‘गुंडों’ ने समर्थकों को घायल किया और वाहनों में तोड़फोड़ की।

“वे सोचते हैं कि ऐसी गुंडागर्दी से वे हमें रोक लेंगे। लेकिन हम संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों के अनुसार शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव लड़ रहे हैं। हमने पुलिस को स्पष्ट कर दिया है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो हम अपनी अगली रणनीति तय करेंगे,” इम्तियाज जली ने पत्रकारों से कहा।

लंबे समय से प्रतीक्षित स्थानीय निकाय चुनाव

2026 के ये चुनाव महाराष्ट्र के लिए “मिनी-विधानसभा” युद्ध की तरह हैं। वार्ड परिसीमन और आरक्षण के कानूनी विवादों के कारण ये चुनाव लंबे समय से लंबित थे। अब राज्य चुनाव आयोग ने बीएमसी (BMC), पीएमसी (PMC) और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (PCMC) सहित 29 नगर निगमों के लिए मतदान की घोषणा की है।

बीएमसी (Brihanmumbai Municipal Corporation), जिसे एशिया का सबसे अमीर नगर निकाय माना जाता है, इस चुनावी जंग का सबसे बड़ा केंद्र है। पहली बार शिव सेना दो गुटों में बंटकर चुनाव लड़ रही है: एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना (भाजपा के साथ महायुति गठबंधन में) और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिव सेना यूबीटी (महाविकास अघाड़ी का हिस्सा)।

हाजी सलीम कुरैशी, जो हमले का शिकार हुए, सितंबर 2024 में एआईएमआईएम छोड़कर शिंदे गुट में शामिल हुए थे। वार्ड नंबर 92 से उनकी उम्मीदवारी को महायुति द्वारा अल्पसंख्यक वोटों को साधने की एक रणनीतिक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और 15 जनवरी की तैयारी

इन घटनाओं के बाद महाराष्ट्र गृह विभाग ने मुंबई, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर के “संवेदनशील क्षेत्रों” में गश्त बढ़ाने का निर्देश दिया है। अकेले मुंबई में मतदान के दिन 40,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी।

चुनाव की महत्वपूर्ण तिथियां

कार्यक्रम तिथि
मतदान का दिन 15 जनवरी, 2026
मतगणना 16 जनवरी, 2026
सार्वजनिक अवकाश 15 जनवरी (केवल चुनावी क्षेत्रों में)

जहाँ एक ओर सत्ताधारी महायुति “विकास और सुशासन” के नाम पर वोट मांग रही है, वहीं विपक्ष (महाविकास अघाड़ी) कानून-व्यवस्था और मतदाता सूची में गड़बड़ियों का मुद्दा उठा रहा है। हालिया हिंसा ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है।

प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा

मुंबई के बीचों-बीच एक उम्मीदवार पर हमला होना इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय राजनीति में तनाव कितना गहरा है। 15 जनवरी की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है: उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और एक निष्पक्ष चुनावी माहौल बनाए रखना।

वार्ड 92 और अन्य क्षेत्रों के मतदाताओं के लिए मुख्य मुद्दे आज भी बुनियादी सुविधाएं जैसे सड़कें और पानी ही हैं, लेकिन फिलहाल ये मुद्दे सायरन की आवाजों और पुलिस बैरिकेड्स के पीछे छिप गए हैं।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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