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दिल्ली में जल संकट: पाइपलाइन फटने और रखरखाव से आपूर्ति ठप

In State
January 06, 2026
Rajneetiguru.com - दिल्ली में जल संकट पाइपलाइन फटने और रखरखाव से आपूर्ति ठप - Image Credited by Hindustan Times

देश की राजधानी में इस सप्ताह लाखों निवासियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। दक्षिण, दक्षिण-पूर्व और उत्तर दिल्ली के कई हिस्सों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के अनुसार, दो अलग-अलग घटनाओं—हैदरपुर जल शोधन संयंत्र (WTP) में पाइपलाइन फटने और सोनिया विहार संयंत्र में रखरखाव कार्य—ने शहर के प्रमुख इलाकों में सूखे जैसे हालात पैदा कर दिए हैं।

बुनियादी ढांचे पर दबाव: बड़ी खराबी

उत्तर दिल्ली में संकट का मुख्य कारण हैदरपुर WTP से निकलने वाली 800 मिमी की मुख्य पाइपलाइन का क्षतिग्रस्त होना है। अधिकारियों के मुताबिक, यह पाइपलाइन काफी गहराई में दबी हुई है और जगह की कमी के कारण मरम्मत कार्य चुनौतीपूर्ण हो गया है। तकनीकी टीमें “युद्ध स्तर” पर काम कर रही हैं, लेकिन उम्मीद है कि आपूर्ति 8 जनवरी की सुबह तक ही बहाल हो पाएगी।

वहीं, सोनिया विहार WTP, जो 140 मिलियन गैलन प्रतिदिन (MGD) क्षमता वाला संयंत्र है, में 5 और 6 जनवरी को पूर्व-नियोजित रखरखाव कार्य किया गया। इसके चलते दक्षिण और दक्षिण-पूर्व दिल्ली के पॉश इलाकों में नलों से पानी गायब है।

प्रभावित क्षेत्र: एक लंबी सूची

इस व्यवधान का प्रभाव बहुत व्यापक है:

  • उत्तर दिल्ली: रोहिणी (सेक्टर 15 से 19), रिठाला, समयपुर, बादली और सिरसपुर।

  • दक्षिण और दक्षिण-पूर्व दिल्ली: ग्रेटर कैलाश, लाजपत नगर, लोधी कॉलोनी, सरिता विहार, साउथ एक्सटेंशन, खान मार्केट, जोर बाग, ओखला, जाकिर नगर और बटला हाउस।

दिल्ली जल बोर्ड ने निवासियों को पानी के टैंकरों के लिए आपातकालीन नंबर (1916) पर संपर्क करने की सलाह दी है, हालांकि अचानक मांग बढ़ने से टैंकरों की उपलब्धता में देरी की खबरें भी आ रही हैं।

गुणवत्ता पर सवाल: एनजीओ ने दी चेतावनी

आपूर्ति में कमी के बीच, पानी की सुरक्षा को लेकर भी विवाद छिड़ गया है। जलवायु परिवर्तन और स्थिरता के क्षेत्र में काम करने वाले एनजीओ ‘अर्थ वॉरियर्स’ ने दिल्ली सरकार और जल बोर्ड को पत्र लिखकर दिल्ली में जल गुणवत्ता परीक्षण प्रणाली में गंभीर खामियों की ओर इशारा किया है।

इंदौर में हाल ही में दूषित पानी के कारण हुई मौतों का हवाला देते हुए, एनजीओ ने कहा कि दिल्ली में भी ऐसी ही स्थिति पैदा हो सकती है। कार्यकर्ता पंकज कुमार ने अपने पत्र में दावा किया कि दिल्ली की 25 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से केवल एक-दो के पास ही ‘NABL’ (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) की मान्यता है।

“राजधानी के लिए यह एक राष्ट्रीय शर्मिंदगी का विषय है,” टीम अर्थ वॉरियर के कार्यकर्ता पंकज कुमार ने कहा। “NABL मान्यता के बिना, ये परीक्षण रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों या अदालतों में मान्य नहीं मानी जातीं। दिल्ली जल बोर्ड प्रतिदिन हजारों नमूनों के परीक्षण का दावा करता है, लेकिन इसके लिए आवश्यक रसायनों की खरीद और पुरानी तकनीक इस दावे से मेल नहीं खाती।”

एनजीओ ने मांग की है कि वर्तमान निगरानी प्रणाली की जांच के लिए एक स्वतंत्र आयोग का गठन किया जाए और जल जीवन मिशन के तहत स्वतंत्र जल गुणवत्ता सचिवालयों की स्थापना की जाए।

पुरानी पाइपलाइन और लीकेज

यह संकट दिल्ली के पुराने होते जल नेटवर्क की एक पुरानी समस्या को फिर से उजागर करता है। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के 15,600 किलोमीटर लंबे पाइपलाइन नेटवर्क का लगभग 18% हिस्सा 30 साल से अधिक पुराना है। ये पुरानी पाइपें बार-बार फटती हैं और कम दबाव के दौरान सीवर के गंदे पानी को सोख लेती हैं, जिससे हैजा और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

इसके अलावा, दिल्ली में उत्पादित कुल पानी का लगभग 50-52% हिस्सा “नॉन-रेवेन्यू वाटर” (NRW) की श्रेणी में आता है, यानी यह पानी उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले ही लीकेज, चोरी या अवैध कनेक्शनों के कारण बर्बाद हो जाता है।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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